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Rajasthan : इकोलॉजिकल जोन में अवाप्ति पर 50% तक मुआवजा

सरकार ने जमीन अवाप्ति के बदले मुआवजे के रूप में जमीन देने को लेकर नई नीति लागू कर दी है। इस नीति के तहत विकास कार्यों के लिए अटकी भूमि पर जल्द कब्जा लेने के लिए खातेदारों को बड़ी राहत दी गई है। इसमें अक्टूबर 2005 से पहले के अवार्ड (अवाप्ति की पूरी प्रक्रिया) हुए विशेष मामलों में मुआवजा (जरूरत के आधार पर) 15 से बढ़ाकर 25 प्रतिशत कर दिया है।

जयपुर

Published: June 02, 2022 09:15:37 pm

सरकार ने जमीन अवाप्ति के बदले मुआवजे के रूप में जमीन देने को लेकर नई नीति लागू कर दी है। इस नीति के तहत विकास कार्यों के लिए अटकी भूमि पर जल्द कब्जा लेने के लिए खातेदारों को बड़ी राहत दी गई है। इसमें अक्टूबर 2005 से पहले के अवार्ड (अवाप्ति की पूरी प्रक्रिया) हुए विशेष मामलों में मुआवजा (जरूरत के आधार पर) 15 से बढ़ाकर 25 प्रतिशत कर दिया है।

ecological zone
ecological zone

2005 के बाद के मामलों में विकसित भूमि देने के लिए कई अतिरिक्त विकल्प दिए गए हैं। खास यह है कि इकोलॉजिकल जोन में विशेष प्रोजेक्ट के लिए 50 प्रतिशत तक विकसित भूमि देने का प्रावधान पहली बार लागू किया है। नगरीय विकास, आवासन एवं स्वायत्त शासन विभाग ने बुधवार को इसके आदेश जारी कर दिए। इससे अफसरों की मनमर्जी खत्म करने और पूरी प्रक्रिया को सरल बनाने का दावा किया है। निकायों विकल्प देने के लिए 31 दिसम्बर 2022 अंतिम तिथि होगी।

सभी आदेश, अधिसूचना समाहित: इसमें पूर्व में जारी सभी परिपत्र, आदेश और अधिसूचनाओं को समाहित किया गया है।

मुआवजे की जमीन कब मिलेगी, दो तरह की स्थिति स्पष्ट

  • अवाप्तशुदा भूमि पर खातेदार का कब्जा होने के कारण निकाय ने योजना की क्रियान्वित नहीं की हो
  • निकाय ने मुआवजा राशि न्यायालय में जमा नहीं कराई हो। न ही खातेदार को नगद मुआवजा दिया हो।


इसलिए पड़ी नई नीति बनाने की जरूरत..

  • निकायों में अवाप्ति के कई बड़ी संख्या में प्रकरण लंबे समय से अटके हैं।
  • मुआवजा नहीं मिलने के कारण मौके पर खातेदारों का कब्जा है। इस कारण कहीं सड़क रूकी हुई है तो कहीं स्कीम अटक गई तो कहीं प्रोजेक्ट आगे नहीं बढ़ पा रहा। इनमें मास्टर प्लान की सड़क, बायपास, सेक्टर सड़क, ओवरब्रिज, एलीवेटेड रोड, स्लिप लेन अन्य कार्य हैं।
  • कई निकायों में मुआवजा देने के नाम पर पिक एंड चूज के खेल की शिकायत मिलती रही।

खातेदार इन स्थितियों में दे सकेंगे विकल्प.

  • जमीन अधिग्रहण के अवार्ड में विकसित भूमि देने का उल्लेख हो या खातेदार ने पहले विकल्प दे दिया हो।
  • खातेदार ने नकद मुआवजा नहीं लिया हो और ना ही निकाय ने न्यायालय में जमा किया हो।
  • खातेदार ने नकद मुआवजा नहीं लिया और मौके पर उसका कब्जा है। न्यायालय में मामला लंबित है।

इकोलॉजिकल जोन: मिलेगा 1000 वर्गमीटर का विकसित भूखंड ...

मास्टर प्लान में इकोलॉजिकल जोन या परिधि नियंत्रण क्षेत्र में विशेष प्रोजेक्ट के लिए भूमि अधिग्रहित की जाती है तो 50 प्रतिशत तक विकसित भूखंड दिया जाएगा। इसके लिए राज्य सरकार से स्वीकृति लेनी होगी। इसके तहत 1000 वर्गमीटर का विकसित भूखंड दिया जाएगा। यहां 10 से 20 प्रतिशत कवरेज एरिया प्रावधान लागू हैं। इन क्षेत्रों में रिसोर्ट, मोटल, फार्म हाउस, इको फ्रेंडली हाउस और स्पोर्ट्स कॉम्पलेक्स सहित अन्य निर्धारित गतिविधि अनुज्ञेय हैं।


बंदिश: इन मामलों में लागू नहीं...

  • ऐसे मामले जिनमें मुआवजे का अवार्ड नकद राशि का है
  • निकाय ने भूमि का कब्जा ले लिया हो
  • योजना की पूर्ण क्रियान्विति की जा चुकी हो
  • न्यायालय में अवार्ड राशि जमा है या खातेदार को अवार्ड राशि का भुगतान किया जा चुका है और योजना की पूर्ण क्रियान्विति की चुकी है।
  • अलसर व सिलिंग एक्ट के तहत अवाप्त भूमि हो।
  • राजकीय विभाग या नगरीय विकास के स्वामित्व की भूमि के मामले।
  • ऐसे प्रकरण, जिनका सक्षम समिति में निर्णय हो चुका होगा। उन प्रकरणों को दोबारा नहीं खोला जाएगा, भले ही इन मामलों में सरकार से स्वीकृति मिलना बाकी हो।
  • तीन माह में निपटाने होंगे प्रकरण भूमि अधिग्रहण के मुआवजा प्रकरण निकायों को 3 महीने में निपटाना होगा। इसके लिए ऐसे मामलों की सूची बनाई जाएगी।
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Anand Mani Tripathi

आनंद मणि त्रिपाठी (@aanandmani) राजनीति, अपराध, विदेश, रक्षा एवं सामरिक मामलों के पत्रकार हैं। पत्रकारिता के तीनों माध्यम प्रिंट, टीवी और आनलाइन में गहरा और अपनी तेज तर्रार रिपोर्टिंग के लिए जाने जाते हैं। पश्चिम बंगाल के कलकत्ता में जन्म हुआ। प्रारंभिक शिक्षा उत्तर प्रदेश के कानपुर और बस्ती में हुई। माध्यमिक शिक्षा नवोदय विद्यालय बस्ती, फैजाबाद और पूर्वोत्तर त्रिपुरा के धलाई जिले में हुई। अयोध्या के साकेत महाविद्यालय से स्नातक और 2009 में जेआईआईएमसी,दिल्ली से पत्रकारिता का डिप्लोमा किया। हरियाणा से पत्रकारिता आरंभ की। शिक्षा, विज्ञान, मौसम, रेलवे, प्रशासन, कृषि विभाग और मंत्रालय की रिपोर्टिंग की। इंवेस्टिगेटिव रिपोर्टिंग से शिक्षा और रेलवे विभाग के कई भ्रष्टाचार का खुलासा किया। रक्षा मंत्रालय के रक्षा संवाददाता पाठयक्रम-2016 पूरा किया। इसके बाद रक्षा मामलों की पत्रकारिता शुरू कर दी। चीन, पाकिस्तान और कश्मीर मामलों पर तीक्ष्ण नजर रहती है। लेफ्टिनेंट उमर फैयाज की हत्या 2017, राइफलमैन औरंगजेब की हत्या 2018, जम्मू—कश्मीर में बदले 2018 में बदले राजनीतिक समीकरण, पुलवामा हमला 2019, कश्मीर से 370 का हटना, गलवान घाटी मुठभेड़ 2020 को बेहद करीब से जम्मू और कश्मीर में रहकर ही कवर किया। कोरोना काल 2020 में भी लददाख से नेपाल तक की यात्रा चीन के बदलते समीकरण को लेकर की। इसके साथ ही लोकसभा चुनाव 2019 में जम्मू कश्मीर, हिमाचल प्रदेश, हरियाणा और पंजाब की रिपोर्टिंग की। 9 नवंबर 2019 को श्रीराम जन्म भूमि अयोध्या मामले में आए फैसले की अयोध्या से कवर किया। 2022 उत्तरप्रदेश् चुनाव को सहारनपुर से सोनभद्र तक मोटर साइकिल के माध्यम से कवर किया। पत्रकारिता से इतर आनंद मणि त्रिपाठी को संगीत और पर्यटन का जबरदस्त शौक है। इन्हें किसी भी कार्य में असंभव शब्द न प्रयोग करने के लिए जाना जाता है...

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