राजस्थानी को मिले राजभाषा का दर्जा, सरकार एक्ट लाए - विधायक गर्ग

विधानसभा में जालौर से विधायक जोगेश्वर गर्ग ने कहा कि संविधान के मुताबिक हर बच्चे को अपनी प्रारंभिक शिक्षा मातृभाषा में मिलनी चाहिए।

By: Ashish

Published: 12 Feb 2021, 06:07 PM IST

जयपुर
विधानसभा में जालौर से विधायक जोगेश्वर गर्ग ने कहा कि संविधान के मुताबिक हर बच्चे को अपनी प्रारंभिक शिक्षा मातृभाषा में मिलनी चाहिए। शिक्षा अधिकार कानून में भी यही लिखा है। केन्द्र जो नई शिक्षा नीति में भी यही कहा गया है। लेकिन राज्य सरकार इस बारे में क्या कर रही है, इसका उल्लेख अभिभाषण में नहीं है। गर्ग ने कहा कि हिंदी को राष्ट्रभाषा बना दिया गया यह गर्व की बात है। राजस्थानी को अभी तक सम्मानजनक स्थान नहीं मिला है। उन्होंने कहा कि गांव में जाते हैं तो किसान हिंदी में नहीं बोल पाता। न ही अपनी समस्या बता लिख पाता है। 1951 की जनगणना के हिसाब से राज्य में एक करोड़ से ज्यादा लोग राजस्थानी भाषी थे। 2011 की जनगणना के हिसाब से राज्य में अभी भी राजस्थानी भाषी अच्छी संख्या में हैं। कई शोधों में राजस्थानी भाषा कोष का जिक्र करते हुए गर्ग ने कहा कि नेपाल सरकार ने राजस्थानी भाषा को मान्यता दे रखी है। यूजीसी नेट की परीक्षाएं आयोजित करती है और राजस्थानी भाषा में जेआरएफ देती है। लेकिन दुर्भाग्य से अपने घर में राजस्थानी भाषा की कीमत और उसकी पहचान नहीं है।

सर्वसम्मति से लिया था संकल्प
विधायक गर्ग ने कहा कि 2003 में बीडी कल्ला शिक्षामंत्री थे, तब सदन ने सर्वसम्मति से एक संकल्प प्रस्ताव पास किया था कि राजस्थानी भाषा को संविधान की आठवीं अनुसूची में शामिल किया जाए।
सरकार एक्ट लेकर आए
राजस्थानी भाषा की बोलियों में एकरूपता का प्रश्न बीच में नहीं आना चाहिए।अभी तक 120 विधायक सीएम को पत्र लिख चुके हैं कि राजस्थानी को मान्यता प्रदान की जाए। हालांकि मान्यता केन्द्र सरकार देगी लेकिन राजस्थान में तो उसे राजभाषा स्वीकार किया जाए। राजस्थानी को राजभाषा का दर्जा देने के लिए एक्ट लेकर आए। गर्ग ने कहा कि राजस्थान की तीन भाषाओं को डाइंग भाषा कहा जा रहा है जब भाषा मरती है तो संस्कृति समाप्त हो जाती है।

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