राजस्थानी भाषा के संवैधानिक मान्यता को लेकर आई बड़ी खबर, जानें पीएम मोदी के 'ख़ास' मंत्री अर्जुन मेघवाल ने क्या कहा?

अंतर्राष्ट्रीय मातृभाषा दिवस पर केंद्रीय मंत्री अर्जुन मेघवाल का ट्वीट, राजस्थानी भाषा को जल्द ही संवैधानिक दर्ज़ा मिलने का किया ज़िक्र, कहा, ‘संविधान की 8वीं सूची में जल्द शामिल होगी राजस्थानी भाषा’, मायड़ भाषा में अनोखे अंदाज़ से दी अंतर्राष्ट्रीय मातृभाषा दिवस की बधाई, कई सालों से उठती रही है राजस्थान भाषा को संवैधानिक दर्ज़ा दिए जाने की मांग

 

By: nakul

Published: 21 Feb 2021, 02:48 PM IST

जयपुर।

प्रदेश की मातृभाषा राजस्थानी को जल्द ही संवैधानिक दर्ज़ा मिल जाएगा। ये कहना है केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्री व बीकानेर सांसद अर्जुन राम मेघवाल का। मेघवाल ने आज अंतर्राष्ट्रीय मातृभाषा दिवस के मौके पर किये एक ट्वीट सन्देश के ज़रिये कहा कि जल्द ही राजस्थानी भाषा को संवैधानिक मान्यता मिल जायेगी। उन्होंने कहा कि राजस्थानी भाषा को संविधान की आठवीं अनुसूची में शामिल करके उसे संवैधानिक भाषा का दर्ज़ा दिलाया जाएगा।

 

गौरतलब है कि राजस्थानी भाषा को संवैधानिक दर्ज़ा दिए जाने की मांग पिछले लम्बे समय से चल रही है। इस मांग को प्रदेश से लेकर राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय मंचों तक से पुरजोर तरीके से उठाया गया है, लेकिन अब तक प्रदेशवासियों की आस अधूरी है।

 

मायड़ भाषा में ही ट्वीट
मेघवाल ने आज अंतर्राष्ट्रीय मातृभाषा दिवस पर मायड़ भाषा में ही अनोखे अंदाज़ से ट्वीट करते हुए बधाई जारी की। उन्होंने लिखा, ‘आज दुनिया भर माय मनाये जावण हाळो अंतर्राष्ट्रीय मातृभाषा दिवस री सगळा ने घणी-घणी हार्दिक बधाई। आपणी मायड़ भाषा राजस्थानी ने बहुत जल्दी ही संविधान री आठवीं अनुसूची में शामिल करगे संवैधानिक भाषा रो दर्जा दीयो जावेगो।‘

‘संघर्ष’ जारी है...
राजस्थानी भाषा को संवैधानिक दर्जा दिलाने को लेकर पहली दफा वर्ष 1936 में मांग उठी थी, लेकिन राजस्थान राज्य की विधानसभा में इस भाषा पर वर्ष 2003 में जाकर कोई एक राय बन पाई थी और बाद में प्रस्ताव बनाकर केंद्र सरकार को भेजा गया।

 

इसके बाद वर्ष 2006 में तत्कालीन केंद्रीय गृहमंत्री ने 14वीं लोकसभा के कार्यकाल में राजस्थानी को संवैधानिक दर्जा दिलाने का आश्वासन दिया था और बाकायदा बिल भी तैयार किया गया, लेकिन वह आज तक पेश नहीं हो पाया।

 

आखिर में 15वीं लोकसभा में बीकानेर सांसद के तौर पर अर्जुनराम मेघवाल ने राजस्थानी भाषा में शपथ लेने की कोशिश की, लेकिन संवैधानिक मान्यता नहीं होने के कारण उन्हें ऐसा करने से रोका भी गया था।

 

इसलिए भी उम्मीद ज़्यादा
राजस्थानी भाषा को संवैधानिक मान्यता दिलाये जाने की वर्षों पुरानी मांग पूरी होने की उम्मीद इसलिए भी इस बार ज़्यादा है क्योंकि केंद्र सरकार में प्रदेश से जुड़े नेताओं का बोलबाला है। ये पहली बार है जब प्रदेश के तीन नेता गजेन्द्र सिंह शेखावत, अर्जुन राम मेघवाल और कैलाश चौधरी मोदी टीम में केंद्रीय मंत्री के अहम् पदों पर हैं।

 

इनके अलावा लोकसभा अध्यक्ष ओम बिड़ला भी प्रदेश के कोटा संसदीय क्षेत्र से सांसद हैं। वैसे खुद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह भी राजस्थानी के अलावा भोजपुरी और भोती भाषा को मान्यता देने के संकेत दे चुके हैं, लेकिन अब तक सरकार के औपचारिक रुख का ही इंतज़ार हो रहा है।

Narendra Modi
nakul Desk
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