राजेंद्र राठौड़ का बयान, राजस्थान में कोरोना का कम्यूनिटी स्प्रेड, आंकड़े दे रहे हैं प्रमाण

उपनेता प्रतिपक्ष राजेन्द्र राठौड़ ने कहा है कि प्रदेश में पिछले एक पखवाड़े से कोरोना के संक्रमित मरीजों की संख्या प्रतिदिन 1500 से अधिक आ रही है। मृत्यु का आंकड़ा भी प्रतिदिन 13 से 15 होने के आंकड़ों से यह प्रमाणित हो गया है कि प्रदेश में वैश्विक महामारी कोरोना का सामाजिक विस्तार (कम्युनिटी स्प्रेड) हो चुका है, जो गंभीर चिंता का विषय है।

By: Umesh Sharma

Updated: 05 Sep 2020, 04:34 PM IST

जयपुर।

उपनेता प्रतिपक्ष राजेन्द्र राठौड़ ने कहा है कि प्रदेश में पिछले एक पखवाड़े से कोरोना के संक्रमित मरीजों की संख्या प्रतिदिन 1500 से अधिक आ रही है। मृत्यु का आंकड़ा भी प्रतिदिन 13 से 15 होने के आंकड़ों से यह प्रमाणित हो गया है कि प्रदेश में वैश्विक महामारी कोरोना का सामाजिक विस्तार (कम्युनिटी स्प्रेड) हो चुका है, जो गंभीर चिंता का विषय है।

राठौड़ ने कहा कि राज्य में कोरोना संक्रमित मरीजों की संख्या 90000 को छू रही है। चिकित्सा विभाग द्वारा जारी इलाज के प्रोटोकाॅल के अनुसार कोरोना संक्रमित एक्टिव केसों को 14 दिन चिकित्सालय में आइसोलेशन बेड पर भर्ती होना आवश्यक है। मरीजों की लगातार बढ़ती संख्या के कारण अब सरकारी व निजी चिकित्सालयों में कोरोना मरीजों के लिए बेड की उपलब्धता कम पड़ने लगी है। इससे साफ है कि अब सरकार को अपने चिकित्सा संसाधन बढ़ाने के साथ निजी चिकित्सालयों को भी विश्वास में लेना पड़ेगा। निजी चिकित्सालयों में कोरोना के मरीजों के प्रतिदिन उपचार 5000 से लेकर 9000 रुपए रखा गया है जो आम व्यक्ति के बूते से बाहर है। राठौड़ ने मांग की है कि राज्य सरकार को चिकित्सकों व पैरामेडिकल स्टाफ की आपात भर्ती तुरंत करनी चाहिए।

464 करोड़ रुपए बकाया चुकाए सरकार

राठौड़ ने कहा कि निजी चिकित्सालय संघ द्वारा लगातार 3 माह से महात्मा गांधी आयुष्मान स्वास्थ्य बीमा योजना से जुड़े उनके क्लेम की बकाया राशि 464 करोड़ देने की मांग कर रहा है। सरकार तुरंत यह राशि उपलब्ध कराए ताकि कोरोना में निजी चिकित्सालयों का सहयोग मिल सके।

कोर्ट के निर्देशों की भी पालना नहीं

राठौड़ ने कहा कि जून में सुप्रीम कोर्ट ने सरकार को कोरोना के इलाज के लिए चिन्हित निजी व सरकारी चिकित्सालयों का 15 दिन में उच्चाधिकार प्राप्त समिति द्वारा निरीक्षण कराने के निर्देश दिए थे। साथ ही सीसीटीवी कैमरे लगाने और भर्ती मरीज के एक परिवारजन को चिकित्सालय परिसर में रुकने की व्यवस्था करने के कहा था, लेकिन इनकी पालना भी नहीं की जा रही है। इस वजह से एक महीने में दो बार न्यायालय ने कोरोना के इलाज में बरती जा रही कोताही के कारण राज्य सरकार को नोटिस तक जारी किए है। इससे यह सिद्ध होता है कि प्रदेश में कोरोना के बीमार व्यक्तियों की स्क्रीनिंग, जांच व इलाज के सरकारी दावे कपोल कल्पित है।

COVID-19
Umesh Sharma Reporting
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