केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह तक पहुंचाई गई प्रदेश में बर्ड फ़्लू की स्थिति, शिकायतों के साथ की गई मांगे

प्रदेश में बर्ड फ़्लू के फैलते संक्रमण का मामला, उपनेता प्रतिपक्ष राजेंद्र राठौड़ ने लिखा केंद्रीय मंत्री को पत्र, सैंकड़ों पक्षियों की मौत की स्थिति से करवाया अवगत, राज्य में प्रशासनिक लापरवाही-अनदेखी की ओर दिलाया ध्यान, वेटनरी आरटीपीसीआर लैब स्थापित करने की मांग



By: Nakul Devarshi

Published: 06 Jan 2021, 09:44 AM IST

जयपुर।

प्रदेश में बर्ड फ़्लू के बढ़ते पैमाने को लेकर अब भाजपा ने केंद्र सरकार का ध्यान आकर्षित करते हुए हस्तक्षेप की गुहार लगाई है। विधानसभा में उपनेता प्रतिपक्ष राजेन्द्र राठौड़ ने केन्द्रीय पशुपालन मंत्री गिरिराज सिंह को इस संबंध में पत्र लिखा है। पत्र के ज़रिये राजस्थान में ''बर्ड फ्लू'' की विकराल होती स्थिति के बारे में बताने के साथ ही केंद्र से विशेषज्ञों का एक दल यहां भेजने और वेटनरी आरटीपीसीआर लैब स्थापना के लिए स्वीकृति देने की मांग भी की गई है।


सैंकड़ों पक्षियों ने गंवाई जान, सिलसिला जारी
राठौड़ ने पत्र में बताया है कि वर्तमान में देश वैश्विक महामारी कोरोना संकट की गंभीर चुनौतियों का सामना कर रहा है ऐसी विषम परिस्थितियों में अब ''बर्ड फ्लू'' का नया संकट राजस्थान सहित अन्य राज्यों में तेजी से फैल रहा है जो चिंता का विषय है। राजस्थान के झालावाड़, कोटा, बारां, जोधपुर, सीकर, नागौर, अजमेर, सवाईमाधोपुर और जयपुर सहित विभिन्न जिलों में विगत 10 दिनों में सैकड़ों पक्षी बर्ड फ्लू और अन्य कारणों से असमय काल कवलित हो गए हैं जिसका सिलसिला अभी भी जारी है।


और घातक ना हो जाए पैमाना...
केंद्रीय पशुपालन मंत्री को लिखे पत्र में ये भी कहा गया कि बर्ड फ्लू की दस्तक से राज्य के करीब 146 लाख मुर्गियों पर भी संकट के बादल मंडरा रहे हैं। अगर मुर्गियों में बर्ड फ्लू का संक्रमण फैलता है तो यह अधिक घातक साबित होगा, क्योंकि संक्रमित मुर्गियों से इंसानों में बर्ड फ्लू वायरस के फैलने की ज्यादा संभावना बनी रहती है।


राज्य सरकार की शिकायत!
राठौड़ ने पत्र में बर्ड फ़्लू मामले में राज्य सरकार की शिकायत भी की है। उन्होंने केंद्रीय मंत्री को बताया कि राज्य सरकार की ओर से बर्ड फ़्लू की रोकथाम की दिशा में कोई ठोस कदम नहीं उठाये जा रहे हैं। प्रदेश में विगत 10 दिनों के भीतर सैकड़ों पक्षी प्रशासनिक लापरवाही और अनदेखी की भेंट चढ़ चुके हैं। राज्य सरकार का पक्षियों की लगातार हो रही मौत की रोकथाम के लिए कोई प्रभावी नियंत्रण नहीं दिख रहा है। राजस्थान में पशुपालन, स्वास्थ्य और वन विभाग में आपसी समन्वय की कमी से बर्ड फ्लू की रोकथाम में कोई सुनियोजित योजना तक नहीं बन पाई है। राज्य का सरकारी अमला न सिर्फ इच्छाशक्ति बल्कि संसाधनों के मोर्चे पर भी बुरी तरह विफल साबित हो रहा है।


ये रखी मांग
उपनेता प्रतिपक्ष राजेन्द्र राठौड़ ने केंद्रीय मंत्री को बताया कि बर्ड फ्लू की जांच के लिए फिलहाल एकमात्र हाई सिक्योरिटी एनिमल डिजीज लैब भोपाल में स्थित है। राजस्थान सरकार के पशुपालन विभाग ने प्रदेश में वेटनरी आरटीपीसीआर लैब खोलने के संबंध में केन्द्र सरकार को पत्र लिखने की बात कही है। केंद्र जल्द इस लैब को स्वीक्रीती प्रदान करे। साथ ही विशेषज्ञों का दल भी प्रदेश में भेजे।


केंद्रीय मंत्री को पत्र में ये भी ख़ास बातें-
- 25 दिसंबर को कोटा संभाग के झालावाड़ में कौओं की मौत का पहला मामला सामने आया था जिसके बाद भोपाल स्थित जांच लैब की रिपोर्ट में मृत कौवों में एवियन इन्फ्लूएंजा बर्ड फ्लू की पुष्टि हुई थी, जबकि अन्य सैंपलों की जांच रिपोर्ट आज दिनांक तक नहीं आई।
- राज्य में विगत 10 दिनों में अब तक 522 से अधिक पक्षियों की मौत हो चुकी है जिनमें कौए, कोयल, कॉमन डक, किंग फिशर और मेगपाई पक्षी और मुर्गियां भी शामिल हैं।
- इन दिनों शीतकालीन प्रवास के लिए सुदूर इलाकों से करीब 150 से ज्यादा प्रजातियों के हजारों देशी-विदेशी पक्षी भी प्रदेश में आए हुए हैं जिनमें ब्लैक हेडेड गल, ग्रेट कोमोरेंट, ब्राउन हैडेड गल, बार हैडेड गूस प्रजातियां शामिल है।
- बर्ड फ्लू वर्ष 2006 से 2015 तक देश में 28 बार फैल चुका है जिससे देश के अलग-अलग राज्यों में 74.30 लाख पक्षियों की मौत हो चुकी है।
- नवंबर 2019 में देश की सबसे बड़ी पक्षी त्रासदी राजस्थान की सांभर झील में हुई थी जिसमें करीब 25 हजार से ज्यादा प्रवासी पक्षियों की मौत हुई थी।

Nakul Devarshi
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