Ramayan: ...आखिर क्यूं शूटिंग से पहले प्रायश्चित करता था 'Ravan' ,देखें वीडियो

Ramayan Serial: अरविंद त्रिवेदी ने रावण का रोल निभाकर बटोरी लोकप्रियता
250 से भी अधिक गुजराती फ़िल्मों में किया काम
केवट किरदार के ऑडिशन में पहुंचे थे मुंबई

By: SAVITA VYAS

Updated: 18 Apr 2020, 08:24 PM IST

जयपुर। 33 साल बाद एक बार फिर दूरदर्शन (Dordarshan) पर प्रसारित धारावाहिक रामायण में अहंकारी रावण का वध दिखाया जाता है। रामायण में भले ही रावण के किरदार का अंत हो गया हो, लेकिन इतने सालों बाद भी रावण का किरदार निभाने वाले एक्‍टर अरविंद त्रिवेदी (Actor Arvind Trivedi) ने एक बार फिर अभिनय से दर्शकों का दिल जीत लिया। वो दौर भी अलग ही था। लोगों को रामायण का सप्ताह भर इंतजार रहता था। जैसे ही रामायण आती थी, वैसे ही उसे देखने के लिए लोग सब काम छोड़कर अपने घरों में बैठ जाते थे। सड़कों पर सन्नाटा पसर जाता था। हर कोई टीवी स्क्रीन के सामने नजर आता था। एक बार फिर रामायण इन दिनों दूरदर्शन पर फिर से प्रसारित हो रही है। लॉकडाउन के चलते सड़कों पर सन्नाटा है और इस बार भी इस सीरियल को वही लोकप्रियता और लोगों का प्‍यार मिल रहा है।

रामानंद सागर (Ramanand Sagar) की रामायण में अरविंद त्रिवेदी ने जिस शिद्दत से रावण का किरदार निभाया था, वो आज भी याद किया जाता है। रावण का अंहकार, उसकी हंसी और अभिमान को अरविंद त्रिवेदी ने सफलतापूर्वक पर्दे पर उतारा था। रावण का किरदार निभाने वाले एक्‍टर अरविंद त्रिवेदी अब 84 सालों के हो गए हैं। टीवी पर उन्‍होंने भले ही रावण का किरदार निभाया हो, लेकिन असल जिंदगी में वह राम के भक्‍त हैं।

आपको बता दें कि अरविंद मूल रुप से मध्यप्रदेश के शहर इंदौर से ताल्लुक रखते हैं। उन्होंने 250 से भी ज़्यादा गुजराती फ़िल्मों में काम किया है। उनका थिएटर से भी जुड़ाव रहा है। जब उन्हें पता चला कि रामानंद सागर 'रामायण' बना रहे है और किरदारों की कास्टिंग कर रहे हैं तो वो ऑडिशन देने के लिए गुजरात से मुंबई पहुंचे। धारावाहिक में रावण के किरदार के लिए अभिनेता अमरीश पूरी को कास्ट करने की चर्चा थी। ऑडिशन में बड़ी संख्या में कलाकार पहुंचे थे। केवट के किरदार के लिए ऑडिशन देकर जैसे ही अरविंद वहां से जाने लगे तो उनकी बॉडी लैंग्वेज और ऐटिट्यूड देख कर रामानंद सागर ने उन्हें रोक लिया और बोले—'मुझे मेरा रावण मिल गया'। बस एक पल में अरविंद का जीवन बदल गया। इस धारावाहिक से अरविंद को इतनी लोकप्रियता मिली कि वो लोगों के लिए अरविंद त्रिवेदी नहीं, लंकापति रावण बन गए।

अरविंद त्रिवेदी का किरदार इतना दमदार था कि जब उनकी आवाज टीवी पर दशानन लंकेश के रूप में गूंजती थी, चेहरे पर गुस्से के भाव और चौड़ा माथा देखकर ऐसा लगता था कि वास्तविक रावण ही छोटे पर्दे पर उतर आया है। दरअसल, अरविंद को शूटिंग के लिए तैयार होने में पांच घंटे लगते थे। उनका मुकुट ही केवल दस किलो का हुआ करता था और उस पर उन्हें दूसरे कई आभूषण और भारी-भरकम वस्त्र भी पहनने होते थे। अरविंद के लिए रावण का किरदार निभाना किसी चुनौती से कम नहीं था। अरविंद असल ज़िन्दगी में राम और शिव भक्त हैं। ऐसे में शूटिंग पर जाने से पहले अरविंद को मन ही मन रोना आता था। अपने आराध्य श्रीराम के खिलाफ स्क्रिप्ट के हिसाब से श्रीराम को उल्टे-सीधे शब्द बोलना मजबूरी थी। इसीलिए अरविंद पूरा दिन उपवास रखते और शूटिंग शुरू होने से पहले राम और शिव की पूजा आराधना करते और जब शूटिंग ख़त्म हो जाती तो कपड़े बदलकर रात को अपना उपवास खोलते थे।

आपको बता दें रामायण की शूटिंग गुजरात-महाराष्ट्र बॉर्डर के पास उमरगाम में हुई थी। ऐसे में अ रविंद को मुंबई से ट्रेन पकड़कर उमरगाम जाना पड़ता था। कई बार तो उन्होंने खड़े होकर भी यात्रा की। जैसे ही धारावाहिक टीवी पर आने लगा तो अरविंद लोकप्रिय हो गए। इसके बाद लोग उनको बैठने के लिए सीट तक देने लग गए। रामायण में रावण का किरदार निभाने के बाद अरविंद त्रिवेदी ने राजनीति में आ गए। 1991 में अरविंद त्रिवेदी गुजरात की साबरकांठा लोकसभा सीट से सांसद चुने गए। 2002 में उन्हें भारतीय फिल्म प्रमाणन बोर्ड (सीबीएफ़सी) (CBFC)के अध्यक्ष के रूप में नियुक्त किए गए। उम्र के इस पड़ाव में अरविंद त्रिवेदी का ज्यादातर समय भगवान राम की आराधना में गुजर रहा है।

SAVITA VYAS Desk
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