भाईचारे की जिंदगी अपनाएं

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By: Harshit Jain

Published: 16 May 2020, 04:55 PM IST

जयपुर. रिवायत में है कि बदगुमानी से बचो, बदगुमानी बहुत झूठी बात है और दूसरों की टोह में ना लगो और तजस्सुस में ना रहो और बाहम (आपस में) हसद ना रखो और एक दूसरे से इख्तिलाफ ना करो और आपस मे बुगज व नफरत ना रखो और परवरदिगार के बन्दों आपस में एक दूसरे के भाई-भाई बने रहो और परवरदिगार के बन्दे बनकर रहो, भाई-भाई बनकर रहो। इस हदीस में अच्छी जिंदगी गुजारने के गुर बताए गए हैं। बगैर किसी सबूत व दलील के सिर्फ अपने सोच विचार और खयालात से किसी के बारे में गलत राए कायम कर लेना बदगुमानी है। इससे आपस की जिन्दगियां और अजीरन हो जाती है। बिना वजह एक-दूसरे की टोह में लगना करना ताअल्लुक को खराब कर देता है। बन्दगी की जि़ंदगी गुजारी जाएगी तो घमंड पैदा नहीं होगा। आपस में भाईचारे की जिंदगी अपनाएंगे तो दुनिया की जिंदगी अमन, चैन और सुकून से गुजरेगी।

— मो. जाकिर नोमानी, मुफ्ती ए शहर


रोजा इफ्तार और सहरी का वक्त
मुताबिक इफ्तार सहरी

रविवार सोमवार
मुफ्ती—ए—शहर 7.10 4.08


जामा मस्जिद 7.11 4.01

दारुल—उलूम रजविया 7.12 4.03

शिया इस्ना अशरी 7.24 4. 00

Harshit Jain
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