‘राम’ ने तीर-धनुष उठाया भी नहीं और लपटों में धिर गई ‘ताडक़ा’

‘राम’ ने  तीर-धनुष उठाया भी नहीं और लपटों में धिर गई ‘ताडक़ा’

Pushpesh Sharma | Publish: Oct, 14 2018 02:24:45 AM (IST) | Updated: Oct, 14 2018 02:34:10 AM (IST) Jaipur, Rajasthan, India

रामलीला मंचन के दौरान हादसा

श्रीगंगानगर.

एक हजार हाथियों जैसी ताकत रखने वाली ‘ताडक़ा ’ खुद अपना ही शिकार हो गई। भगवान राम उसका वध करते इससे पहले वह आग से झुलस गई।
मामला श्रीगंगानगर की पुरानी आबादी में चल रही रामलीला का है। जहां शुक्रवार रात ताडक़ा का अभिनय करने वाला कलाकार आग की लपटों में घिर गया। अचानक घटी इस घटना के बाद मंचन रोक दिया गया। रामलीला में ताडक़ा वध प्रकरण का मंचन चल रहा था। ताडक़ा बने राज शर्मा (40) आतिशबाजी करता हुआ मंच की तरफ बढ़ा। मुंह से आग उगलने वाला सीन करना था। कलाकार ने एक हाथ में मशाल तो दूसरे में हाथ में केरोसिन की बोतल थामी।
उसने जैसे ही मुंह में केरोसिन डाल आग उगलने का प्रयास किया तो पैर फिसल गया। जैसे ही कलाकार नीचे गिरा, उसके ऊपर केरोसिन की बोतल और उसपर जलती हुई मशाल गिर गई। देखते ही देखते उसके सिर पर लगी विग ने आग पकड़ ली। कलाकार को आग की लपटों में घिरा देख अफरा-तफरी मच गई। लोगों ने आग बुझाकर झुलसी हालत में उसे अस्पताल पहुंचाया। तब तक वह ४५ फीसदी झुलस चुका था। गंभीर हालत में उसे शनिवार सुबह जयपुर के लिए रेफर कर दिया गया। पुरानी आबादी थाने के हैड कांस्टेबल राजपाल ने बताया कि इस संबंध में किसी पक्ष की ओर से कोई रिपोर्ट नहीं दी गई है। यह रामलीला एकता युवा नाटक क्लब हाउसिंग बोर्ड के तत्वावधान में चल रही है।

जानिए रामायण की ताडक़ा
रामायण की एक पात्र ताडक़ा सुकेतु यक्ष की पुत्री थी, जिसका विवाह सूड नामक राक्षस से हुआ था। यह अयोध्या के समीप स्थित सुंदरवन में अपने पति व दो पुत्रों सुबाहू व मारीच के साथ रहती थी। रामायण में बताया गया है कि उसके शरीर में हजारों हाथियों का बल था। उसके प्रकोप से सुंदरवन का नाम ताडक़ा वन पड़ गया था। उसी वन में विश्वामित्र सहित कई ऋषि-मुनि भी रहते थे। उनके जप, तप और यज्ञ में ये राक्षस बाधाएं खड़ी करते थे। ऋषि विश्वामित्र राजा दशरथ से अनुरोध कर राम और लक्ष्मण को सुंदर वन लाए। राम ने ताडक़ा और ऋषि ने यज्ञ की पूर्णाहुति के दिन सुबाहू का भी वध कर दिया था।

 

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