सुबह से रात तक हांडीपुरा गुलजार, जयपुर में रामपुरी हिट

-परवान चढ़ रही पतंग-डोर की बिक्री, बाजार में गहमा-गहमी
-आस-पास के कस्बों से भी पहुंच रहे खरीदार

By: Amit Pareek

Updated: 10 Jan 2019, 10:42 PM IST

Jaipur, Jaipur, Rajasthan, India

जयपुर. मकर संक्रांति करीब है। ऐसे में शहर में पतंगबाजी परवान चढ़ रही है। उधर, काइट फेस्टिवल को देखते हुए पतंग-डोर की बिक्री भी बढ़ रही है। शहर के पुराने पतंग बाजार हांडीपुरा में सुबह से रात तक गहमा-गहमी दिखाई दे रही है। लोग रात तक पतंग-मांझा, सद्दा खरीदने में व्यस्त हैं। विक्रेताओं का कहना है कि जयपुर पतंग बिक्री का ही नहीं निर्माण का भी बड़ा केंद्र है। यहां घर-घर में पतंग निर्माण के कारखाने हैं। इन कारखानों में पूरे परिवार सालभर जुटे रहते हैं। इसीलिए पूरे देश में जब भी कहीं पतंग पर्व होता है तो रामपुर, बरेली की तरह यहां से भी पतंग-डोर जाती है।
पतंग कारोबारी मोहम्मद सलमान के मुताबिक खास बात यह है कि जयपुर में होने वाली पतंगबाजी के लिए बरेली-रामपुर (यूपी) की पतंगों की डिमांड रहती है। जबकि जयपुर के कारखानों में बनने वाली पतंगें राज्य के अन्य शहरों, मध्यप्रदेश, दिल्ली, महाराष्ट्र, गुजरात के आसमान पर छाने जाती हंै।
छोटे कारोबारी भी पहुंच रहे
मकर संक्रांति में अब चार दिन शेष रह गए हैं इस कारण शहर के पतंगबाज ही नहीं आस-पास कस्बों से भी बड़ी संख्या में छोटे कारोबारी पतंग-डोर खरीदने हांडीपुरा पहुंच रहे हैं। फिलहाल सुबह से देर रात तक बाजार गुलजार है। कारोबारियों को खाना खाने तक की फुर्सत नहीं है। लोग ज्यादातर छोटी पतंगे खरीद रहे हैं। वहीं बरेली के मांझे की ज्यादा मांग है। पतंगें जहां 70-100 रुपए प्रति कौड़ी (20) बिक रही हैं वहीं मांझा 500-700 चरखी (छह गट्टे) के हिसाब से डिमांड में है। प्लास्टिक की पतंगों, रंगीन सद्दे को लेकर भी बच्चों में क्रेज है।

चायनीज से तौबा
सभी विक्रेताओं का कहना था कि बाजार में चायनीज मांझे पर पूरी तरह रोक है। कोई भी चायनीज मांझे को नहीं बेच रहा। सभी चायनीज मांझे पर सरकारी रुख से खुश हैं और उससे दूरी बना रखी है।

विश लैम्प से क्लोजिंग
पतंग कारोबारियों का कहना था कि शहर में मकर संक्रांति के ट्रैंड में एक परिवर्तन आया है जिस उत्साह से पर्व की शुरुआत की जाती है उसी उमंग के साथ उसकी क्लोजिंग होती है। पिछले कुछ सालों से जहां शाम ढलते-ढलते पटाखे चलाने की परंपरा बढ़ी है। उसी को आगे बढ़ाते हुए लोग अब विश लैम्प को आकाश में छोड़ काइट फेस्टिवल का समापन करते हैं। इसी को ध्यान में रख लोग पतंग-डोर के साथ विश लैम्प भी चाव से खरीद रहे हैं।

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