Rare Bird- उदयपुर में दिखा भारत का पहला 'ल्यूसिस्टिक किंगफिशर'

उदयपुर जिले के दो पक्षीप्रेमियों को भारत में पहली बार और विश्व में तीसरी बार 'ल्यूसिस्टिक कॉमन किंगफिशर' पक्षी की साइटिंग करने की उपलब्धि हासिल हुई है।

By: Rakhi Hajela

Updated: 04 Oct 2021, 09:46 PM IST

Jaipur, Jaipur, Rajasthan, India

Rare Bird- उदयपुर में दिखा भारत का पहला 'leucistic kingfisher
विश्व में तीसरी बार साइटिंग का भी मिला गौरव
पक्षीप्रेमी भानुप्रताप और विधान को मिली उपलब्धि

उदयपुर/जयपुर।
उदयपुर जिले के दो पक्षीप्रेमियों को भारत में पहली बार और विश्व में तीसरी बार 'ल्यूसिस्टिक कॉमन किंगफिशर' पक्षी की साइटिंग करने की उपलब्धि हासिल हुई है। शहर के नीमच माता स्कीम निवासी भानुप्रतापसिंह और हिरणमगरी सेक्टर पांच निवासी विधान द्विवेदी को थूर गांव में 'ल्यूसिस्टिक कॉमन किंगफिशर' की यह दुर्लभ साइटिंग हुई है, जबकि इसका नेस्ट गांव के ही तालाब पर मिला है। उन्होंने बताया कि यह किंगफिशर उन्होंने सुबह 6 बजकर 19 मिनट पर पहली बार देखा। इसके बाद उन्होंने इस किंगफिशर के फोटो और विडियो क्लिक कर जानकारी जुटानी प्रारंभ की और नेस्टिंग की तलाश की। कई दिनों की खोज के बाद इसके यहीं रहने और नेस्टिंग करने की पुष्टि हुई तब इन्होंने विशेषज्ञों की सहायता से रिसर्च पेपर तैयार कर इंडियन बर्ड वेबसाइट पर भेजा है।
राजपूताना सोसायटी ऑफ नेचुरल हिस्ट्री के संस्थापक और भरतपुर के पर्यावरण वैज्ञानिक डॉ.सत्यप्रकाश मेहरा ने ल्यूसिस्टिक कॉमन किंगफिशर की उदयपुर में साइटिंग को भारत की पहली साइटिंग बताया है और कहा कि इससे पहले भरतपुर के घना पक्षी अभयारण्य में वर्ष 1991 में एल्बिनो कॉमन किंगफिशर की साईटिंग रिपोर्टेड है।
ऐसा होता है एल्बिनो और ल्यूसिस्टिक
डॉ. सत्यप्रकाश मेहरा ने बताया कि जिस तरह से मनुष्यों में सफेद दाग या सूर्यमुखी होते हैं उसी तरह से अन्य जीवों का एल्बिनो और ल्युसिस्टिक होना भी एक तरह की बीमारी है। इसमें भी एल्बिनो में तो पूरी तरह जीव सफेद हो जाता है व आंखे लाल रहती है, इसी प्रकार ल्यूसिस्टिक में शरीर के कुछ भाग जैसे आंख, चोंच, पंजों व नाखून का रंग यथावत रहता है तथा अन्य अंग सफेद हो जाते हैं।
इंडियन बर्ड ने लगाई मुहर
भानुप्रतापसिंह और विधान द्विवेदी ने बताया कि दुर्लभ किंगफिशर के संबंध में तथ्यात्मक जानकारी एकत्र करने के बाद शोध पत्र को इंडियन बर्ड वेबसाइट में इस खोज को प्रमाणित करने के लिए भेजा था जहां से दो दिन पूर्व ही उनकी इस खोज को प्रमाणित किया है। यह पक्षी विश्व में पहली बार यूके में और दूसरी बार ब्राजील में देखा गया था।

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