तो बंद हो जाएंगी राशन की दुकानें

तो बंद हो जाएंगी राशन की दुकानें

Anil Chauchan | Publish: Apr, 17 2018 08:11:09 PM (IST) Jaipur, Rajasthan, India

तो बंद हो जाएंगी राशन की दुकानें...

जयपुर .
प्रदेश में चल रही राशन की दुकानों पर पिछले कुछ सालों में लगाए गए नियमों के चलते २५ हजार से ज्यादा दुकानों पर संकट की स्थिति खड़ी हो गई है। खाद्य विभाग दावा कर रहा है कि प्रदेश में दो करोड़ राशनकार्ड बनाए गए हैं पर एक चौथाई यानी करीब ५० लाख राशनकार्ड धारियों को भी ठीक तरह से सरकारी योजनाओं का पूरा लाभ नहीं मिल पा रहा है। राशन की दुकानों पर केरोसीन, चीनी तो पहले की तुलना में ना के बराबर पहुंच रही है। गेहूं लेने वालों की संख्या काफी कम हो गई है। उधर राशन विक्रेताओं का कहना है कि सरकारी नियमों के चलते वे दुकान का खर्चा तक नहीं निकाल पा रहे हैं। एेसे में पुरानी दुकाने बंद हो रही है और नई दुकान के लिए कोई आवेदन नहीं कर रहा है।
हाल यह है कि खाद्य विभाग की ओर से प्रदेश में कई जगह राशन की दुकानों को खोलने के लिए लोगों से आवेदन मांगे पर अधिकतर जगह आवेदन करने वाले लोगों की संख्या कम रही। जयपुर जिले में करीब १४५ दुकानों के लिए आवेदन मांगे थे पर लोगों ने अधिकतर दुकानों के लिए आवेदन ही नहीं किया। नई दुकानें खोलने और पुरानी को बंद करने से रोकना विभाग के लिए चुनौति बन गया है। उधर इस संबंध में जब विभाग के अधिकारियों से बात करनी चाहिए तो वे जवाब देने से बचते रहे। खाद्य विभाग ने कालाबाजारी को रोकने के लिए राशन की दुकानों से खाद्य सामग्री बेचने के लिए पोस मशीनों की अनिवार्यता का नियम लगाया। इसमें मुख्य समस्या यह आती है कि अधिकतर राशनकार्ड डीलर्स पढ़े लिखे नहीं है। दूसरी तरफ नेटवर्क नहीं मिलसे मशीन काम नहीं करती है। एेसे में उपभोक्ताओं को राशन सामग्री लेने के लिए कई चक्कर लगाने पड़ते हैं।
यह है नियमों में -:
सार्वजनिक वितरण प्रणाली के अंतर्गत राज्य में गेहंू, चावल, चीनी एवं केरोसीन तेल उचित मूल्य की दुकानों के माध्यम से वितरित किए जाते हैं। ये वस्तुएं निर्धारित मात्रा में निश्चित मूल्य लेकर उपभोक्ताओं को राशन कार्ड के आधार पर दी जाती हैं। भारत सरकार से खाद्यान्न आवंटित किए जाने के आदेशों के पश्चात राज्य के जिलों के लिए खाद्यान्न नियत अवधि में उठाव व्यवस्था के साथ उप आवंटन जारी हो जाना चाहिए। जिलों में जिला कलक्टर्स की ओर से तहसील व पंचायत समिति अनुसार किए गए आवंटन के आधार पर संबंधित थोक विक्रेता के माध्यम से आवंटित वस्तुएं उचित मूल्य दुकान तक पहुंचाई जानी चाहिए।
यह हो रहा है धरातल पर -:
धरातल पर देखा जाए तो सार्वजनिक वितरण प्रणाली के तहत जो सामग्री मिलनी चाहिए थी, वह लगभग-लगभग खत्म होती जा रही है। अधिकतर लोगों के घरों में गैस कनेक्शन हैं। इसे देखते हुए विभाग ने केरोसीन वितरण को बहुत कम कर दिया। चावल तो खत्म ही हो गया है। गेहंू भी अंत्योदय, बीपीएल, विधवा व अन्य श्रेणियों के लिए ही है। चीनी जिस समय मिलनी चाहिए वह उस समय नहीं मिलती। इसके लिए उपभोक्ताओं को दो से तीन माह तक का इंतजार करना पड़ता है।

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