नाटकों के माध्यम से क्या संदेश दे रहे हैं जयपुर के रंगकर्मी

रवीन्द्र मंच पर बीते दिनों मंचित नाटकों में सामाजिक मुदृदों को उठाया गया,दर्शकों की बढ़ी संख्या

 

By: rajesh walia

Updated: 07 Jun 2018, 04:48 PM IST

अब्दुल बारी/ जयपुर

शहर के कलाकारों और रंगकर्मियों का मन्दिर कहे जाने वाले रवीन्द्र मंच पर इन दिनों थिएटर आर्टिस्ट देश के गंभीर और ज्वलन्त मुद्दों को नाटकों के माध्यम से सशक्त तरीके से उठा रहे हैं। खास बात यह है कि इन नाटकों की कहानी में हर एक पक्ष को दमदार तरीके से पेश किया जा रहा है। ज्वलन्त मुद्दे होने के कारण इन नाटकों की ओर दर्शक भी खिंचे चले आ रहे हैं। सोशल मीडिया का दुष्प्रभाव, लिव इन रिलेशनशिप, आधुनिक रिश्ते आदि नए मुद्दों पर बने गए यह नाटक सफल साबित हो रहे हैं। कुछ पुराने नाटकों को भी रवीन्द्र मंच के रंगकर्मी आधुनिकता से जोड़ते हुए इन्हें नए अंदाज में दर्शकों के सामने परोस रहे हैं। इस बदलाव के बाद मिल रही सराहना और बढ़ती दर्शक संख्या से रवीन्द्र मंच के रंगकर्मियों और प्रशासन में भी खुशी है।

 

आधुनिक युग के रिश्तों से यूथ को किया जागरूक

परम्परा नाट्य समिति की ओर से पिछले दिनों नाटक पालतू का मंचन किया गया।जिसमें बताया गया कि नौजवान लड़के लड़कियां किस तरह एक दूसरे की ओर आकर्षित हो जाते हैं। लेकिन समय गुजरते ही इन खोखले रिश्तों की हकीकत सामने आ जाती है। जाने अनजाने में बन रहे इन रिश्तों से खुद को जोड़ रहे युवा कई बार इनके टूटने पर अवसाद तक से ग्रसित हो जाते हैं। युवाओं को जागरूक करते इस नाटक का निर्देशन तमाशा साधक दिलीप भट्ट ने किया व लेखन डॉ भगवान अटलानी का रहा। नाटक की कहानी दर्शकों को अपनी ओर आकर्षित करने में कामयाब रही।


गांवों में आज भी जारी है ऑनर किलिंग..

आख्यान संस्था की ओर से खेले गए नाटक पुकार में ऑनर किलिंग पर आधारित ग्रामीण परिवेश की कहानी दर्शाई गई। जिसमें बताया गया कि देश के कई इलाकों में आज भी अपनी सामाजिक प्रतिष्ठा के नाम पर और झूठी इज्जत को बचाने के लिए लोग प्रेमी युगलों की हत्या कर देते हैं। नाटक में यह भी बताया गया कि किसी के साथ बुरा करने वाले व्यक्ति को इसी संसार में अपने गलत कामों की कीमत चुकानी पड़ती है। तपन भट्ट लिखित इस नाटक का निर्देशन सौरभ भट्ट ने किया। देश की इस समस्या को नाटक में अच्छे ढंग से पेश किया गया।

 

नाटक में दिखी लिव इन रिलेशनशिप की हकीकत


रवीन्द्र मंच के मुख्य सभागार में बीते दिनों नाटक चिड़िया और चांद का मंचन किया गया। जिसमें वर्तमान समय में प्रचलित लिव इन रिलेशनशिप की बारीकियों को बेबाकी से उठाया गया। नाटक में बताया गया की आधुनिकता के कारण युवाओं के स्वभाव में आ रहे परिवर्तन के चलते किस तरह लड़के लड़कीयां एक साथ रहना शुरू कर देते हैं। लेकिन समय बीतने के साथ अलग भी हो जाते हैं। लिव इन रिलेशनशिप की पड़ताल करते इस नाटक का लेखन व निर्देशन विकास बाहरी ने किया। नाटक ने यूथ को अंत तक बांधे रखा।


भारतीय संस्क्रति से कराया रूबरू


भारत का इतिहास उठाया जाए तो पता चलता है कि भारत की गौरवशाली परम्परा के प्रभाव में पुरुषों की भांति स्त्रियां भी सशक्त अवस्था में थीं। इन्हीं बिंदुओं पर आधारित गुप्त साम्राज्य के समय को दर्शाते नाटक ' चित्रलेखा ' का मंचन पिछले दिनों रवीन्द्र मंच पर किया गया। नाट्योत्सव संस्था की ओर से खेले गए इस नाटक का लेखन भगवती चरण वर्मा का है । दशकों पुरानी लिखित नाटक की कहानी के महत्व को देखते हुए इसका नाट्य रूपांतरण पहली बार किया गया। नाटक का निर्देशन सुनील चौधरी ने किया। भारतीय इतिहास से रूबरू कराते इस नाटक की दर्शकों ने काफी सराहना की।


सोशल मीडिया के साइड इफेक्ट पर डाली रोशनी


सोशल मीडिया के दुष्प्रभाव की ओर लोगों का ध्यान खींचते नए नाटक ' मजहब ' क मंचन कुछ दिन पहले किया गया। अनुपम रंग थिएटर सोसायटी की ओर से खेले गए इस नाटक का लेखन व निर्देशन के के कोहली ने किया। नाटक में बताया गया कि इंटरनेट और सोशल मीडिया एक तरफ हमारे लिए उपयोगी साबित होते हैं तो दूसरी तरफ इसके कुछ साइड इफेक्ट भी हैं। कभी कभी ये साइड इफेक्ट हमारे समाज पर इतने हावी हो जाते हैं कि हम अपना विवेक ही खो बैठते हैं जिससे साम्प्रदायिक दंगे भड़क उठते हैं। नाटक में बड़ी संख्या में दर्शक उपस्थित रहे।

 


लेटेस्ट मुद्दों पर आधारित नाटक खींच रहे हैं दर्शक

मैं मंच पर नए मुद्दों पर आधारित नाटकों का लेखन और निर्देशन कर रहा हूं। इस दौरान दर्शकों की संख्या बता रही है कि उन्हें लेटेस्ट मुद्दों पर आधारित कहानियां पसन्द आ रही हैं। राम रहीम, हॉरर हवेली आदि हमारी ओर से मंचित हुए नाटक नए हैं। अब हमारी संस्था एक कर्जदार पिता और उसकी बेटी पर आधारित नाटक का पहली बार मंचन कर रहे हैं। उम्मीद है बड़ी संख्या में नाटक को दर्शक मिलेंगे।

फिरोज मिर्जा
युवा लेखक व निर्देशक
आगाज दी अमेजिंग रंगमंच ग्रुप


पुराने नाटकों को नही मिल पाते दर्शक

मंच पर पुराने नाटकों का भी मंचन किया जाता है लेकिन यह नाटक कम ही दर्शकों को आकर्षित कर पाते हैं। इस बात को देखते हुए मैं लगातार नए नाटक तैयार कर रहा हूं। पिछले दिनों हमारी ओर से खेले गए नए नाटक अंडे के छिलके, किराएदार, उजास और पालतू ज्वलन्त मुद्दों पर आधारित रहे। इसलिए दर्शकों ने इन्हें काफी पसंद किया।

दिलीप भट्ट
परंपरा नाटृय समिति
वरिष्ठ रंगकर्मी

rajesh walia Desk/Reporting
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