खुलासा: एक लाख की दवाइयां बेचने वाली फर्म की इस हकीकत ने उड़ा दिए चिकित्सा अधिकारियों के होश

एक लाख रुपए की अमानक दवाइयों के कारोबार ने ड्रग कंट्रोलर विभाग की नींद उड़ा दी है। हालांकि मामले की गंभीरता से जांच की जा रही है, लेकिन जहां से दवा खरीदना बताया गया है। वहां मौके पर एेसी कोई फर्म नहीं मिलने पर अधिकारी भी सकते में आ गए हैं और दवा खरीदने वाले फर्म मालिक को ट्रेस आउट कर रहे हैं।

Vishwanath Saini

09 Feb 2016, 01:16 PM IST

एक लाख रुपए की अमानक दवाइयों के कारोबार ने ड्रग कंट्रोलर विभाग की नींद उड़ा दी है। हालांकि मामले की गंभीरता से जांच की जा रही है, लेकिन जहां से दवा खरीदना बताया गया है। वहां मौके पर एेसी कोई फर्म नहीं मिलने पर अधिकारी भी सकते में आ गए हैं और दवा खरीदने वाले फर्म मालिक को ट्रेस आउट कर रहे हैं। हालांकि शुरूआती तौर पर फर्म मालिक के नाम विभागीय पत्र जारी कर उससे स्पष्टीकरण मांगा गया है। जवाब नहीं आने पर उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई के निर्देश जारी किए जाएंगे।

जानकारी के अनुसार ड्रग कंट्रोलर विभाग के पास सीकर जिले से जीफी एंटी बाइटिक दवा सिफेक्जीम 200 एमजी की 16 हजार टेबलेट खरीदी जाने का मामला सामने आया है। हालांकि नमूने जांच के बाद लेबोरेट्री ने दवा को अमानक घोषित कर दिया है, लेकिन अवमानक की स्थिति देखकर स्वयं जांच  अधिकारियों के भी होश उड़ गए कि दवा में सिफेक्जीम की जितनी मात्रा दर्शाई गई है। उसमें करीब एक चौथाई सिफेक्जीम की मात्रा ही पाई गई है।

जांच हुई तो सामने आया है कि दवा अजीतगढ़ में स्थित एक फर्म से खरीदी गई है, लेकिन वहां भी जब मौके पर ड्रग कंट्रोलर ऑफिसर पहुंचे तो कोई फर्म नहीं मिली। ड्रग कंट्रोलर ऑफिसर मनोज गढ़वाल ने बताया कि दवा खरीदने वाली फर्म के मालिक हरिश यादव से पूछताछ कर फर्जीवाडे़ का खुलासा किया जाएगा।  

इतनी होनी चाहिए मात्रा

विभाग के अनुसार 200 एमजी की टेबलेट में सिफेक्जीम की 90-110 फीसदी मात्रा होनी चाहिए। लेकिन, फेल हुई दवा में केवल इसकी मात्रा मात्र 68.19 एमजी ही पाई गई है।  

एेसे पकड़ में आया मामला

ड्रग कंट्रोलर ऑफिसर मनोज गढ़वाल के अनुसार 18 मई 2015 को जयपुर स्थित एक मेडिकल स्टोर से जीफी 200  (सिफेक्जीम टेबलेट आईपी 200 एमजी) बेच नंबर सीकेएम 5031 डी/एम के नमूने जांच के लिए ड्रग कंट्रोलर ऑफिसर ममता मीणा ने लिए थे। रिपोर्ट में उन्हें अवमानक बताए जाने पर जब जांच की गई तो सामने आया है कि मेडिकल स्टोर पर दवा अजमेर स्थित हरिश मेडिकल्स के यहां से भिजवाई गई है। जब इसकी तहकीकात हुई तो निकल कर आया कि इन्होंने जो दवा खरीद का बिल पेश किया है, उसमें अजीतगढ़ स्थित श्याम मेडिकल एजेंसी से 1,7900 रुपए की दवा खरीदी गई है। इसमें दवा की 16 हजार टेबलेट शामिल हैं।

प्रदेश में हुए थे 47 नमूने फेल

प्रदेश के सरकारी अस्पतालों में निशुल्क वितरण के लिए निजी विक्रेताओं से खरीदी 47 प्रकार की दवाओं के नमूने दिसंबर तक फेल हो गए थे। इन दवाओं के करीब 69 लाख यूनिट्स (टेबलेट व इंजेक्शन) सप्लाई अस्पतालों के स्टोर से वापस भेजनी पड़ी थी। इसमें सीकर से भी चार नमूने भरे गए थे।

डॉक्टर की पहली पसंद

फिजीशियन डॉ. देवेंद्र दाधीच का कहना है कि एंटीबाइटिक के तौर पर ओपीडी में सबसे ज्यादा यहीं दवा मरीज को लिखी जाती है। हालांकि इसमें सिफेक्जीम की मात्रा यदि कम होती है तो यह टेबलेट घातक साबित हो सकती है।
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