सुविधा क्षेत्रों में भी बहुमंजिला इमारतों की जुगत में सरकार

जोधपुर हाईकोर्ट को सौंपी रिपोर्ट में हुआ खुलासा

By: SAVITA VYAS

Published: 20 Jul 2018, 03:03 PM IST

जयपुर। मास्टर प्लान की पालना कराने की बजाय सरकार ने हाईकोर्ट से 6 मामलों में राहत मांगी है। इसमें स्कीम क्षेत्रों में बहुमंजिला इमारतों के निर्माण सहित अवैध निर्माण को वैध करने की छूट का मामला शामिल है। जानकारी के अनुसार सरकार निर्धारित मूलभूत सुविधाओं के बावजूद उसी इलाके में बहुमंजिला इमारतें खड़ी कराना चाह रही है। इसके पीछे बिल्डरों का भी दबाव बताया जा रहा है। इसी कारण सरकार ने कोर्ट में पेश की गई रिपोर्ट में आर्थिक नुकसान का भी हवाला दिया है। जबकि 12 जनवरी 2017 के आदेश में कोर्ट स्पष्ट कर चुका है कि बहुमंजिला इमारतों के लिए अलग से क्षेत्र चिह्नित किए जाएं। सरकार ने मौजूदा मास्टर प्लान के तहत ही काम करने की भी अनुमति चाही है। राज्य सरकार ने पेश रिपोर्ट में केवल 56 शहरों के जोनल प्लान बनाने की जरूरत मानी है। बाकी निकायों की आबादी 50 हजार से कम होने का तर्क देकर कहा है कि सभी शहरों का जोनल प्लान बनाने की जरूरत नहीं है।

इन 6 बिन्दुओं के जरिए मांगी बड़ी राहत
1. मौजूदा मास्टर प्लान के तहत काम करने की अनुमति मिले, क्योंकि यह कानूनी प्रक्रिया के तहत लागू किया गया है।
2. स्कीम क्षेत्र में बहुमंजिला इमारत निर्माण की स्वीकृति मिले। जबकि कोर्ट ने इसके लिए अलग से जोन बनाने के निर्देश दे रखे हैं।
3. मास्टर प्लान में जो क्षेत्र सुविधा क्षेत्र, खुला क्षेत्र, खेल मैदान के रूप में दर्शित किया गया, उसमें संशोधन की अनुमति दी जाए। इसके लिए तर्क दिया है कि मास्टर प्लान बनाते समय की और मौजूदा स्थितियों में बदलाव संभव है। ऐसे में उनमें संशोधन करना जरूरी हो जाता है।
4. जिन इलाकों में मिश्रित भू-उपयोग नहीं है, वहां डवलपमेंट कंट्रोल रेग्यूलेशन नियम के तहत बदलाव की स्वीकृति मिले।
5. अवैध निर्माण को वैध करने के लिए क पाउंड करने की छूट मिले। इसमें सेटबैक निर्माण भी वैध हो जाएंगे।
6. कृषि भूमि पर अनधिकृत रूप से बसी कॉलोनियों में 90 प्रतिशत से अधिक हिस्से में विकास हो चुका है। ऐसे में यहां बने भवनों को तोडऩा संभव नहीं है। इनका नियमन किया जाए तो लोगोंं को जमीन का आधिकारिक तौर पर मालिकाना हक मिल सकेगा।
(सरकार ने जनहित को आधार बनाकर राहत मांगी है)

निकाय में आबादी की स्थिति
पांच शहर ऐसे हैं जहां आबादी पांच लाख से ज्यादा है। इनमें जयपुर, जोधपुर, उदयपुर, कोटा, अजमेर शामिल हैं।
28 निकायों में आबादी एक लाख से ज्यादा, लेकिन पांच लाख से कम।
24 निकाय में आबादी 50 हजार से एक लाख के बीच।
136 निकाय ऐसे हैं जहां आबादी 50 हजार से कम।

SAVITA VYAS Desk
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