राहत की खबर: मानसून आने तक पानी की नहीं आएगी कमी, लबालब भरा है बीसलपुर बांध

बीते साल अच्छे मानसून के कारण बीसलपुर बांध ओवरफ्लो हो गया था। अभी प्रतिदिन बीसलपुर बांध से जयपुर शहर के लिए 480 एमएलडी पानी लिया जा रहा है। बांध में शुक्रवार तक 313.85 मीटर पानी बचा हुआ है। जल संसाधन विभाग के अधिकारियों का कहना है कि आगामी मानसून तक 0. 85 आरएल मीटर पानी के खर्च होने की उम्मीद है...

By: dinesh

Published: 25 Apr 2020, 11:01 AM IST

जयपुर। बीते साल अच्छे मानसून के कारण बीसलपुर बांध ओवरफ्लो हो गया था। अभी प्रतिदिन बीसलपुर बांध से जयपुर शहर के लिए 480 एमएलडी पानी लिया जा रहा है। बांध में शुक्रवार तक 313.85 मीटर पानी बचा हुआ है। जल संसाधन विभाग के अधिकारियों का कहना है कि आगामी मानसून तक 0. 85 आरएल मीटर पानी के खर्च होने की उम्मीद है। मानसून आने तक बीसलपुर बांध का जल स्तर 313 आरएल मीटर से नीचे नहीं जाएगा। बांध की भराव क्षमता 315.50 आरएल मीटर है।


गौरतलब है कि पिछले मानसून की मेहरबानी के चलते प्रदेश में अच्छी बारिश हुई थी। जिससे बीसलपुर बांध में पानी लाने वाली प्रमुख नदी के साथ उसकी सहायक नदियां भी पूरे वेग पर थी जिससे बांध में जोरदार पानी की आवक हुई और बांध के गेट कई दिनों तक लगातार खोलने पड़े थे।

वहीं दूसरी ओर प्रदेश में गर्मी बढ़ने के साथ ही कई इलाकों में पेयजल की किल्लत भी शुरू हो गई है जयपुर शहर में परेशानी उन इलाकों में ज्यादा हो रही है जहां बीसलपुर की सप्लाई नहीं है और टैंकरों से पानी पहुंचाया जा रहा है। पानी भरने के दौरान सोशल डिस्टेंसिंग की जमकर धज्जियां उड़ाई जा रही है। इसके साथ ही ट्यूबवेल से पेयजल सप्लाई वाले इलाकों में भी पेयजल की समस्या आ रही है। दरअसल, लॉकडाउन के कारण कुछ समय तक खराब ट्यूबवैल की मेंटेनेंस का काम भी नहीं हो पाया। ऐसे में आगे आने वाले दिनों में किल्लत और बढ़ सकती है।

यह है राजधानी जयपुर की स्थिति
आमेर के ज्यादातर हिस्से में बीसलपुर की सप्लाई नहीं है। टैंकरों से पानी सप्लाई के दौरान भीड़ इकट्ठी हो रही है। आमेर के शिव कुंडा की तलाई पर शुक्रवार सुबह एक सरकारी टैंकर आया। उससे पानी भरने के लिए लंबी लाइन लग गई। लोग सोशल डिस्टेंसिंग भूलकर पानी भरने लगे। स्थानीय लोगों का कहना है कि इतनी आबादी के बीच में एक टैंकर पानी आता है जो पर्याप्त नहीं है। अगर सोशल डिस्टेंसिंग का ध्यान रखेंगे तो पानी नहीं भर पाएंगे। केवल आमेर ही नहीं बल्कि अन्य इलाकों की कच्ची बस्तियों में भी ऐसे ही हालात हैं।

तैयारी में जुटा विभाग
प्रदेश में पेयजल व्यवस्था के लिए 23000 ट्यूबवेल जलदाय विभाग ने खोद रखे हैं। अधिकारियों का कहना है कि हर साल जलस्तर नीचे जाने के कारण ट्यूबवेल सूख रहे हैं। प्रदेश में 4 लाख हैंडपंप भी पेयजल व्यवस्था के लिए खोदे गए हैं। विभाग के अधिकारियों के अनुसार इनमें से 50% हैंडपंप की खराब स्थिति के कारण हर साल मरम्मत करवाई जाती है। इसके लिए 1 अप्रेल से अभियान शुरू किया है जो 31 जुलाई तक चलेगा। अभियान के तहत 531 वाहन पर ढाई हजार मजदूर लगाए गए हैं।

Show More

राजस्थान पत्रिका लाइव टीवी

हमारी वेबसाइट पर कंटेंट का प्रयोग जारी रखकर आप हमारी गोपनीयता नीति और कूकीज नीति से सहमत होते हैं।
OK
Ad Block is Banned