शोध: मेढ़क से बना जीवित रोबोट नष्ट कर देगा कैंसर

इंग्लैंड की वर्मोंट और टफ्ट्स विश्वविद्यालयों के शोधकर्ताओं ने छोटा सा जीवित रोबोट बनाने में सफलता हासिल की है। शोधकर्ताओं ने इसका नाम जेनोबोट्स दिया है। यह अफ्रीका में पाए जाने वाले जेनोपस लेविस प्रजाति के मेंढक के भ्रूण की स्टेम कोशिकाओं से बनाया गया है। शोधकर्ताओं के अनुसार, जेनोबोट्स न सिर्फ कैंसर की कोशिकाओं को नष्ट करने में मददगार होगा, बल्कि समुद्र में स्थित माइक्रोप्लास्टिक को भी इसके जरिए निकाला जा सकेगा।

लंदन. इंग्लैंड की वर्मोंट और टफ्ट्स विश्वविद्यालयों के शोधकर्ताओं ने छोटा सा जीवित रोबोट बनाने में सफलता हासिल की है। शोधकर्ताओं ने इसका नाम जेनोबोट्स दिया है। यह अफ्रीका में पाए जाने वाले जेनोपस लेविस प्रजाति के मेंढक के भ्रूण की स्टेम कोशिकाओं से बनाया गया है। शोधकर्ताओं के अनुसार, जेनोबोट्स न सिर्फ कैंसर की कोशिकाओं को नष्ट करने में मददगार होगा, बल्कि समुद्र में स्थित माइक्रोप्लास्टिक को भी इसके जरिए निकाला जा सकेगा। एक मिमी चौड़ाई जेनोबोट्स को उन कोशिकाओं में भी प्रवेश कराया जा सकेगा, जो काफी पतली होती हैं। शोध के लेखक प्रोफेसर जोशुआ बोंगार्ड के अनुसार, यह न तो पारंपरिक रोबोट है और न ही किसी जीव की कोई प्रजाति। यह एक ऐसी कलाकृति है, जो जीवित भी है और इसे प्रोग्राम भी किया जा सकता है। माइक्रोसर्जन डॉ. डगलस ब्लेकिस्टन ने स्टेम कोशिकाओं को मेंढक के शरीर से काटा। इसके बाद चिमटी और छोटे इलेक्ट्रोड से माइक्रोस्कोप के जरिए आकार में ढाला गया। इसके बाद इन्हें एक शरीर में ढाला गया, जिसके बाद कोशिकाओं ने फिर से काम करना शुरू कर दिया। प्रोफेसर बोंगार्ड के मुताबिक, जेनोबोट्स पूरी तरह से जैविक रूप से नष्ट होने वाला है। यह जेनोबोट्स सात दिनों में अपना काम पूरा कर लेते हैं, तो यह मृत स्किन सेल्स की तरह हो जाते हैं। इनसे शरीर को किसी प्रकार का कोई नुकसान होगा।

dhirya Desk
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