कहने को प्रतिबंधित लेकिन बीते एक साल से केवल राजनीति

कहने को प्रतिबंधित लेकिन बीते एक साल से केवल राजनीति
Restricted to say but only politics for last one year

Kamlesh Agarwal | Updated: 13 Sep 2019, 02:15:50 PM (IST) Jaipur, Jaipur, Rajasthan, India

कहने को नगर निगम ने एक अगस्त 2010 को पॉलीथिन का उपयोग प्रतिबंधित कर दिया लेकिन परकोटा हो या फिर मानसरोवर, मालवीय नगर, बरकत नगर, टौंक फाटक, सहित प्रताप नगर और सांगानेर हर तरफ पॉलीथिन का उपयोग हो रहा है। सब्जी मंडी से लेकर सभी दुकान ठेला और यहां तक कि बड़े शोरूम भी धड़ल्ले से प्लास्टिक बैग्स का प्रयोग कर रहे हैं। सबसे बड़ी बात यह है कि इस साल नगर निगम ने कार्रवाई के नाम पर केवल औपचारिकता पूरी की है जबकि कानून प्लास्टिक कैरी बैग्स का उपयोग किए जाने पर जब्ती के साथ ही कोर्ट में परिवाद पेश किया जाना


जयपुर।


कहने को नगर निगम ने एक अगस्त 2010 को पॉलीथिन का उपयोग प्रतिबंधित कर दिया लेकिन परकोटा हो या फिर मानसरोवर, मालवीय नगर, बरकत नगर, टौंक फाटक, सहित प्रताप नगर और सांगानेर हर तरफ पॉलीथिन का उपयोग हो रहा है। सब्जी मंडी से लेकर सभी दुकान ठेला और यहां तक कि बड़े शोरूम भी धड़ल्ले से प्लास्टिक बैग्स का प्रयोग कर रहे हैं। सबसे बड़ी बात यह है कि इस साल नगर निगम ने कार्रवाई के नाम पर केवल औपचारिकता पूरी की है जबकि कानून प्लास्टिक कैरी बैग्स का उपयोग किए जाने पर जब्ती के साथ ही कोर्ट में परिवाद पेश किया जाना चाहिए।

नगर निगम के तत्कालीन आयुक्त हेंमत गेरा ने 1 अगस्त 2010 को प्लास्टिक पॉलीथिन कैरी बैग्स के उपयोग भंडारण और निर्माण पर रोक लगाई। इसी के साथ पूरे शहर में जन जागृत्ति का अभियान भी शुरू किया। निगम ने 2018 की शुरूआत में प्लास्टिक कैरी की रोकथाम को लेकर अभियान शुरू किया और इसका असर भी देखने को मिला। निगम ने शहर में इस दौरान करीबन 8000 किलो प्लास्टिक कैरी बैग्स जब्त किया। इसके बाद महापौर बदले लोकसभा चुनाव आ गए इसी के साथ अभियान ठप हो गया। इस साल निगम ने अब तक करीबन 1500 सौ किलो प्लास्टिक जब्त किया है वह भी केवल छोटे दुकान और थड़ी ठेले वालों से।

परिवाद भूल केवल जुर्माना
नगर निगम प्लास्टिक कैरी बैग्स के उपयोग पर चालान करने के साथ जुर्माना वसूल रहा है। जबकि प्लास्टिक कैरी बैग्स मिलने पर कानून परिवाद दाखिल किया जाना चाहिए। ताकि प्लास्टिक कैरी बैग्स रखने पर सजा भी दी जा सके लेकिन इस साल अब तक सरकार की ओर से एक भी परिवाद दाखिल नहीं किया गया है।



सरकारी कार्यालय में रोक की तैयारी

सरकारी ऑफिस में प्लास्टिक की बोतलों पर रोक लग सकती है। इस संबंध में केंद्रीय कैबिनेट सचिव राजीव गौबा ने वीसी के जरिए मुख्य सचिवों की बैठक ली थी जिसमें प्लास्टिक के उपयोग पर पाबंदी के लिए कई उपाय करने के निर्देश दिए थी।


प्लास्टिक कैरी बैग, पॉलीथिन के विनिर्माण, भंडारण, विक्रेता परिवहन पर रोक है और ऐसा किए जाने पर 5 साल की जेल और ₹100000 जुर्माना या दोनों का प्रावधान है। लेकिनप्रशासन पर कार्रवाई की जगह औपचारिकता पूरी हो रही है

एडवोकेट युवरात सामंत,राजस्थान हाईकोर्ट

व्यापार महासंघ प्लास्टिक कैरी बैग्स के उपयोग के खिलाफ है इसके लिए व्यापारियों को संदेश भी दिया गया सरकार को चाहिए कैरी बैग्स पर पूरी तरह से रोक लगाने के लिए निर्माण करने वाली फैक्टरी पर रोक लगाए अब तक केवल दस बीस या आधा किलो कैरी बैग्स मिलने पर दुकानदारों पर कार्रवाई होती है लेकिन निर्माता पर कार्रवाई नहीं होती

सुभाष गोयल अध्यक्ष जयपुर व्यापार महासंघ


नगर निगम ने सभी जोन उपायुक्तों को इस संबंध में निर्देशित कर रखा है और लगातार कार्रवाई हो रही है बड़े शोरूम और दुकानदार इसका उपयोग नहीं कर रहे हैं मंडी और छोटे दुकानदार कर रहे हैं जिन पर अब सख्ती की जा रही है

नवीन भारद्वाज, उपायुक्त हेल्थ


नगर निगम लगातार लोगों को प्लास्टिक कैरी बैग्स का उपयोग नहीं करने के लिए अभियान चला रहा है इस संबंध में प्रचार प्रसार भी किया जा रहा है लगातार निगम प्रशासन कार्रवाई भी कर रहा है।

विष्णु लाटा, महापौर, जेएमसी


एक नजर प्लास्टिक की भयावह स्थिति पर


पिछले 50 वर्ष में हमने अगर किसी चीज का सबसे ज्यादा उपयोग किया है तो वो है प्लास्टिक। 1960 में दुनिया में 50 लाख टन प्लास्टिक बनाया जा रहा था। आज यह मात्रा बढ़कर 300 करोड़ टन के पार हो चुकी है। वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम की एक रिपोर्ट के अनुसार भारत में सालाना 56 लाख टन प्लास्टिक का कूड़ा बनता है। दुनियाभर में जितना कूड़ा हर साल समुद्र में बहा दिया जाता है उसका 60 प्रतिशत हिस्सा भारत डालता है। जिस रफ्तार से हम प्लास्टिक इस्तेमाल कर रहे हैं, उससे वर्ष 2020 तक दुनियाभर में 12 अरब टन प्लास्टिक कचरा जमा हो चुका होगा। दुनिया के 25 से ज्यादा देश अपना 1,21,000 मीट्रिक टन कचरा किसी न किसी रूप में भारत भेज देते हैं। हमारे देश में 55,000 मीट्रिक टन प्लास्टिक का कचरा पाकिस्तान और बांग्लादेश से आयात किया जाता है। सीपीसीबी के अनुसार 60 शहरों में प्रति दिन 4059 टन प्लास्टिक कचरा निकलता है।

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