न्यू स्टाफिंग पैटर्न का रिव्यू करना भूला शिक्षा विभाग


हर तीन साल में किया जाना था रिव्यू
2015 में किया गया था पैटर्न को लागू
रिव्यू नहीं होने से सात हजार सीनियर सैकेंडरी स्कूलों में हिंदी और अंग्रेजी व्याख्याताओं के पदों को नहीं मिली स्वीकृति

By: Rakhi Hajela

Updated: 23 May 2021, 07:59 AM IST



जयपुर, 23 मई
प्रशासनिक सुधार विभाग (Administrative Reforms Department) के आदेश पर शिक्षा विभाग (Education Department)ने 2015 में न्यू स्टाफिंग पैटर्न (New Staffing Pattern) तो लागू कर दिया। पैटर्न के मुताबिक स्कूल के स्टाफ में भी बढ़ोतरी की गई लेकिन 2015 के बाद से इसे रिव्यू नहीं किया गया। नतीजा प्रदेश में क्रमोन्नत किए गए सात हजार सीनियर सैकेंडरी स्कूलों में हिंदी और अंग्रेजी व्याख्याताओं को स्वीकृति नहीं मिल पाई। जबकि जब इस पैटर्न को लागू किया गया था तब उसे हर तीन साल में रिव्यू किए जाने की प्रावधान भी किया गया था। ऐसे में अब न्यू स्टाफिंग पैटर्न को रिव्यू किए जाने की मांग जोर पकड़ रही है। जिससे प्रदेश के इन सात हजार सीनियर सैकेंडरी स्कूलों में व्याख्याताओं के 14 हजार व्याख्याताओं के पद सृजित किए जा सकें। राजस्थान प्राथमिक और माध्यमिक शिक्षक संघ ने नए स्टाफिंग पैटर्न को रिव्यू किए जाने की मांग की है। संघ के प्रदेश महामंत्री महेंद्र पांडे ने इस संबंध में शिक्षामंत्री को पत्र लिखा है।
गौरतलब है कि प्रशासनिक सुधार विभाग के आदेश पर 28 मई 2014 और 23 दिसंबर 2014 के तहत गठित राज्य स्तरीय समिति ने माध्यमिक शिक्षा के स्कूलों के लिए शैक्षिक और गैर शैक्षिक स्टाफ के पदों के मापदंड की अभिशंषा की थी। इसके बाद शिक्षा विभाग ने नए स्टाफिंग पैटर्न के नाम से 30 अप्रेल 2015 में लागू कर स्कूल के स्टाफ में बढ़ोतरी कर दी। इस पैटर्न को राज्य के वित्त विभाग ने भी अनुमोदित किया था। जब इस पैटर्न को तैयार किया गया था तब इसे हर तीन साल में रिव्यू करने का प्रावधान भी रखा गया था।
आ रही है यह समस्या
गौरतलब है कि वर्ष 2015 से इस पैटर्न के लागू होने के बाद हर साल अधिकांश स्कूलों में विद्यार्थियों की संख्या में लगातार बढ़ोतरी हो रही है। कुछेक स्कूल ऐसे भी हैं जहां विद्यार्थियों की संख्या कम हुई है। ऐसे में आवश्यक है कि
इन स्कूलों में छात्र संख्या के मुताबिक शिक्षक के पदों पर वृद्धि या कमी की जाए जिससे आवश्यकता वाले स्कूलों में
शिक्षकों के पद मिल सकें।
यह है पैटर्न में प्रावधान
न्यू स्टाफिंग पैटर्न में इन स्कूलों में तीसरे वर्ष में कक्षा 11 और 12 में विद्यार्थियों की संख्या 80 होने पर अंग्रेजी,
हिंदी अनिवार्य के लिए व्याख्याता का पद सृजित करने का प्रावधान है।
यह है स्कूलों की स्थिति
राज्य के स्कूली शिक्षा विभाग की ओर से वर्ष 2015 से लेकर अब तक लगभग सात हजार स्कूल सीनियर सैकेंडरी स्कूलों में क्रमोन्नत किए गए हैं। इन नवक्रमोन्नत स्कूलों में नए स्टाफिंग पैटर्न के मुताबिक अनिवार्य हिंदी, अंग्रेजी व्याख्याता पद नहीं दिए गए। जबकि इन स्कूलों में 11वीं और 12वीं कक्षा की छात्र संख्या 80 पार कर चुकी है। इतना ही नहीं राज्य के वित्त विभाग की ओर से भी माध्यमिक शिक्षा के लिए इन सात हजार नवक्रमोन्नत स्कूलों में अनिवार्य हिंदी, अंग्रेजी व्याख्याता पद आवंटित नहीं किए गए।
शिक्षामंत्री से की मांग
राजस्थान प्राथमिक और माध्यमिक शिक्षक के प्रदेश महामंत्री महेंद्र पांडे ने इस संबंध में शिक्षामंत्री गोविंद सिंह डोटासरा को पत्र भेजा है और विभाग में 2015 से लागू न्यू स्टाफिंग पैटर्न को रिव्यू करवाए जाने की मांग की है। पांडे ने कहा कि 2015 से अब तक नव क्रमोन्नत स्कूलों के लगभग सात हजार सीनियर सैकेंडरी स्कूलों में कक्षा 11 और 12 के लिए अनिवार्य हिंदी और अंग्रेजी के लिए 14 हजार व्याख्याता के पदों की स्वीकृति वित्त विभाग ने दिलवाई जानी चाहिए।

Rakhi Hajela Desk
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