4 दिन में किसानों को मिल रही फसल की कीमत

अत्याधुनिक वैज्ञानिक नवाचार को कृषि से जोड़कर राजस्थान और भारत सरकार ने सुशासन और पारदर्शिता का एक ऐसा उदाहरण प्रस्तुत किया है, जिसने वर्षों से देरी का दंश झेल रहे धरतीपुत्रों के चेहरे पर सुकूनभरी मुस्कुराहट ला दी है।

देश में पहली बार राजस्थान के किसानों को उनकी उपज का मूल्य सरकार की तरफ से महज 4 दिनों के भीतर उनके बैंक खातों में मिल रहा है। यह संभव हुआ है, आधार आधारित बायोमैट्रिक वेरिफिकेशन के जरिए।
पारदर्शी व्यवस्था, जवाबदेह प्रशासन
राजस्थान में एक पारदर्शी व्यवस्था के तहत राजफेड की ओर से किसानों से आधार वेरिफिकेशन के बाद खरीदारी की जा रही है। इससे पारदर्शिता, जवाबदेही और सुशासन की एक नई क्रांति आ गई है। सहकारिता मंत्री उदयलाल आंजना बताते हैं कि बायोमेट्रिक सत्यापन के जरिए उन्हीं किसानों की फसल खरीदी जा रही है, जो वास्तविक रूप से उस फसल के हकदार हैं। यही नहीं, किसानों से उनकी उपज तहसील स्तर पर बनाए गए खरीद केंद्रों पर की जा रही है।
बिचौलियों की भूमिका खत्म
इस व्यवस्था का फायदा वास्तविक किसान को हो रहा है और इसमें बिचौलियों के साथ अन्य व्यापारी और पड़ोसी राज्यों की किसानों की भूमिका समाप्त हो गई है। विभाग के मुख्य शासन सचिव नरेशपाल गंगवार इसे एक क्रांतिकारी शुरुआत बताते हैं।
कैसे होती है नई व्यवस्था में खरीद
सहकारिता विभाग के रजिस्ट्रार नीरज के. पवन बताते हैं कि सबसे पहले किसान आधार कार्ड की कॉपी, जन आधार कार्ड, गिरदावरी पी-35 और बैंक पासबुक को लेकर अपने नजदीकी खरीद केंद्र या ई-मित्र केंद्र पर जाता है। यहां पर उसका आधार से सत्यापन करते हुए अन्य सभी सूचनाएं अपलोड की जाती हैं और रजिस्ट्रेशन के समय फसल की मात्रा और उसे खोलने की तिथि किसान को उसके रजिस्टर्ड मोबाइल नंबर पर एसएमएस के जरिए दी जाती है।
तहसील स्तर पर बने खरीद केंद्र
इसके बाद तय तिथि पर वह तहसील में बने खरीद केंद्र पर जाकर अपने वास्तविक दस्तावेज दिखाने के बाद उपज को तुलवाकर एक बिल तैयार करवा लेता है। इसके बाद उसकी फसल का मूल्य उसके बैंक खाते में सीधे जमा हो जाता है।
वेयर हाउस ई रिसिप्ट ने बदली व्यवस्था
पवन बताते हैं कि पहले न्यूनतम समर्थन मूल्य पर फसल बेचने के बाद किसान को उसका मूल्य मिलने में महीनों लग जाते थे। लेकिन अब वेयर हाउस ई रिसिप्ट सेवा प्रणाली के जरिए इस समस्या को हल कर दिया गया है। जैसे ही उपज को राजफेड के गोदाम से नाफेड को भेजा जाता है, वहां से तुरंत वेयरहाउस ई रिसिप्ट जारी कर दी जाती है।
महीनों का काम 3 दिनों में
पहले मानव आधारित प्रणाली में नाफेड की ओर से रुपए जारी करने में महीनों लग जाते थे लेकिन अब वेयर हाउस ई-रिसिप्ट के जरिए नाफेड रकम को 3 दिन के भीतर जारी कर देता है और चौथे दिन यह राशि किसान के खाते में जमा करवा दी जाती है।
तहसील स्तर रजिस्ट्रेशन-खरीद
इस प्रणाली से किसानों से उपज की खरीद करने के तरीके में क्रांतिकारी बदलाव आ गया है और वास्तविक किसान लाभान्वित हो रहा है। खरीद केंद्रों को तहसील स्तर पर बनाने से किसानों को ज्यादा दूर नहीं आना नहीं पड़ता और किसान अपनी उपज बेचने के लिए रजिस्ट्रेशन भी तहसील स्तर पर ही करवा सकता है।

chandra shekar pareek Desk/Reporting
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