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राइट हेल्थ कानून का ड्रॉफ्ट तैयार, बजट सत्र में बिल पेश करेगी गहलोत सरकार!

-राइट टू हेल्प कानून लागू करने वाला देश का पहला राज्य बनेगा राजस्थान,मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने केंद्र सरकार से भी की थी राइट टू हेल्थ को संविधान के मूल अधिकारों में शामिल करने की मांग, आगामी मंत्रिपरिषद की बैठक में भी राइट टू हेल्प के ड्राफ्ट पर होगी चर्चा

 

जयपुर

Published: January 10, 2022 10:30:57 am

फिरोज सैफी/जयपुर।

प्रदेश में कोरोना के बढ़ते मामलों के बीच लोगों को स्वास्थ्य का अधिकार देने के लिए राज्य की गहलोत सरकार राइट टू हेल्थ बिल लेकर आ रही है। राइट टू हेल्थ बिल का मसौदा सरकार ने तैयार कर लिया है।
विश्वस्त सूत्रों की माने तो फरवरी माह में शुरू होने वाले बजट सत्र में गहलोत सरकार राइट टू हेल बिल पेश करेगी। विधानसभा के बजट सत्र में अगर राइट टू हेल बिल पास हो जाता है तो देश भर में राजस्थान ऐसा पहला राज्य होगा जहां पर राइट टू हेल्थ का कानून बनेगा। राइट टू हेल्थ कानून के तहत समाज के हर तबके को निजी और सरकारी अस्पतालों में बेहतर इलाज मिल सकेगा। बताया जाता है कि इस कानून के लागू होने के बाद न केवल रोगियों बल्कि उनके अटेंडेंट को भी अधिकार देगा।

ashok gehlot
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मंत्रिपरिषद की बैठक में होगी ड्राफ्ट पर चर्चा
सूत्रों की मानें तो आगामी मंत्रिपरिषद की बैठक में राइट टू हेल्थ बिल के ड्राफ्ट पर चर्चा होगी और बिल पर सब की राय लेने के बाद इसे आगामी विधानसभा सत्र में पेश किया जाएगा। चर्चा है कि विधानसभा में बिल पेश करने से से पहले सरकार ठोक बजाकर बिल में अगर कोई खामी है तो उसे दूर करने का प्रयास भी करेगी।

विधानसभा में मुख्यमंत्री ने की थी घोषणा
दरअसल मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने बीते साल विधानसभा में राइट टू हेल्थ बिल लाने की घोषणा की थी और उसी को अमलीजामा पहनाते हुए सरकार अब इस बिल को लेकर आ रही है। बताया जाता है कि इस कानून के तहत इलाज में पारदर्शिता के साथ साथ गरिमा और सम्मान के साथ रोगियों में समानता और सस्ती स्वास्थ्य देखभाल और उपचार सुनिश्चित करना है।

शिकायतों के निवारण के लिए बनेगा राज्य स्वास्थ्य प्राधिकरण
बताया जाता है कि इस कानून के लागू होने के बाद ब्लॉक जिला और राज्य स्तर पर मरीजों की शिकायत के निवारण के लिए राज्य स्वास्थ्य प्राधिकरण का गठन भी होगा। शिकायतों के निवारण के लिए हर स्तर पर निर्वाचित प्रतिनिधियों, स्थानीय लोगों स्वास्थ्य और प्रशासन की एक समिति भी गठित की जाएगी।

स्थानांतरण नीति भी होगी लागू
राजस्थान में राइट टू हेल्थ बिल लागू होने के बाद चिकित्सा विभाग में स्थानांतरण नीति भी लागू होगी। सूत्रों की मानें तो आमतौर पर देखा जाता है कि शहरी क्षेत्रों में स्वास्थ्य कर्मचारी अधिक हैं और ग्रामीण क्षेत्रों में अपर्याप्त है। इस कानून के बाद यह तय होगा कि मरीज और पदों के साथ स्वास्थ्य कर्मचारियों की समानता हो। इसी तरह की नीति 1993 से तमिलनाडु में लागू है जहां ग्रामीण स्वास्थ्य सेवाओं में बेहतर सुधार हुआ है।

मुख्यमंत्री ने की थी मूल अधिकारों में शामिल करने की मांग
इससे पहले मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने केंद्र सरकार से राइट टू हेल्थ को संविधान के मूल अधिकारों में शामिल करने की मांग की थी। मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने केंद्र सरकार से मांग की थी कि देश के सभी नागरिकों को अच्छी स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध करवाना सुनिश्चित होना चाहिए।

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