बिना लक्षण वाले मरीजों से बढ़ा कोरोना संक्रमण का खतरा

— राज्य में एक लाख 12 हजार से ज्यादा हुए संक्रमित
— कई संक्रमितों में लक्षण नहीं दिखने ने बढ़ाई मुश्किलें

By: Tasneem Khan

Published: 19 Sep 2020, 11:26 AM IST

जयपुर। राजस्थान में बढ़ते कोरोना संक्रमण के बीच अब बिना लक्षण वाले मरीजों से स्वास्थ्य महकमे की मुश्किलें बढ़ गई है। कोरोना महामारी की चेन ना टूटने के लिए अभी चिकित्सा विभाग भी बिना लक्षण वाले मरीजों को कारण बता रहा है। विभाग की ओर से जारी बयान में कहा गया है कि जिन मरीजों में इस महामारी के लक्षण दिखाई नहीं देते, उनसे इसके संक्रमण फैलने का खतरा बना रहता है। इसका उपाय जन—जागरुकता ही हो सकता है। वहीं राज्य में ज्यादा से ज्यादा कोरोना टेस्ट से ही इसका पता लगाया जा सकता है और समय पर इसका इलाज कर फैलने से रोका जा सकता है। लेकिन फिलहाल ना तो जागरुकता अभियान ही बड़े स्तर पर चल रहे हैं और ना ही जांच का दायरा बढ़ पाया है। राज्य में अब हर दिन अधिकतम 25 से 30 हजार जांच हो पा रही हैं। वहीं बिना लक्षण वाले मरीजों की पहचान कर, उनसे हो रहे संक्रमण को रोकना, फिलहाल स्वास्थ्य महकमे के बस में नहीं।
चिकित्सा विभाग ने फिर की अपील
चिकित्सा विभाग ने एक बार फिर एडवायजरी जारी कर आमजन से सतर्क रहने की अपील की है। विभाग के मुताबिक कोरेाना पॉजिटिव की संख्या में बढ़ोतरी हमारी लापरवाही का परिणाम भी हो सकता है। आमजन से बाहर निकलते समय मास्क लगाने, समूह में ना जाने, बार-बार साबुन या सेनेटाइजर से हाथ साफ करने, कम से कम दो गज की दूरी रखने की अपील की गई है। विभाग के मुताबिक जहां लोगों ने लापरवाही बरती है वहीं पॉजिटिव केसेज में बढ़ोतरी हुई है।

बिना लक्षण के मरीज हैं सबसे बड़ी चुनौती
कोरोना के बढ़ते केस के बाद अब स्वास्थ्य मंत्री खुद कह रहे हैं कि बिना लक्षण के मरीज आज सबसे बड़ी चुनौती बने हुए हैं। उन्हें पहचानने के लिए केवल जांच ही एकमात्र विकल्प है। ऐसे मरीज अस्पताल तक पहुंचे या जांच कराने के लिए पहुंचे यह आमजन भी सुनिश्चित करें। आम लोगों के जागरूक रहने से ही ऐसे मरीजों की पहचान कर, संक्रमण रोका जा सकता है।

मृत्युदर सिर्फ 1.17 प्रतिशत
विभाग के अधिकारियों का कहना है कि प्रदेश की पॉजिटिविटी दर देशभर में सबसे कम है। मृत्युदर में लगातार गिरावट आ जा रही है। वर्तमान में मृत्युदर 1.17 प्रतिशत है। वहीं कोरोना केस बढ़ते देख अब सरकार ने भी अस्पतालों की बैड क्षमता बढ़ाई है। जयपुर में आरयूएचएस में बैड में बढोतरी की गई है। 500 बैड की क्षमता वाले जयपुरिया अस्पताल को हाल ही कोविड डेडिकेटेड अस्पताल घोषित कर दिया है और वहां ऑक्सीजन सप्लाई के बैड बढ़ाने का काम निरंतर चल रहा है। 200 बैड की क्षमता वाले ईएसआई अस्पताल को भी अधिग्रहित कर लिया गया है।
जांच की दरों में की कमी
हाल ही में चिकित्सा विभाग ने निजी अस्पतालों में कोविड के इलाज के लिए दरें निर्धारित की, वहीं जांच की दर को 2200 से 1200 रुपए प्रति जांच कर दिया गया है। वहीं होटल से भी एमओयू कर दरें निर्धारित की है ताकि आमजन को किसी परेशानी का सामना नहीं करना पड़े। विभाग ने अब आमजन की मदद के लिए हैल्प डेस्क का भी गठन कर दिया ताकि उन्हें वेंटिलेटर्स, बैड्स, ऑसीजनयुक्त बैड की वास्तविक स्थिति का पता चल सके।

इनका कहना है
बिना लक्षण वाले मरीजों की पहचान करना मुश्किल है, लेकिन आमजन सतर्क रहे तो संक्रमण को रोका जा सका है। अस्पतालों में बैड क्षमता बढ़ाई गई है। जरूरत पड़ी तो आर्मी से भी बैड लेंगे।
डॉ. रघु शर्मा, चिकित्सा एवं स्वास्थ्य मंत्री

Tasneem Khan Desk
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