दिवराला की रूपकंवर की फाइल कब बंद होगी

- 18 साल की महिला 32 साल पहले पति की चिता पर जिंदा जली, पर सती प्रथा समर्थकों को सजा नहीं

- 30 साल हो गए, कब होगा मेरे मुकदमे का फैसला

By: Shailendra Agarwal

Published: 05 Sep 2019, 02:20 PM IST

जयपुर।राजस्थान के सीकर जिले के दिवराला की 18 साल की रूपकंवर सती हो गई थी, आज के युवाओं को तो इसका शायद पता भी नहीं होगा लेकिन जयपुर में 31 साल से एक कोर्ट केवल इसी मामले की सुनवाई के लिए चल रही है। 30 साल से भी ज्यादा पुराना यह अकेला मुकदमा नहीं है, राजस्थान की निचली अदालतों में ऐसे 599 मुकदमे हैं।
पिछले तीन माह में 10 साल से पुराने मुकदमों में करीब 3 हजार की कमी आई है, लेकिन 1987 के दिवराला के सती प्रथा से जुड़े इस मामले में 8 आरोपियों के भविष्य का फैसला आज भी बाकी है। इस मामले में 18 साल की एक महिला अपने पति की मौत फैसले की तारीख इस महीने शायद ही आए, हालांकि अगली सुनवाई 11 सितम्बर को है। इस सुनवाई के दिन कोर्ट एक प्रार्थना पत्र पर विचार करेगा। यह वही मामला है, जिसमें भाजपा सरकार में मंत्री रह चुके राजेन्द्र राठौड़ और राज्य की मौजूदा सरकार में मंत्री प्रताप सिंह खाचरियावास भी आरोपी रह चुके है। यह बात अलग है कि वे अब बरी हो चुके हैं।
3 महीने 30 साल पुराने 200 मुकदमों का फैसला
हम आपको बता दें पिछले तीन महीने से प्रदेश की निचली अदालतों में पुराने मुकदमों को कम करने की मुहिम चल रही है। यह मुहिम राजस्थान हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश एस रविन्द्र भट्ट ने शुरू कराई थी, जिसके कारण तीन महीनों में 30 साल से पुराने 200 मुकदमों का फैसला हो चुका है। अब इनमें से कुछ मुकदमों के पक्षकारों को तो 'तारीख पर तारीख' फिल्मी डायलॉग अब रात को सपने में नहीं दिखता होगा और कुछ बुढ़ापे में यह सोच रहे होंगे कि फैसले के खिलाफ अपील कर दी जाए। प्रदेश की निचली अदालतों ने तीन महीने में 20 से 30 साल पुराने 845 मुकदमों का निचली अदालतों का फैसला कर दिया, इन मुकदमों में भी सुनवाई करते—करते कई जज बदल चुके थे और कुछ तो सुनते—सुनते रिटायर हो गए। अब 10 साल से केन्द्र सरकार के कानून मंत्री राग अलाप रहे हैं कि अदालतों में 5 से पुराना कोई मुकदमा नहीं रहना चाहिए, लेकिन 10 से 20 साल पुराने मुकदमों की संख्या आज भी 67590 है। यह आंकड़ा तो तब है जब 10 से 20 साल पुराने 6013 मुकदमों का तीन महीने में फैसला हो चुका है।

Shailendra Agarwal Reporting
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