किसान और युवा असंतोष के केंद्र हरियाणा और राजस्थान में है सबसे अधिक बेरोजगारी

लॉकडाउन में ढील के बाद उम्मीद की जा रही थी कि अर्थव्यवस्था में तेज रिकवरी होगी लेकिन ऐसा नहीं हुआ है। सीएमआईई की रिपोर्ट के अनुसार, बेरोजगारी के मामले में सबसे बुरा हाल हरियाणा राज्य का है। इसके बाद बड़े राज्यों में सबसे खराब हालात राजस्थान जैसे राज्यों की है जहां पर्यटन और हॉस्पिटेलिटी रोजगार और आय का बड़ा स्रोत रहे हैं, जो कि कोविड 19 संकट में सबसे अधिक प्रभावित सेक्टर रहा है।

By: Swatantra Jain

Updated: 29 Sep 2020, 05:29 PM IST

कोरोनावायरस लॉकडाउन ने दुनिया भर के देशों की अर्थव्यवस्थाओं को तबाह कर दिया है। अंतरराष्ट्रीय श्रम संगठन का अनुमान है कि पूरी दुनिया में कोविड संकट की वजह से वैश्विवक स्तर पर श्रमिकों की आय में करीब 11 प्रतिशत की कमी आई है। आय में इस कमी को अगर रोजगार में कमी के रूप में देखा जाए तो दुनिया भर में करीब 50 करोड़ लोग बेरोजगार हुए हैं। इनमें सबसे अधिक प्रभावित वे देश हुए हैं जिनमें अधिकांश रोजगार अंसगठित क्षेत्र में है, जैसे भारत और ब्राजील जैसे विकासशील देश। देश में लॉकडाउन में लगातार ढील का परिणाम है कि बेरोजगारी घट रही है। सेंटर फॉर मॉनिटरिंग इंडियन इकोनॉमी (सीएमआईई) द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार, सितंबर में जुलाई के मुकाबले शहरी और ग्रामीण बेरोजगारी दर तेजी से घट रही है। लेकिन चिंता कि बात ये है कि संगठित क्षेत्रों में नौकरी के पर्याप्त अवसर अब भी नहीं बन रहे और इस कारण असंगठित क्षेत्र में बढ़ रहा बेरोजगार दरअसल छलावा हो सकता है।

बड़े राज्यों में राजस्थान में सबसे अधिक बेरोजगारी

लॉकडाउन में ढील के बाद उम्मीद की जा रही थी कि अर्थव्यवस्था में तेज रिकवरी होगी लेकिन ऐसा नहीं हुआ है। सीएमआईई की रिपोर्ट के अनुसार, बेरोजगारी के मामले में सबसे बुरा हाल हरियाणा राज्य का है। इसके बाद बड़े राज्यों में सबसे खराब हालात राजस्थान जैसे राज्यों की है जहां पर्यटन और हॉस्पिटेलिटी रोजगार और आय का बड़ा स्रोत रहे हैं, जो कि कोविड 19 संकट में सबसे अधिक प्रभावित सेक्टर रहा है। सीएमआईई की रिपोर्ट के अनुसार सितंबर 2020 में अब भी बेरोजगारी कई राज्यों में 10 प्रतिशत से अधिक बनी हुई है - 10 प्रतिशत बेरोजगारी का मतलब है कि हर 10 में से एक कामगर बेरोजगार है।

जहां बेरोजगारी, वहीं सबसे अधिक उग्र प्रदर्शन

गौर करने की बात ये है कि जिन राज्यों में सबसे अधिक बेरोजगारी है, उन्हीं राज्यों में हमने पिछले दिनों किसानों और बेरोजगारों के सबसे अधिक उग्र प्रदर्शन भी देखे हैं।

बेरोजगारी के मामले में राज्यों के हालात
राज्य बेरोजगारी दर

हरियाणा 33.5
त्रिपुरा 27.9
राजस्थान में 17.5
गोवा 16.2
हिमाचल प्रदेश 15.8
पश्चिम बंगाल 14.9
उत्तराखंड 14.3
दिल्ली 13.8
बिहार 13.4
सिक्किम 12.5
जम्मू-कश्मीर 11.1
केरल 11
पंजाब 11
झारखंड 9.8
आंध्र प्रदेश 7
महाराष्ट्र 6.2
तेलंगाना 5.8
उत्तर प्रदेश 5.8
छत्तीसगढ़ 5.6
असम 5.5
पुडुचेरी 5
मध्य प्रदेश 4.7
मेघालय 3.7
तमिलनाडु 2.6
गुजरात 1.9
ओडिशा 1.4
कर्नाटक 0.5

फिलहाल रोजगार के हालत 2019 से भी बेहतर

लेकिन राहत की बात ये है कि सितंबर माह में रोजगार के हालात पिछले साल 2019 के हालत से भी बेहतर दिख रहे हैं। ऐसे में उम्मीद की जानी चाहिए की अनलॉक 5.0 की गाइडलाइंस जारी होने के बाद अक्टूबर में बेरोजगारी की हालत में और अधिक सुधार होगा। खासकर तब जबकि कोविड 19 संक्रमण के ऑंकड़ों में भी पिछले करीब 10 दिनों से सुधार के संकेत दिख रहे हैं।

माह बेरोजगारी दर (%)

भारत शहरी ग्रामीण
सितंबर 2020 6.6 8.4 5.8
अगस्त 2020 8.35 9.83 7.65
जुलाई 2020 7.40 9.37 6.51
जून 2020 10.18 11.68 9.49
मई 2020 21.73 23.14 21.11
अप्रैल 2020 23.52 24.95 22.89
मार्च 2020 8.75 9.41 8.44
फरवरी 2020 7.76 8.65 7.34
जनवरी 2020 7.22 9.70 6.06
दिसंबर 2019 7.60 9.02 6.93
नवंबर 2019 7.23 8.88 6.45
अक्टूबर 2019 8.10 8.27 8.02
सितंबर 2019 7.14 9.58 5.99

अक्टूबर में हालात और बेहतर होने की उम्मीद

अक्टूबर में रोजगार के हालात में सुधार होगा इसकी उम्मीद इसलिए भी की जा सकती है कि सितंबर माह में तेजी से बेरोजगारी दर घटी है। 5 सितंबर को भारत में बेरोजगारी दर 8.22 प्रतिशत थी जो कि 28 सितंबर को घटकर 6.64 प्रतिशत तक पहुंच गई थी।

भारत में सितंबर माह में बेरोजगारी दर- गतिशील मासिक औसत


भारत शहरी ग्रामीण
28 सितंबर 2020 6.64 8.41 5.83
27 सितंबर 2020 6.68 8.42 5.89
26 सितंबर 2020 6.66 8.44 5.85
25 सितंबर 2020 6.82 8.50 6.04
24 सितंबर 2020 6.88 8.55 6.11
23 सितंबर 2020 6.96 8.65 6.18
22 सितंबर 2020 7.02 8.71 6.24
21 सितंबर 2020 7.05 8.74 6.28
20 सितंबर 2020 7.06 8.88 6.22
19 सितंबर 2020 7.19 8.88 6.40
18 सितंबर 2020 7.22 8.85 6.47
17 सितंबर 2020 7.33 8.86 6.61
16 सितंबर 2020 7.30 8.92 6.55
15 सितंबर 2020 7.42 9.04 6.67
14 सितंबर 2020 7.60 8.97 6.97
13 सितंबर 2020 7.67 9.02 7.04
12 सितंबर 2020 7.83 9.09 7.25
11 सितंबर 2020 7.77 9.29 7.07
10 सितंबर 2020 7.78 9.35 7.04
09 सितंबर 2020 7.82 9.43 7.07
08 सितंबर 2020 7.91 9.53 7.15
07 सितंबर 2020 8.07 9.53 7.39
06 सितंबर 2020 8.13 9.54 7.46
05 सितंबर 2020 8.22 9.64 7.56

चिंताजनक: अंसगठित क्षेत्र में रोजगार बढ़ा, संगठित क्षेत्र में कम हुए
लेकिन बेरोजगारी कम होने के ये ऑंकड़े दरअसल छलावा भी हो सकते हैं। 2019-20 के दौरान भारत में कुल 8 करोड़ 60 लाख वेतनभोगी नौकरियां थीं। अगस्त 2020 में, उनकी गिनती 6 करोड़ 50 लाख रह गई थी। इस तरह 2020 में 2 करोड़ 10 लाख नौकरियों की कमी अभी तक संगठित क्षेत्र में बनी हुई है। बता दें कि भारत में कुल रोजगार में संगठित क्षेत्र का योगदान करीब 20 से 21 प्रतिशत तक का है। जबकि सीएमआईई ने अप्रेल 2020 में अनुमान लगाया था कि भारत में कुल रोजगार में कमी 12 करोड़ 10 लाख की थी और इसमें वेतनभोगी रोजगार का हिस्सा करीब 15 प्रतिशत यानी 1 करोड़ 30 लाख का था। यानी इसके बाद रोजगार के परिदृश्य में जो सुधार दिख रहा है वो अंसगठित क्षेत्र में ही हुआ है। संगठित क्षेत्र में तो बेरोजगारी करीब दोगुनी हो चुकी है।

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