77 बार विफल होने के बाद भी नहीं मानी हार, बनें सफल बिजनेसमैन

इन्होंने इलेक्ट्रिॉनिक डाटा सिस्टम नाम की कंपनी बनाई और लोगों को अपनी सेवाएं बेचने का काम करने लगे। हालांकि पहला कॉन्ट्रेक्ट पाने के लिए इन्हें बहुत संघर्ष करना पड़ा। करीब 77 बार इनके कॉन्टेक्ट को नकार दिया गया लेकिन इन्होंने हार नहीं मानी।

By: Archana Kumawat

Published: 19 Aug 2020, 10:10 PM IST

इनका जन्म 1930 में टेक्सास में हुआ था। पिता कमोडिटी ब्रोकर के रूप में काम करते थे। जब थोड़े बड़े हुए तो इनका एडमिशन पास ही की एक प्राइवेट स्कूल में करवा दिया गया। आठ साल के हुए तो इन्होंने जॉब करना शुरू कर दिया था। ये अखबार बांटने का काम किया करते थे। लोग इन्हें पेपर बॉय कहा करते थे। बिजनेस के गुण ये बचपन में ही अपने पिता से सीख गए थे। जब ये किशोरावस्था में आए तो अपने नाम में ‘रे’ को बदल कर पिता के नाम का ‘रोज’ रख लिया। असल में पिता से इनकी बॉन्डिंग बहुत अच्छी थी। 1947 में टेक्सास हाई स्कूल से इन्होंने अपनी ग्रेजुऐशन पूर्ण की। 1947 से 1949 में इन्होंने टेक्सारकाना जूनियर कॉलेज को जॉइन किया। 1949 में इन्होंने यूनाइटेड स्टेड नेवल एकडेमी में प्रवेश लिया। नेवी में अपनी सेवाएं देने के बाद 1957 में इन्होंने यूएस नेवी छोड़ दी।
प्राइवेट कंपनी में करने लगे काम
नेवी को छोडऩे के बाद इन्होंने फिर से अपनी बिजनेस स्किल्स पर विचार किया। इनकी सेल्स स्किल इतनी अच्छी थी कि जल्द ही इन्हें आईबीएम में नौकरी मिल गई। यहां इन्हें सेल्स डिपार्टमेंट की जिम्मेदारी दी गई। अपनी मेहनत और लगन से जल्द ही ये कंपनी के टॉप एम्प्लॉइज में शामिल हो गए। कंपनी ने इन्हें एक साल के लिए जो टारगेट दिया, वह इन्होंने मात्र दो सप्ताह में ही पूरा कर दिया। इसके बाद वह अपने आइडिया को अपने सुपरवाइजर के सामने रखने की कोशिश करते रहे लेकिन सुपरवाइजर ने इन्हें हर बार अनदेखा कर दिया। इस तरह खुद को इग्नोर किए जाने से परेशान हो गए और 1962 में इन्होंने आईबीएम की नौकरी छोडऩे का फैसला लिया।
शुरू की अपनी कंपनी
अपने आइडिया के साथ अब ये किसी और की नौकरी नहीं करना चाहते थे। इसलिए इन्होंने अपनी कंपनी शुरू की। यहां इन्हें नए आइडिया पर काम करने के लिए किसी से अनुमति की आवश्यकता नहीं थी। इन्होंने इलेक्ट्रिॉनिक डाटा सिस्टम नाम की कंपनी बनाई और लोगों को अपनी सेवाएं बेचने का काम करने लगे। हालांकि पहला कॉन्ट्रेक्ट पाने के लिए इन्हें बहुत संघर्ष करना पड़ा। करीब 77 बार इनके कॉन्टेक्ट को नकार दिया गया लेकिन इन्होंने हार नहीं मानी। इन्हें अपने आइडिया पर भरोसा था। बार-बार विफल होने के बाद एक दिन वह भी आया जब इन्हें अपना पहला कॉन्टेक्ट मिला। 1960 के दशक में कंपनी को यूएस गर्वनमेंट से कॉन्टेक्ट मिला। 1968 को कंपनी पब्लिक कंपनी बनी और इसकी स्टॉक प्राइज कुछ ही दिनों में 16 डॉलर से 160 डॉलर हो गई। 1968 में फॉच्यून मैग्जीन ने इनकी कवर स्टोरी छापते हुए इन्हें टेक्सास का सबसे तेजी से अमीर बनने वाले बिजनेसमैन कहा। यह व्यक्ति कोई और नहीं, बल्कि अमरीका के प्रसिद्ध बिजनेसमैन रोज पेरॉट थे। 1984 में इन्होंने जनरल मोटर्स को अपने शेयर्स बेच दिए। इसके बाद इन्होंने पेरॉट सिस्टम के नाम से नई कंपनी शुरू की। आगे इनका राजनैतिक कॅरियर भी रहा। 89 वर्ष की उम्र में 2019 में इन्होंने दुनिया को अलविदा कहा।

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