शाहीन बाग धरना:मध्यस्थों ने सौंपी रिपोर्ट,सुनवाई बुधवार को

(Shaheen Bagh)शाहीन बाग धरने के कारण (Roadblock) बंद सड़क को खुलवाने के लिए (Supreme court Of India) सुप्रीम कोर्ट की ओर से नियुक्त (interlocutors ) मध्यस्थ सीनियर एडवोकेट संजय हेगडे और साधना रामचन्द्रन ने सोमवार को अपनी (Report) रिपोर्ट सीलबंद लिफाफे में कोर्ट को सौंप दी।

By: Mukesh Sharma

Updated: 24 Feb 2020, 02:40 PM IST

जयपुर

(Shaheen Bagh)शाहीन बाग धरने के कारण (Roadblock) बंद सड़क को खुलवाने के लिए (Supreme court Of India) सुप्रीम कोर्ट की ओर से नियुक्त (interlocutors ) मध्यस्थ सीनियर एडवोकेट संजय हेगडे और साधना रामचन्द्रन ने सोमवार को अपनी (Report) रिपोर्ट सीलबंद लिफाफे में कोर्ट को सौंप दी। कोर्ट ने रिपोर्ट का अध्ययन करने के लिए दो दिन का समय लेते हुए सुनवाई बुधवार 26 फरवरी को तय की है। पिछले सप्ताह जस्टिस एस.के.कौल और जस्टिस के.एम.जोसफ की बैंच ने एडवोकेट संजय हेगडे को धरनार्थियों से वार्ता करने को नियुक्त किया था और उन्हें एडवोकेट साधना रामचन्द्रन या अन्य किसी को भी वार्ताकारों की टीम में शामिल करने की छूट दी थी।

फिलहाल गोपनीय रहेगी रिपोर्ट...
सोमवार को रिपोर्ट पेश करते हुए एडवोकेट साधना रामचन्द्रन ने मध्यस्थ नियुक्त करने के लिए कोर्ट का धन्यवाद दिया और कहा कि यह उनके लिए सीखने वाला एक बेहतरीन अनुभव रहा। पिटिशनर की ओर से रिपोर्ट की कॉपी मांगे जाने पर कोर्ट ने इनकार करते हुए कहा कि फिलहाल रिपोर्ट को गोपनीय रहने दिया जाए क्यों कि मध्यस्थ नियुक्त करने के कारण अलग थे और रिपोर्ट कोर्ट रिकार्ड के लिए ही है।

विरोध का है अधिकार लेकिन...

दरअसल 17 फरवरी को कोर्ट ने कहा था कि नागरिकता संशोधन विधेयक की संविधानिकता को चुनौती देने से उन लोगों के विरोध का अधिकार खत्म नहीं होता जो इस कानून से परेशानी महसूस कर रहे हैं। लेकिन सवाल यह है कि सड़कों को बंद किए बिना विरोध प्रदर्शन कहां और कैसे हो ? कोर्ट की चिंता केवल शाहीन बाग की नहीं है बल्कि यह है कि यदि भिन्न विचार रखने वालों ने भी यदि इसे उदाहरण मानकर विरोध करना शुरु कर दिया तो स्थिति बेहद विकट हो जाएगी और आम रास्तों पर यह सब बंद होना ही चाहिए ।

एडवोकेट अमित साहनी और नंदकिशोर गर्ग ने पिछले करीब 60 दिन से शाहीन बाग में सीएए और प्रस्तावित एनआरसी के खिलाफ सड़क रोककर दिए जा रहे धरने से बंद रास्ते को खुलवाने के लिए याचिका दायर की है और कोर्ट इसी पर सुनवाई कर रहा है। कोर्ट ने मामले में एडवोकेट संजय हेगडे और साधना रामचन्द्रन को धरना देने वालों से वार्ता के लिए मध्यस्थ नियुक्त किया था। इसके बाद दोनों ने शाहीन बाग में धरना देने वालों से बातचीत की थी।
बैरीकेडिंग है असली समस्या-
उधर मामले में पूर्व मुख्य सूचना आयुक्त वजाहत हबीबुल्लाह ने एक शपथ पत्र पेश कर कहा है कि विरोध शांतिपूर्वक चल रहा है और परेशानी का असली कारण पुलिस की ओर से साथ वाली सड़कों पर की गई अनावश्यक बैरीकेडिंग है। हालांकि कल ही धरनार्थियों ने शाहीन जामिया से नोएडा और फरीदाबाद की ओर जाने वाली सड़कों को खोल दिया है। आपको याद दिला दे कि शाहीन बाग में सीएए और प्रस्तावित एनआरसी के खिलाफ २४ घंटे का धरना दिया जा रहा है और मुख्य तौर पर महिलाओं की अगुआई वाले इस विरोध प्रदर्शन का कोई लीडर नहीं है।

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Mukesh Sharma
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