सांभर त्रासदी: सरकार बोली झील पर हमारा नहीं है कंट्रोल फिर भी बचा रहे हैं पक्षी

(Sambhar Lake)सांभर झील में (Migratory Birds death)प्रवासी पक्षियों की मौत के मामले में बुधवार को (Rajasthan Highcourt) हाईकोर्ट में सुनवाई हुई। राज्य सरकार की ओर से पेश जवाब में बताया है कि सांभर झील पर ना फॉरेस्ट और ना ही पशुपालन डिपार्टमेंट का कंट्रोल है और ना ही यह एरिया (forest land) फॉरेस्ट लैंड और (Protected area) संरक्षित एरिया है।

By: Mukesh Sharma

Published: 27 Nov 2019, 09:12 PM IST

जयपुर

(Sambhar Lake)सांभर झील में (Migratory Birds death)प्रवासी पक्षियों की मौत के मामले में बुधवार को (Rajasthan Highcourt) हाईकोर्ट में सुनवाई हुई। राज्य सरकार की ओर से पेश जवाब में बताया है कि सांभर झील पर ना (forest )फॉरेस्ट और ना ही (nimal husbandry) पशुपालन डिपार्टमेंट का कोई कंट्रोल है और ना ही यह एरिया (forest land) फॉरेस्ट लैंड और (Protected area) संरक्षित एरिया है। लेकिन सरकार ने यह नहीं बताया कि आखिर झील पर आखिर एडमिनिस्ट्रेटिव कंट्रोल है किसका ? हालांकि सरकार ने पूरी झील और इसके आस-पास के एरिया को फॉरेस्ट लैंड घोषित कर वाईल्ड लाईफ इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया को सौंपने के न्याय मित्र के सुझाव पर विचार करने की हामी भरी है। सरकार का कहना है कि इस संबंध में कोई भी फैसला करने से पहले स्थानीय जनता से विचार विमर्श किया जाएगा।

यह भी बताया-
सरकार का कहना है कि पशुपालन विभाग के पास अपने ही रेग्यूलर काम के लिए पर्याप्त स्टॉफ नहीं है फिर भी विभाग के डॉक्टर व कर्मचारी रेस्क्यू और बीमार पक्षियों के इलाज का काम पूरी शिद्दत से कर रहे हैं। झील से बीमार पक्षियों को निकालकर मौके पर ही उनका इलाज करने के बाद ही उन्हें रेसक्यू सेंटर में ले जाया जाता है। रेसक्यू सेंटर में पक्षियों को उनकी प्रजाति और साइज के अनुसार अलग-अलग रखा जा रहा है। बीमार पक्षियों को तीन श्रेणियों में बांटकर इलाज किया जा रहा है। इसके लिए आईसीयू,जनरल वार्ड और प्री-रिलीज वार्ड बनाए हैं और बीमार पक्षियों के मूवमेंट को कंट्रोल करने के लिए छोटे पिंजरों में रखा जाता है और उनकी हालत में सुधार होने पर उन्हें बडे एनक्लोजर में शिफ्ट किया जाता है। आखिरी स्टेज में उन्हें रीलित करने से पहले रतन तालाब पर बनाए बडे एनक्लोजर में रखकर उनके उडऩे की क्षमता का आकलन किया जा रहा है।

सलीम अली सेंटर फॉर पक्षीविज्ञान और नेचुरल हिस्ट्री की रिपोर्ट के अनुसार झील में बड़ी संख्या में प्रवासी पक्षियों की मौत पेस्टीसाईड पाईजनिंग से नहीं हुई है। सरकार की सभी एेजेंसियां पूरे समन्वय से बचाव कार्य कर रही हैं। काचरोड़ा नर्सरी में स्थापित अस्थाई रेसक्यू सेंटर अच्छा काम कर रहा है और २५ नवंबर तक झील में १९ हजार ५०७ पक्षियों की मौत हुई है। गहरे पानी से नावों और राफ्ट की मदद से मृत पक्षियों को निकाला जा रहा है। न्याय मित्र के सुझाव के अनुसार पहले से ही इनफ्टेबल बोट और ड्रोन वीडियोग्राफी से मृत पक्षियों का पता लगाया जा रहा है। फॉरेस्ट और पशुपालन विभाग सहित दूसरे सरकारी विभाग एनजीओ के साथ मिलकर रेसक्यू ऑपरेशन चला रहे हैं और मृत पक्षियों को दस फुट गहराई में दफनाने के साथ ही अब उन्हें जलाया भी जा रहा है। न्याय मित्र एडवोकेट नितिन जैन का कहना है कि वह सरकार के जवाब पर अपना जवाब पेश करेंगे हालांकि सांभर साल्ट का जवाब अभी नहीं आया है। मामले में अगली सुनवाई १८ दिसंबर को होगी। गौरतलब है कि हाईकोर्ट ने सांभर झील में प्रवासी पक्षियों की मौत के मामले में स्व:प्रेरणा से प्रसंज्ञान लेकर जनहित याचिका दर्ज की थी और सरकार से जवाब मांगा था।

Mukesh Sharma
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