Sankatnashan Ganesh Stotra गणेशजी का सिद्ध और सरल स्तोत्र, पाठ से टल जाती है बड़ी से बड़ी विपदा

ज्योतिषाचार्य पंडित सोमेश परसाई बताते हैं कि गणेशजी का यह सिद्ध स्तोत्र माना जाता है। स्तोत्र के नियमित पाठ से बड़ी से बड़ी विपदा टल जाती है। संकष्टी गणेश चतुर्थी के दिन इसका पाठ जरूर करना चाहिए।

By: deepak deewan

Published: 03 Dec 2020, 03:51 PM IST

जयपुर। सनातन धर्म में गणेशजी का स्थान सबसे अहम है। सभी देवी—देवताओं में उन्हें प्रथम पूज्य का दर्जा दिया गया है अथार्त किसी भी शुभ कार्य में सबसे पहले उन्हीं की पूजा की जाती है। गणेशजी बुद्धि के देवता माने जाते हैं। उन्हें विघ्न विनाशक भी कहा जाता है। बुधवार या गणेश चतुर्थी के दिन गणेशजी की पूजा का महत्व है। उन्हें दूर्वा अर्पित की जाती है।

यूं तो गणेशजी की पूजा—अर्चना के लिए अनेक मंत्र, स्त़ोत्र हैं पर इनमें संकटनाशन गणेश स्तोत्र सबसे फलदायी है। ज्योतिषाचार्य पंडित सोमेश परसाई बताते हैं कि गणेशजी का यह सिद्ध स्तोत्र माना जाता है। संकटनाशन गणेश स्तोत्र के नियमित पाठ से बड़ी से बड़ी विपदा टल जाती है। संकष्टी गणेश चतुर्थी के दिन इसका पाठ जरूर करना चाहिए।

संकट नाशन स्तोत्र – (नारद पुराण)

प्रणम्य शिरसा देवं गौरीपुत्रं विनायकम्
भक्तावासं स्मरेनित्यम आयुष्कामार्थ सिध्दये ॥1॥

प्रथमं वक्रतुण्डं च एकदन्तं द्वितीयकम्
तृतीयं कृष्णपिङगाक्षं गजवक्त्रं चतुर्थकम ॥2॥

लम्बोदरं पञ्चमं च षष्ठं विकटमेव च
सप्तमं विघ्नराजेन्द्रं धुम्रवर्णं तथाषष्टम ॥3॥

नवमं भालचंद्रं च दशमं तु विनायकम्
एकादशं गणपतिं द्वादशं तु गजाननम ॥4॥

द्वादशेतानि नामानि त्रिसंध्यं य: पठेन्नर:
न च विघ्नभयं तस्य सर्वसिध्दीकर प्रभो ॥5॥

विद्यार्थी लभते विद्यां धनार्थी लभते धनम्
पुत्रार्थी लभते पुत्रान्मोक्षार्थी लभते गतिम ॥6॥

जपेद्गणपतिस्तोत्रं षडभिर्मासे फलं लभेत्
संवत्सरेण सिध्दीं च लभते नात्र संशय: ॥7॥

अष्टभ्यो ब्राह्मणेभ्यश्च लिखित्वा य: समर्पयेत
तस्य विद्या भवेत्सर्वा गणेशस्य प्रसादत: ॥8॥

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