Ganesh Chaturthi Vrat गणेशजी को प्रसन्न करने हनुमानजी ने भी किया था यह व्रत

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By: deepak deewan

Published: 28 May 2021, 05:30 PM IST

जयपुर. 29 मई को ज्येष्ठ माह के कृष्णपक्ष की चतुर्थी तिथि है। चतुर्थी तिथि के दिन संकष्टी चतुर्थी व्रत किया जाता है। भगवान गणेशजी की प्रसन्नता व पूजा के लिए ये व्रत किया जाता है। माना जाता है कि संकष्टी चतुर्थी व्रत करने से गणेशजी के आशीर्वाद से हर तरह की परेशानियां दूर हो जाती हैं। कोई आसन्न संकट दूर हो जाता है।

ज्योतिषाचार्य पंडित सोमेश परसाई बताते हैं कि हर माह में दो बार चतुर्थी तिथि आती है। इस दिन व्रत रखकर गणेशजी का पूजन किया जाता है। माह के कृष्णपक्ष की चतुर्थी तिथि संकष्टी चतुर्थी कहलाती है जबकि शुक्ल पक्ष की चतुर्थी तिथि पर विनायक चतुर्थी व्रत करते हैं। दोनों ही गणेश चतुर्थी व्रत खासतौर पर संकष्टी चतुर्थी व्रत हमें हर प्रकार के संकटों से बचाता है।

गणेशजी बुद्धिविधाता हैं और संकटनाशक भी माने जाते हैं। संकष्टी चतुर्थी व्रत इतना प्रभावशाली व्रत है कि शनि की साढे साती से पीड़ित लोगों को भी राहत देता है। इस व्रत के प्रभाव से वे प्राय: इस अवधि में आनेवाले संकटों से बचे रहते हैं। इसलिए धनु, मकर, कुंभ राशिवालों और शनि की ढैया वाली राशियों के जातकों को यह व्रत रखकर गणेश पूजा करना चाहिए।

ज्योतिषाचार्य पंडित नरेंद्र नागर बताते हैं कि गणेश चतुर्थी या संकष्टी चतुर्थी व्रत कम से कम एक वर्ष तक करें। संकष्टी चतुर्थी व्रत के दिन दोपहर में गणेश पूजा का विधान है। पूजा में गणेशजी को दूर्वा जरूर अर्पित करें। गणेश चतुर्थी व्रत करनेवालों को उदय हुए चंद्रमा, श्रीगणेश और चतुर्थी माता को गंध, अक्षत आदि के साथ अर्घ्य देना चाहिए।

हनुमानजी भी गणेशजी की पूजा करते थे। ज्योतिषाचार्य पंडित एमकुमार शर्मा बताते हैं कि सीताजी को खोजने के लिए निकलने से पहले उन्होंने गणेश चतुर्थी व्रत रखकर गणेशजी की पूजा की। इससे गणेशजी प्रसन्न हुए और उनकी कृपा से हनुमानजी ने अपने बल के साथ बुद्धि का प्रयोग करते हुए सभी संकटों से पार पाते हुए माता सीता को खोजने में सफलता प्राप्त की।

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