Santan Saptami 2020 : शिव—पार्वतीजी की प्रसन्नता से मिलता है संतान को सुख, इस तरह करें पूजा

आज भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष की सप्तमी तिथि है। इस दिन संतान सप्तमी का व्रत किया जाता है। संतान प्राप्ति और उसके स्वास्थ्य सुख के लिए यह व्रत किया जाता है। ज्योतिषाचार्य पंडित सोमेश परसाई बताते हैं कि इस व्रत में भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा की जाती है। विधि विधान से की गई पूजा से शिव—पार्वतीजी की प्रसन्नता से न केवल अच्छी संतान प्राप्त होती है बल्कि उसकी रक्षा और उन्नति भी होती है।

By: deepak deewan

Updated: 25 Aug 2020, 08:20 AM IST

जयपुर. आज भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष की सप्तमी तिथि है। इस दिन संतान सप्तमी का व्रत किया जाता है। संतान प्राप्ति और उसके स्वास्थ्य सुख के लिए यह व्रत किया जाता है। ज्योतिषाचार्य पंडित सोमेश परसाई बताते हैं कि इस व्रत में भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा की जाती है। विधि विधान से की गई पूजा से शिव—पार्वतीजी की प्रसन्नता से न केवल अच्छी संतान प्राप्त होती है बल्कि उसकी रक्षा और उन्नति भी होती है।

संतान सप्तमी का व्रत एवं पूजा माता-पिता या फिर दोनों में से कोई भी कर सकता है। नि:संतान दंपत्ति संतान की कामना से यह व्रत करते हैं जबकि संतानवान दंपत्ति अपनी संतान की सुरक्षा और सुख के लिए भगवान शिव और माता गौरी से वरदान मांगते हैं।

ज्योतिषाचार्य पंडित नरेंद्र नागर के अनुसार स्नान के बाद व्रत एवं पूजा का संकल्प करें। दोपहर में शिव और गौरी की विधिविधान से पूजा करें। 7 मीठी पूड़ी बनाकर भगवान शिव और माता पार्वती को चढ़ाएं। एक रक्षा सूत्र अपनी संतान को बांध दें। संतान सप्तमी की कथा सुनकर भगवान शिव और माता गौरी की आरती करें। इसके बाद 7 मीठी पूड़ी का प्रसाद ग्रहण कर व्रत को पूरा करें। पूजा के समय अर्पित की वस्तुओं को किसी जरूरतमंद को दान कर दें।

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