मुझे बंधी दो... फिर खूब वसूलो घूस, कोई नहीं करेगा कार्रवाई

सवाईमाधोपुर भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो चौकी प्रभारी (एएसपी) भैरुलाल मीणा घूस की रकम संरक्षण मनी के नाम से वसूलते थे। सवाईमाधोपुर में परिवहन, बिजली, खनन, पुलिस सहित कुछ महत्वपूर्ण विभागों के खिलाफ एसीबी में शिकायत मिलती रहती है।

By: kamlesh

Published: 10 Dec 2020, 02:35 PM IST

जयपुर। सवाईमाधोपुर भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो चौकी प्रभारी (एएसपी) भैरुलाल मीणा घूस की रकम संरक्षण मनी के नाम से वसूलते थे। सवाईमाधोपुर में परिवहन, बिजली, खनन, पुलिस सहित कुछ महत्वपूर्ण विभागों के खिलाफ एसीबी में शिकायत मिलती रहती है। कई शिकायत झूठी तो कई सही होती है।

डीजी बीएल सोनी ने बताया कि आरोपी भैरुलाल मीणा शिकायतों पर कार्रवाई नहीं करने की एवज में संरक्षण मनी के नाम से कुछ सरकारी महकमों के अधिकारियों से रुपए वसूलता था। यहां तक कि आरोपी भैरुलाल का यह भी दावा था कि वह मिलने वाली शिकायतों पर कार्रवाई नहीं करेगा। एसीबी मुख्यालय को मिलने वाली शिकायतों की जांच भी उससे करवाई जाएगी, तब एसीबी मुख्यालय को शिकायत गलत होने की जानकारी दे गुमराह करके भ्रष्ट अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई नहीं होने देगा। एसीबी को दो माह पहले आरोपी द्वारा सरकारी विभागों के अधिकारियों से बंधी वसूलने की सूचना मिली थी, तभी से वह एसीबी के राडार पर था।

मार्च 2018 से था एसीबी चौकी प्रभारी
एसीबी के एडीजी दिनेश एमएन ने बताया कि आरोपी एएसपी भैरुलाल मीणा की पुलिस विभाग में अधिकांश ड्यूटी कोटा संभाग में ही रही। वह मार्च 2018 से सवाईमाधोपुर एसीबी का चौकी प्रभारी है।

दोनों अधिकारियों
के चार ठिकानों पर जारी सर्च एसीबी टीम आरोपी एएसपी भैरुलाल मीणा के सवाईमाधोपुर और कोटा आवास पर सर्च कर रही है। जबकि आरोपी डीटीओ महेशचंद मीणा के सवाईमाधोपुर और करौली आवास पर सर्च करने में जुटी है।

भ्रष्टों को बचाने में जुटे रहते हैं सरकारी विभाग
एसीबी सूत्रों के मुताबिक, कई सरकारी विभागों के आला अधिकारी भ्रष्टों को बचाने में जुटे रहते हैं। न्यायालय और मुख्यमंत्री के कहने के बावजूद सरकारी विभाग रंगे हाथ रिश्वत में पकड़े गए अपने अधिकारी व कर्मचारी के खिलाफ समय पर अभियोजन स्वीकृति नहीं देते हैं। एसीबी इस संबंध में आए दिन विभागों के मुखियाओं को पत्र भी लिखती रहती है।

इसके बावजूद वर्तमान में कई सरकारी विभागों के 102 अधिकारी, कर्मचारी और डीओपी में 32 अधिकारियों के खिलाफ अभियोजन स्वीकृति अटकी हुई है। इनमें कई मामले तो 2 वर्ष से अधिक पुराने हैं। बताते हैं कि इस वर्ष एसीबी ने 265 से अधिक मामलों में रंगे हाथ रिश्वत लेने वाले भ्रष्ट अधिकारियों व कर्मचारियों के खिलाफ कार्रवाई की है।

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