पूर्व सीएम को नहीं मिलेगें फ्री बंगले सुविधाएं,सुप्रीम कोर्ट ने रखा हाईकोर्ट का आदेश बहाल

(Supreme court )सुप्रीम कोर्ट ने (Ex CM) पूर्व मुख्यमंत्रियों को आजीवन मुफ्त में बंगला और स्टॉफ सहित वाहन आदि की सुविधाएं देने को गैर- कानूनी ठहराने वाले राजस्थान हाइकोर्ट के फैसले को बरकरार रखा है। सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को राजस्थान सरकार की विशेष अनुमति याचिका को खारिज कर दिया।

By: Mukesh Sharma

Published: 06 Jan 2020, 10:25 PM IST

जयपुर

(Supreme court )सुप्रीम कोर्ट ने (Ex CM) पूर्व मुख्यमंत्रियों को आजीवन मुफ्त में बंगला और स्टॉफ सहित वाहन आदि की सुविधाएं देने को गैर- कानूनी ठहराने वाले राजस्थान हाइकोर्ट के फैसले को बरकरार रखा है। सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को राजस्थान सरकार की विशेष अनुमति याचिका को खारिज कर दिया।

राजस्थान सरकार ने हाइकोर्ट के 4 सितंबर,2019 के फैसले को चुनौती देते हुए सुप्रीम कोर्ट में एसएलपी दायर की थी। सोमवार को जस्टिस यू.यू.ललित और जस्टिस विनीत सरन की बैंच ने मामले में दखल देने का कोई कारण नहीं होने के आधार पर राज्य सरकार की अपील को खारिज कर दिया।

हाइकोर्ट ने यह दिया था फैसला
राजस्थान हाइकोर्ट ने वरिष्ठ पत्रकार मिलापचंद डांडिया और विजय भंडारी की याचिकाओं को मंजूर करते हुए राजस्थान मंत्री वेतन संशोधन अधिनियम-2017 के तहत पांच साल तक लगातार मुख्यमंत्री रहने वाले नेताओं को जीवन भर मुफ्त में सरकारी बंगला,स्टॉफ व वाहन की सुविधाएं देने वाले प्रावधान को असंवैधानिक और गैर-कानूनी बताकर रद्द कर दिया था। आदेश की पालना नहीं होने पर अवमानना याचिका पर भी हाईकोर्ट सरकार को नोटिस दे चुका है।

राजे और पहाडिय़ा प्रभावित

सुप्रीम कोर्ट के फैसले का राजस्थान की पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे और जगन्नाथ पहाडिय़ा सीधे प्रभावित होगें। फिलहाल दोनों नेता पूर्व मुख्यमंत्री की सुविधाओं का उपभोग कर रहे हैं।

भाजपा सरकार ने ही बनाया था कानून-
राजस्थान में भाजपा की तत्कालीन सरकार ने राजस्थान मंत्री वेतन अधिनियम-1956 में संशोधन कर राजस्थान मंत्री वेतन संशोधन नियम-2017 के तहत बंगला टेलीफोन समेत कई सुविधाएं पूर्व मुख्यमंत्रियों को देने का विधेयक विधानसभा में पारित किया गया था। इसके मुताबिक पूर्व मुख्यमंत्री को एक सरकारी बंगला, राज्य और राज्य के बाहर कार मय ड्राइवर , राजस्थान प्रशासनिक सेवा के अधिकारी को बतौर निजी सचिव सहित नौ कर्मचारियों का स्टाफ और वाहन व स्टॉफ की सुविधा नहीं मिले तो इन पर होने वाला पूरा खर्च का भुगतान करना शामिल है।

Mukesh Sharma
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