आसाम एनआरसी कोआर्डिनेटर ने की सांप्रदायिक टिप्पणी,सुप्रीम कोर्ट ने मांगा जवाब

(CJI S A Bobde) सीजेआई एस.एे.बोबडे की बैंच ने सोमवार को आसाम के (NRC Cordinator) एनआरसी को-आर्डिनेटर हितेश देव सरमा से (communal post) सांप्रदायिक टिप्पणी करने पर सफाई देने को कहा है। सरमा ने यह टिप्पणी को-आर्डिनेटर बनने से पहले (facebbok) फेसबुक पर की थी। x

By: Mukesh Sharma

Updated: 06 Jan 2020, 08:30 PM IST

जयपुर

(CJI S A Bobde) सीजेआई एस.एे.बोबडे की बैंच ने सोमवार को आसाम के (NRC Cordinator) एनआरसी को-आर्डिनेटर हितेश देव सरमा से (communal post) सांप्रदायिक टिप्पणी करने पर सफाई देने को कहा है। सरमा ने यह टिप्पणी को-आर्डिनेटर बनने से पहले (facebbok) फेसबुक पर की थी। एक अन्य मामले में अटार्नी जनरल ने सुप्रीम कोर्ट को आश्वस्त किया है कि उन बच्चों को डिटेंशन सेंटर नहीं भेजा जाएगा जिनके माता-पिता तो एनआरसी में शामिल हैं लेकिन बच्चे बाहर हैं।

सरमा ने एक टीवी पत्रकार का हवाला देते हुए फेसबुक पर लिखा था कि किसी भी विदेशी को भारतीय नहीं माना जा सकता फिर चाहे वह असमिया भाषा बोलने वाला ही क्यों ना हो। उन्होंने पूर्व पाकिस्तानी मुस्लिमों के आसाम में रहने और लाखों बांग्लादेशियों के एनआरसी में शामिल होने का हवाला देते हुए लिखा था कि पिछले ७० साल से अल्पसंख्यक तुष्टिकरण की नीति ने धर्मनिरपेक्षता का अर्थ बदल दिया है। उनकी इस टिप्पणी के कारण उन्हें आसाम का नया एनआरसी को-आर्डिनेटर बनाने पर विवाद हो रहा है।

इससे पहले पिछले साल तत्कालीन सीजेआई रंजन गोगोई ने भी तब के एनआरसी को-आर्डिनेटर प्रतीक हजेला को तत्काल प्रभाव से मध्यप्रदेश ट्रांसफर करने के आदेश दिए थे। हालांकि कोर्ट ने उनके तत्काल ट्रांसफर के निर्देश देने के कारणों का खुलासा नहीं किया था लेकिन,माना जाता है कि फाइनल एनआरसी प्रकाशित होने के बाद हजेला की जान को खतरे के कारण ट्रांसफर के आदेश दिए गए थे। उस समय अटार्नी जनरल के.के.वेणुगोपाल ने कोर्ट से ट्रांसफर के निर्देश देने के कारण भी पूछे थे लेकिन,कोर्ट ने केवल इतना ही कहा था कि क्या बिना आधार के भी कोई आदेश होता है लेकिन कारणों का खुलासा तब भी नहीं किया था।

इसके साथ ही सोमवार को कोर्ट ने इसी मामले से जुडे़ एक अन्य मामले में उन बच्चों को डिटेंशन सेंटर भेजने पर आसाम और केन्द्र सरकार जवाब मांगा है जिनके माता-पिता तो एनआरसी में शामिल हैं लेकिन बच्चे बाहर रह गए हैं। कोर्ट को बताया गया कि एेसे करीब ६० बच्चों को उनके माता-पिता से अलग करके डिटेंशन सेंटर भेज दिया है। हालांकि अटार्नी जनरल ने इसे मानने से इनकार किया और कहा कि एनआरसी से बाहर रहने वाले बच्चों को एनआरसी में शामिल माता-पिता से अलग करके डिटेंशन सेंटर में नहीं भेजा जा सकता। गौरतलब है कि आसाम में करीब १९ लाख नागरिक एनआरसी से बाहर रह गए हैं और इनमें शामिल बच्चों को डिटेंशन सेंटर भेजने का दावा याचिका में किया है।

Mukesh Sharma
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