एससी-एसटी क्रीमीलेयर : केंद्र का सुप्रीम कोर्ट से ये आग्रह

केंद्र सरकार ( Central Government ) ने अनुसूचित जाति (एससी) और अनुसूचित जनजाति (एसटी) (SC-ST )श्रेणियों के आरक्षण से क्रीमी लेयर को हटाने ( Remove Creamy Layer )के 2018 के आदेश ( Supreme Court Verdict) पर पुनर्विचार ( Reconsideration ) के लिए वृहदपीठ को सौंपने ( Hand Over to Large bench ) का सुप्रीम कोर्ट से अनुरोध ( Request ) किया है। ( Jaipur News)

By: sanjay kaushik

Published: 03 Dec 2019, 01:57 AM IST

-वृहदपीठ से किया पुनर्विचार का अनुरोध

-क्रीमीलेयर को हटाने के 2018 का आदेश

-दो हफ्ते बाद होगी सुनवाई

-राजस्थान समता आंदोलन समिति भी पक्षकार

नई दिल्ली। केंद्र सरकार ( Central Government ) ने अनुसूचित जाति (एससी) और अनुसूचित जनजाति (एसटी) (SC-ST )श्रेणियों के आरक्षण से क्रीमी लेयर को हटाने ( Remove creamy layer )के 2018 के आदेश ( Supreme Court Verdict) पर पुनर्विचार ( Reconsideration ) के लिए वृहदपीठ को सौंपने ( Hand Over to Large bench ) का सुप्रीम कोर्ट से अनुरोध ( Request ) किया है। ( Jaipur News) आरक्षण से संबंधित अन्य जनहित याचिकाओं की सुनवाई करते हुए मुख्य न्यायाधीश एस.ए. बोबडे की अध्यक्षता वाली तीन-सदस्यीय खंडपीठ ने कहा कि इस मामले में दो सप्ताह बाद सुनवाई होगी।

-एसी-एसटी समुदाय क्रीमीलेयर की अवधारणा से बाहर

अटॉर्नी जनरल के.के. वेणुगोपाल ने कहा कि पांच सदस्यीय संविधान पीठ ने इस मामले में फैसला देते वक्त इस तथ्य पर विचार नहीं किया कि एसी-एसटी समुदायों को क्रीमीलेयर की अवधारणा से बाहर रखा गया है, जबकि यह प्रावधान भी पांच सदस्यीय संविधान पीठ ने 2008 में इंद्रा साहनी (मंडल केस) फैसले में किया था। वेणुगोपाल ने इस दलील के साथ सुप्रीम कोर्ट से आग्रह किया कि वह इस मामले में 2018 में आए पांच सदस्यीय संविधान पीठ के फैसले को सात न्यायाधीशों की संविधान पीठ के पास पुनर्विचार के लिए भेजे।

-दलील : एक ही मुद्दे पर बार-बार बहस नहीं

अटॉर्नी जनरल की इस दलील को वरिष्ठ वकील गोपाल शंकरनारायणन ने पुरजोर विरोध करते हुए कहा कि जरनैल ङ्क्षसह मामले में फैसला बिल्कुल स्पष्ट है और एक ही मुद्दे पर बार-बार बहस नहीं की जा सकती।

-दलील : केस को फिर नहीं खोला जा सकता

उन्होंने कहा कि यह सालाना कार्यक्रम नहीं हो सकता है। एससी-एसटी समुदायों में क्रीमीलेयर की अवधारणा पर 2018 का फैसला बिल्कुल स्पष्ट है। इसे (केस को) फिर से नहीं खोला जा सकता है।

-समता आंदोलन समिति का रख रहे थे पक्ष

शंकरनारायणन राजस्थान में एसी-एसटी समुदायों के गरीब एवं पिछड़े वर्ग का प्रतिनिधित्व करने वाली संस्था समता आंदोलन समिति का पक्ष रख रहे थे। फिलहाल अब दो हफ्ते बाद मामले की सुनवाई होगी। तीन सदस्यीय खंडपीठ की अध्यक्षता मुख्य न्यायाधीश एस.ए. बोबडे कर रहे हैं।

Show More
sanjay kaushik Incharge
और पढ़े

राजस्थान पत्रिका लाइव टीवी

हमारी वेबसाइट पर कंटेंट का प्रयोग जारी रखकर आप हमारी गोपनीयता नीति और कूकीज नीति से सहमत होते हैं।
OK
Ad Block is Banned