इस बार किसान की मेहनत पर पूरी तरह फिरता नजर आ रहा पानी

- पहले सफेद लट, फिर हरी लट और अब फड़का ने फेरा पानी
- अंतिम दौर में बारिश नहीं होने से झुलसी बाजरे की फसल
- किसान को आमदनी की बजाय कर्ज लेना पड़ रहा

By: santosh

Published: 19 Sep 2020, 04:06 PM IST

जयपुर/बांसखोह। किसान की मेहनत पर इस बार पूरी तरह पानी फिरता नजर आ रहा है। राज्य में बारिश के मौसम में किसान अधिकांश खेतों में बाजरे की बुआई करते हैं। बाजरे की पैदावर पर ही निर्भर रहते हैं। लेकिन इस बार क्षेत्र में बाजरे की फसल में जड़ में सफेद लट, पत्तों पर फड़का एवं बाजरे के सिट्टे में हरी लट लग जाने से किसानों के खेत में खड़ी फसल ही पूरी तरह चौपट हो गई। रही सही कसर बारिश ने पूरी कर दी। अंतिम समय में बारिश नहीं होने से कई खेतों में पछेती फसल के नहीं पकने से वह झुलस गई। गत वर्ष जहां बाजरे का भाव 21 सौ रुपए प्रति क्विटल तक था, वही अबकी बार बाजरे का भाव भी 1100-1200 रुपए प्रति क्विटल है। अब तो किसान को अपनी फसल की लागत भी जेब से खर्च करनी पड़ेगी, जिससे किसान अपने आप को ठगा सा महसूस कर रहा है।

60 फीसदी फसल को खराबा
बांसखोह सहायक कृषि अधिकारी कार्यालय के अधीन 2560 हैक्टेयर में बाजरे की बुआई हुई है। कृषि पर्यवेक्षकों ने बताया कि बांसखोह, भटेरी, पाटन, राजपुरा-पातलवास, भूड़ला में हरी लट, फड़का से करीब 60 फीसदी फसल को खराबा हुआ है। इस संबंध में उच्चाधिकारियों को भी अवगत कराया जाएगा। अब तो किसान अधपकी फसलों को ही चारे के लिए काटने को मजबूर है।

कैसे हो स्प्रे
कृषि पर्यवेक्षक विनोद महावर ने बताया कि हरी लट के की रोकथाम के लिए एमामेक्टिन बेंजोएट 5एसजी 0.5 ग्राम प्रति लीटर पानी या प्रोफेनोफॉस 50 ईसी 2 एमएल प्रति लीटर पानी के हिसाब से छिड़काव करें। इसे ट्रैक्टर चलित स्प्रेयर या बैटरी चलित पावर स्प्रे से स्प्रे करें। अब गांवों में किसानों के पास ट्रेक्टर चलित यह सुविधा उपलब्ध नही है। जिससे स्प्रे करने में दिक्कत आ रही है। चारों ओर खेतों में बाजरे की फसल होने से बाजरे की फसल में अब स्प्रे के लिए ट्रैक्टर कैसे जाए। वहीं अधिकांश किसान इसे घाटे का सौदा बता रहे हैं। किसानों ने बताया कि बाजरा पूरी तरह चौपट हो गया। अब शेष बचे बाजरे को बचाने के फेर में आर्थिक नुकसान उठाना पड़ेगा।

कम बारिश ने भी डुबोया
शुरुआती दौर में बारिश के साथ ही बाजरे की फसल खेतों में लहलाने से किसान फूला नहीं समा रहा था। लेकिन फिर शुरुआती दौर में बाजरे की जड़ों में सफेद लट लगना शुरू हो जाने से बाजरे के पौधे नष्ट होने लग गए थे। फिर इन दिनों फड़के ने बाजरे के पत्तों को काट दिया। वहीं अब हरी लट बाजरे के दाने को खाकर उसे खराब कर रही है ।अंतिम समय में पर्याप्त बारिश नहीं होने से भी फसल झुलस गई। किसानों को अब चिंता सताने लगी है कि कैसे खाद, बीज एवं ट्रैक्टर बुआई का खर्चा निकाल पाएंगे। कैसे फसल से बैंक की केसीसी का भुगतान करेंगे।

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