चार सौ मिडी बसें यार्ड में खड़ी आठ साल पूरे होने का कर रही इंतजार, ताकि कंडम बताकर बाहर किया जा सके

- साल 2013 में खरीदी गई थी करीब 500 मिडी बसें
- अगले साल हो जाएंगे आठ साल पूरे, किलोमीटर चली 5-6 लाख के बीच

By: Jaya Gupta

Published: 06 Oct 2021, 07:00 AM IST


जयपुर। रोडवेज प्रशासन में बसों को चलाने से ज्यादा कंडम बताकर बेडे से बाहर करने अधिक फोकस किया जा रहा है। इसका एक नमूना पढिए, रोडवेज ने साल 2013 में पांच सौ मिडी बसें खरीदी, ये बसें सड़क पर चलने के बजाए यार्ड में खड़ी अपने आठ साल पूरे होने का इंतजार कर रही हैं। आठ साल पूरे होते ही रोडवेज का यांत्रिकी विभाग इन बसों को कंडम बताकर स्क्रैप के भाव बेच देगा। अभी इनमें से करीब सौ बसें ही सड़क पर चल रही हैं। शेष चार सौ बसें मेंटीनेंस के अभाव में यार्ड में खड़ी हैं। अगले एक से डेढ साल बाद इन्हें कंडम बता दिया जाएगा। जबकि अभी तक इनके आठ लाख किलोमीटर पूरे नहीं हुए हैं। जानकारी के अनुसार ज्यादातर बसें तो 5-6 लाख किलोमीटर ही चली हैं।
यह तो मात्र एक उदारहण है। रोडवेज में इसी प्रकार बसों को कम किया जा रहा है। अब रूटों पर रोडवेज की खुद की केवल 2400 बसें ही चल रही हैं और बेडे में करीब 3200 बसें हैं। जबकि पांच-छह साल पहले तक करीब 5400 बसें रोडवेज के बेडे में थी।
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यांत्रिकी (इंजीनियरिंग) विभाग का कारनामा
बसों का समय पर मेंटीनेंस और मरम्मत करने की जिम्मेदारी रोडवेज के यंात्रिकी (इंजीनियरिंग) विभाग की है और बसों को कंडम घोषित करने की भी। लेकिन, यह विभाग बसों का मेंटीनेंस समय पर नहीं कर रहा है। बसों को थोड़ा खराब होने पर ही यार्ड में खड़ा कर दिया जाता है। फिर इन बसों के पार्ट्स निकालकर दूसरी बसों में भी लगा दिए जाते हैं। ऐसे में बसों की स्थिति खराब होती चली जाती है। जानकारी के अनुसार यांत्रिकी विभाग के प्रबंधक खुद ही मैकेनिकल या ऑटोमोबाइल फील्ड से नहीं है, वे इलेक्ट्रीकल में डिग्रीधारक हैं।
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आठ लाख किलोमीटर या आठ साल होने पर घोषित किया जाता है कंडम
राजस्थान रोडवेज में अभी तक बसों को 8 साल और 8 लाख किलोमीटर जो भी बाद में हो, उस पर नकाराकरण समिति की ओर से निरीक्षण किया जाता है। निरीक्षण कर भौतिक और यांत्रिक रूप से खराब स्थिति होने पर या उसकी मरम्मत और चलाने पर अधिक खर्च होने की स्थिति में समिति बसों कंडम घोषित करने की अनुशंषा करती है। अनुशंसा पर यांत्रिक विभाग बसों को नकारा घोषित करता है।
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अब प्रक्रिया बदलकर कर दी है यह
बसों को नकारा घोषित करने के निर्धारित मापदण्ड पूरे होने पर डिपो और केन्द्रीय कार्यशाला की नकाराकरण समिति बसों का निरीक्षण कर भौतिक और यांत्रिक रूप से खराब कन्डीशन होने पर या उसकी मरम्मत और चलाने पर अधिक खर्च होने की अनुशंसा करेेगी। अनुशंषा पर प्रबन्ध निदेशक या अध्यक्ष एवं प्रबन्ध निदेशक की स्वीकृति से बस को नकारा किया जाएगा।
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Jaya Gupta Reporting
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