scriptSea Coral reef found in desert Rajasthan | समुद्र में पाई जाने वाली मूंगा चट्टान रेगिस्तान में मिली | Patrika News

समुद्र में पाई जाने वाली मूंगा चट्टान रेगिस्तान में मिली

वैज्ञानिकों को ऑस्ट्रेलिया के एक रेगिस्तान के बीचों-बीच करोड़ों साल पुरानी मूंगा चट्टान (कोरल रीफ) मिली है। समुद्र की गहराइयों में पाई जाने वाली ऐसी चट्टानें प्राचीन इतिहास को समझने में मददगार साबित होती रही हैं।दक्षिण ऑस्ट्रेलिया के जिस नुलरबोर मैदान में यह चट्टान मिली है, वह चूना पत्थर की चट्टानों वाला 1.20 लाख स्क्वायर किलोमीटर का रेगिस्तान है।

जयपुर

Published: September 12, 2022 05:17:20 pm

वैज्ञानिकों को ऑस्ट्रेलिया के एक रेगिस्तान के बीचों-बीच करोड़ों साल पुरानी मूंगा चट्टान (कोरल रीफ) मिली है। समुद्र की गहराइयों में पाई जाने वाली ऐसी चट्टानें प्राचीन इतिहास को समझने में मददगार साबित होती रही हैं।दक्षिण ऑस्ट्रेलिया के जिस नुलरबोर मैदान में यह चट्टान मिली है, वह चूना पत्थर की चट्टानों वाला 1.20 लाख स्क्वायर किलोमीटर का रेगिस्तान है।

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यह रेगिस्तान 1.4 करोड़ साल पहले सेनोजोइक काल में महासागर के नीचे था। मूंगा चट्टान भी उसी काल की बताई जा रही है। पर्थ की कर्टिन यूनिवर्सिटी के शोधकर्ताओं ने हाई-रिजॉल्यूशन सैटेलाइट तस्वीरों में इसे देखा। शोध के सह-लेखक मिलो बरहम के मुताबिक नुलरबोर मैदान में मौसम और क्षरण प्रक्रियाओं से बड़ा बदलाव नहीं आया है। इतिहास को समझने की यह सबसे अच्छी जगह है।

कैसा है कोरल रीफ...

जर्नल अर्थ सरफेस प्रोसेस एंड लैंडफॉर्म्स में प्रकाशित शोध पेपर के मुताबिक मूंगा चट्टान की संरचना गोल है और यह बाकी सतह से ऊंची है। इसके बीच में गुंबद जैसी आकृति है। यह निशाने के लिए इस्तेमाल होने वाली बुल्स आई की तरह दिखती है। संरचना का व्यास 3,950 से 4250 फीट है। ऑस्ट्रेलिया के शोधकर्ताओं ने सैटेलाइट तस्वीरों में देखी मूंगा चट्टान ।

कभी समुद्र में डूबा था रेगिस्तान

बरहम ने बताया कि हाई रिजॉल्यूशन सैटेलाइट तस्वीरों में हमने इमेजरी और फील्डवर्क के जरिए लाखों साल से संरक्षित मूल समुद्री संरचना के अवशेष की पहचान की है। ऑस्ट्रेलिया का ज्यादातर हिस्सा आज सूखा है। लाखों साल पहले ऑस्ट्रेलिया जंगलों और समुद्रों से घिरा था। इनमें वह महासागर भी था, जिसमें नुलरबोर मैदान डूबा रहता था।

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Anand Mani Tripathi

आनंद मणि त्रिपाठी (@aanandmani) राजनीति, अपराध, विदेश, रक्षा एवं सामरिक मामलों के पत्रकार हैं। पत्रकारिता के तीनों माध्यम प्रिंट, टीवी और आनलाइन में गहरा और अपनी तेज तर्रार रिपोर्टिंग के लिए जाने जाते हैं। पश्चिम बंगाल के कलकत्ता में जन्म हुआ। प्रारंभिक शिक्षा उत्तर प्रदेश के कानपुर और बस्ती में हुई। माध्यमिक शिक्षा नवोदय विद्यालय बस्ती, फैजाबाद और पूर्वोत्तर त्रिपुरा के धलाई जिले में हुई। अयोध्या के साकेत महाविद्यालय से स्नातक और 2009 में जेआईआईएमसी,दिल्ली से पत्रकारिता का डिप्लोमा किया। हरियाणा से पत्रकारिता आरंभ की। शिक्षा, विज्ञान, मौसम, रेलवे, प्रशासन, कृषि विभाग और मंत्रालय की रिपोर्टिंग की। इंवेस्टिगेटिव रिपोर्टिंग से शिक्षा और रेलवे विभाग के कई भ्रष्टाचार का खुलासा किया। रक्षा मंत्रालय के रक्षा संवाददाता पाठयक्रम-2016 पूरा किया। इसके बाद रक्षा मामलों की पत्रकारिता शुरू कर दी। चीन, पाकिस्तान और कश्मीर मामलों पर तीक्ष्ण नजर रहती है। लेफ्टिनेंट उमर फैयाज की हत्या 2017, राइफलमैन औरंगजेब की हत्या 2018, जम्मू—कश्मीर में बदले 2018 में बदले राजनीतिक समीकरण, पुलवामा हमला 2019, कश्मीर से 370 का हटना, गलवान घाटी मुठभेड़ 2020 को बेहद करीब से जम्मू और कश्मीर में रहकर ही कवर किया। कोरोना काल 2020 में भी लददाख से नेपाल तक की यात्रा चीन के बदलते समीकरण को लेकर की। इसके साथ ही लोकसभा चुनाव 2019 में जम्मू कश्मीर, हिमाचल प्रदेश, हरियाणा और पंजाब की रिपोर्टिंग की। 9 नवंबर 2019 को श्रीराम जन्म भूमि अयोध्या मामले में आए फैसले की अयोध्या से कवर किया। 2022 उत्तरप्रदेश् चुनाव को सहारनपुर से सोनभद्र तक मोटर साइकिल के माध्यम से कवर किया। पत्रकारिता से इतर आनंद मणि त्रिपाठी को संगीत और पर्यटन का जबरदस्त शौक है। इन्हें किसी भी कार्य में असंभव शब्द न प्रयोग करने के लिए जाना जाता है...

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