#sehatsudharosarkar: स्वाइन फ्लू और डेंगू के कहर के बावजूद सरकार सुस्त, डिस्पेंसरियां लाचार

santosh trivedi

Publish: Sep, 17 2017 09:42:27 (IST)

Jaipur, Rajasthan, India
#sehatsudharosarkar: स्वाइन फ्लू और डेंगू के कहर के बावजूद सरकार सुस्त, डिस्पेंसरियां लाचार

संसाधनों व स्टाफ की कमी के कारण प्रदेश में करीब 3 हजार प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र और सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र खुद ही बीमार हो रहे हैं।

जयपुर। संसाधनों व स्टाफ की कमी के कारण प्रदेश में करीब 3 हजार प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र और सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र खुद ही बीमार हो रहे हैं। राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन और अन्य मदों में हर साल करीब 2 हजार करोड़ के खर्च वाले स्वास्थ्य विभाग के इन अस्पतालों की जमीनी हकीकत मरीजों को राहत देने की बजाय पीड़ा बढ़ा ही रही है।

 

दवाओं का टोटा
राजस्थान पत्रिका ने पड़ताल की तो स्वाइन फ्लू, डेंगू और अन्य मौसमी बीमारियों के कहर के बावजूद चिकित्सा-स्वास्थ्य विभाग बेफिक्र ही नजर आया। अस्पतालों में कहीं जांच के साधन नहीं हैं, कहीं दवाओं का टोटा है और कहीं नर्सिंग व अन्य स्टाफ नहीं है लेकिन इन्तजाम करने पर विभाग का ध्यान नहीं है।

 

दो बच्चे स्वाइन फ्लू पॉजीटिव
बस्सी निवासी लक्ष्य रैगर (3) एवं तनिष्क माली (5) की तबीयत खराब होने पर परिजनों ने एसएमएस अस्पताल में स्वाइन फ्लू की जांच करवाई, जिसमें दोनों स्वाइन फ्लू पॉजीटिव पाए गए। सीएचसी बस्सी की नर्स जौली ने बताया कि दोनों की हालत में सुधार है। इनकी देखभाल के लिए सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र (बस्सी) की नर्स जौली को जिम्मेदारी सौंपी हैं। जौली ने बताया कि दोनों की हालत में सुधार है। परिजनों को विशेष सावधानी बरतने के निर्देश दिए हैं। दूसरी तरफ बीसीएमओ डॉ. दिनेश मीना का कहना है कि क्षेत्र में बीमारियों की रोकथाम के लिए फोगिंग करवाई जा रही है।

 

80 फीसदी अस्पताल एक डॉक्टर के भरोसे
मेडिकल काउंसिल ऑफ इंडिया के अनुसार सरकार ने प्रदेश में 70 से 80 फीसदी अस्पतालों को एकमात्र डॉक्टर के भरोसे छोड़ा है। डॉक्टर की अनुपस्थिति में कई जगह अन्य संवर्ग के कर्मचारी इलाज करते देखे जा सकते हैं। राजधानी की डिस्पेंसरियों में से करीब 25-30 में एक डॉक्टर हैं। कई अस्पतालों के पास स्वयं का भवन नहीं है।

 

- 125 मौतें हो चुकी हैं स्वाइन फ्लू से अब तक
- 1000 के पार हुए डेंगू के रोगी
- 10,000 नए पद स्वीकृत करने की जरूरत है डॉक्टरों के, स्वीकृत पदों की तुलना में भी प्रदेश में 2-3 हजार डॉक्टरों की कमी
- 3 लाख मरीज रोजाना उपचार करा रहे हैं प्रदेश में पीएचसी और सीएचसी पर
- 30-40% फीसदी दवाओं की अनुपलब्धता है कई अस्पतालों में

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