सत्र बीता, विभाग तय नहीं कर पाया अंग्रेजी माध्यम की यूनिफार्म

सरकारी स्कूल (Government school) के विद्यार्थियों (students) को 'जेंटलमैन' बनाने के लिए सरकार ने वर्ष 2019 में प्रदेश के सभी जिलों में एक-एक महात्मा गांधी अंग्रेजी माध्यम विद्यालय (English medium school) खोले। अब नया सत्र (New Session) शुरू हो गया, लेकिन जिम्मेदार अभी तक विद्यार्थियों का डे्रस कोड (Dress code) तक तय नहीं कर पाए।

By: vinod

Updated: 07 Mar 2020, 11:46 PM IST

सत्र बीता, विभाग तय नहीं कर पाया अंग्रेजी माध्यम की यूनिफार्म

राजसमंद। सरकारी स्कूल (Government school) के विद्यार्थियों (students) को 'जेंटलमैन' बनाने के लिए सरकार ने वर्ष 2019 में प्रदेश के सभी जिलों में एक-एक महात्मा गांधी अंग्रेजी माध्यम विद्यालय (English medium school) खोले। अब नया सत्र (New Session) शुरू हो गया, लेकिन जिम्मेदार अभी तक विद्यार्थियों का डे्रस कोड (Dress code) तक तय नहीं कर पाए। इससे 'जेंटलमैन' बनने का सपना लेकर स्कूल आ रहे विद्यार्थी कोचिंग सेंटर के बच्चे बनकर रह गए हैं। ऐसे में पैसे वाले घरों के विद्यार्थी रोजाना अलग-अलग ढंग के महंगे तथा गरीब घरों के बच्चे साधारण कपड़े पहनकर स्कूल आ रहे हैं। इससे बच्चों का पढ़ाई में कम तथा यूनिफॉर्म्स पर ज्यादा ध्यान रहता है। विशेषज्ञ मानते हैं कि डे्रस कोड नहीं होने से बच्चे हीनभावना का भी शिकार होते हैं।
आनन-फानन के निर्णय का अब दिख रहा नतीजा

सरकार ने राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की 150वीं जयंती पर प्रदेश के सभी 33 जिलों के लिए एक-एक सरकारी अंग्रेजी माध्यम विद्यालय खोलने की घोषणा की। घोषणा के बाद से ही सारी व्यवस्थाएं आनन-फानन में चली। 30 मई 2019 को तो विभाग ने स्कूल चयनित करने के आदेश दिए। 14 दिन बाद 14 जून को ही स्कूलों का चयन कर स्कूलों की सूची जारी कर दी। 16 दिनों में आवेदन प्रक्रिया पूरीकर एक जुलाई से स्कूलों का संचालन शुरू कर दिया। बिना किसी पूर्व तैयारी के आनन-फानन में शुरू किए गए संचालन का ही नतीजा है कि अभी तक विद्यार्थियों की यूनीफार्म विभाग तय नहीं कर पाया। जबकि अब दूसरे सत्र के लिए आवेदन मांगे जा रहे हैं।

बिना यूनिफार्म के बच्चों में पनपती है हीन भावना
यूनिफार्म का उद्देश्यबराबरी की भावना का होता है। एक डे्रस होने से गरीबी-अमीरी के बीच का फर्क खत्म हो जाता है। बच्चों पर इसका काफी फर्क पड़ता है। कई बार तो बच्चे हीनभावना का शिकार हो जाते हैं। पढ़ाई से ज्यादा उनका ध्यान डे्रस पर ही रहता है। एक ड्रेस होने से लोगों को भी पता चलता है कि बच्चा किस संस्थान का है। इसलिए डे्रस बहुत ही आवश्यक है, आखिर ड्रेस की शुरुआत भी इसलिए की गई थी।

बैठक हुई है...

शिक्षा विभाग शीघ्र ही अंग्रेजी माध्यम के विद्यार्थियों का डे्रस कोड तय करेगा। इसे लेकर वीडियो कॉन्फेंस हुई है।

- ओमशंकर श्रीमाली, डीईओ, माध्यमिक राजसमंद

राजस्थान पत्रिका लाइव टीवी

हमारी वेबसाइट पर कंटेंट का प्रयोग जारी रखकर आप हमारी गोपनीयता नीति और कूकीज नीति से सहमत होते हैं।
OK
Ad Block is Banned