शब-ए-कद्र का है खास महत्व

जो कोई शब-ए-कद्र में ईमान के साथ और सवाब की नीयत से इबादत के लिए खड़ा हो, उसके पिछले तमाम गुनाह माफ कर दिए जाते हैं।

By: Rajkumar Sharma

Published: 16 May 2020, 11:07 AM IST

जयपुर. माहे रमजान में एक बरकत और बहुत खैर वाली रात रखी गई है, जिसे शब-ए-कद्र कहा जाता है। इसको कुरआन में हजार महीनों से अफजल (बेहतर) बताया गया है। मुफ्ती-ए-शहर मो. जाकिर नोमानी ने बताया कि इस एक रात की इबादत का सवाब 83 साल 4 महीनों से ज्यादा का है। जो कोई शब-ए-कद्र में ईमान के साथ और सवाब की नीयत से इबादत के लिए खड़ा हो, उसके पिछले तमाम गुनाह माफ कर दिए जाते हैं। (सही बुखारी-1901) शब-ए-कद्र को रमजान के आखिरी दस दिन की ताक रातों में तलाश करो। (बुखारी शरीफ-2017) हजरत आयशा ने अर्ज किया है कि ऐ अल्लाह के रसूल। अगर मैं शब-ए-कद्र पा लूं तो क्या दुआ मांगू? फरमाया (ऐ अल्लाह बेशक तू माफ करने वाला है, माफ करने वाले को पसंद करता है, पर मुझे माफ फरमा दें।) शब-ए-कद्र पूरे साल में एक ही होती है। जो अमूमन माहे रमजान में होती है।

रोजा इफ्तार और सहरी का वक्त
मुताबिक इफ्तार सहरी
शनिवार शाम रविवार सुबह
मुफ्ती-ए-शहर 7.09 4.09 बजे
जामा मस्जिद 7.11 4.01 बजे
दारुल-उलूम रजविया 7.11 4.03 बजे
शिया इस्ना अशरी 7.23 4. 00 बजे

Rajkumar Sharma Desk
और पढ़े

राजस्थान पत्रिका लाइव टीवी

हमारी वेबसाइट पर कंटेंट का प्रयोग जारी रखकर आप हमारी गोपनीयता नीति और कूकीज नीति से सहमत होते हैं।
OK
Ad Block is Banned