तारक मेहता का उल्टा चश्मा फेम शैलेश लोढा ने गुदगुदाया, राजस्थान को लेकर दिया ये बड़ा बयान

बदलें अपना नजरिया, दिल में बसा है राजस्थान, कहा सीधी बातों के लिए उल्टा चश्मा लगाना जरुरी

By:

Published: 21 Sep 2015, 12:40 PM IST

रविवार को गुफ्तगू सत्र में तारक मेहता का उल्टा चश्मा सीरियल फेम शैलेश लोढ़ा ने अपने जवाबों से श्रोताओं को गुदगुदाया। उन्होंने कहा सफलता छोटी या बड़ी नहीं होती। इसकी कोई परिभाषा भी नहीं होती। किसी भी कार्य को चुनौती मानते हुए करें तो सफलता जरूर मिलेगी। उन्होंने कहा कि सीधी बातों को देखने के लिए आजकल उल्टा चश्मा लगाना पड़ता है। लेकिन आप को किसी के प्रति धारणा, उल्टा-पुल्टा सोचने की बजाय नजरिया बदलना चाहिए। इस दौरान शैलेश ने क्या लिखूं वो परियों का रूप होती हैं...और हम कुंठित हैं तो यह परिभाषा है...कविता सुनाई।

शैलेश लोढ़ा ने कहा कि मरुधरा में पैदा होने की वजह से राजस्थान उनके दिल में बसा है। पाली जिले के सुमेरपुर में उन्होंने जीवन के आठवें वर्ष में पहली कविता पढ़ी। उसके बाद ही काव्य, लेखन में उनका रुझान बढ़ा। वे अपने मित्रों से राजस्थानी में बात करना पसंद करते हैं। वैसे भी राजस्थान के लिए कहावत मशहूर है....जो देख ली भरी परात...उठे नाच लिया सारी रात।

व्यंग्य शास्त्र नहीं शस्त्र

व्यंग्यकार अशोक चक्रधर ने व्यंग्य शास्त्र नहीं शस्त्र है...सत्र में बोलते हुए कहा कि व्यंग्य लोकतंत्र की सबसे बढिय़ा दवा है। व्यंग्य डाकू की नहीं डॉक्टर की गोली है। इसमें तर्क, करुणा, हास-परिहास होता है। व्यंग्य देश और समाज के लिए हितकारी है, लेकिन राज और शासन इसे धोबीपाट होने से ज्यादा पसंद नहीं करता।

लेखक प्रेम जनमेजय ने कहा कि हमें काल, परिस्थिति और समयनानुकूल व्यंग्य को सदैव तवज्जो देनी चाहिए। रास बिहारी गौड़ ने कहा कि सत्ता निरंकुश हो जाए तो शास्त्र अैार व्यंग्य ही काम आते हैं। संचालन संजय झाला ने किया।



राजस्थान पत्रिका लाइव टीवी

हमारी वेबसाइट पर कंटेंट का प्रयोग जारी रखकर आप हमारी गोपनीयता नीति और कूकीज नीति से सहमत होते हैं।
OK
Ad Block is Banned