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जयपुर

शनि जयंती और बड़ पूजन आज, 24 साल बाद बना दुर्लभ पंचग्रही योग, पति की दीर्घायु के लिए सुहागिनों ने रखा व्रत

Shani Jayanti and Bad Puja Today : शनि जयंती और बड़ पूजन आज मनाया जा रहा है। 24 साल बाद आज के दिन पंचग्रही योग बना है। पति की दीर्घायु के लिए सुहागिनों ने आज व्रत रखा है। शनि दोष से मुक्ति पाने के लिए जातक दान पुण्य करेंगे।

जयपुरJun 06, 2024 / 02:02 pm

Sanjay Kumar Srivastava

Shani Jayanti and Bad Puja Today Panchgrahi Yoga Formed After 24 Years

Shani Jayanti and Bad Puja Today

Shani Jayanti and Bad Puja Today : ज्येष्ठ कृष्ण अमावस्या गुरुवार को पंचग्रही योग में मनाई जाएगी। इस मौके पर शनि जयंती, बड़ पूजन अमावस्या और वट सावित्री व्रत का संयोग भी रहेगा। ज्योतिषविदों के मुताबिक शनि जयंती के तहत शनि की ढैय्या और साढ़ेसाती को दूर करने के लिए शनि मंदिरों में तेलाभिषेक सहित अन्य अनुष्ठान किए जाएंगे। स्नान और दान का दौर दिनभर जारी रहेगा। पितरों के निमित्त हवन और तर्पण किया जाएगा। शुभ मुहूर्त है अमावस्या तिथि बुधवार शाम 7.55 बजे से गुरुवार शाम 6.08 बजे तक।

सर्वकष्ट निवारक दिन

ज्योतिषाचार्य पं.हनुमान प्रसाद दाधीच के मुताबिक नवग्रहों में शनिदेव को विशेष दर्जा प्राप्त है, यह सेवा और कर्मकारक हैं। शनि देव का जन्म ज्येष्ठ माह की अमावस्या पर हुआ था। यह दिन सर्वकष्ट निवारक रहेगा। महिलाएं पति की लंबी आयु और स्वास्थ्य के लिए व्रत रखकर बरगद की पूजा करेगी। तीर्थ स्नान करने के साथ ही घर में गंगा मां का आह्वान कर गंगाजल डालकर स्नान करें।
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ऐसे समझें महत्व

ज्योतिषाचार्य पं.पुरुषोत्तम गौड़ के मुताबिक यह दिन पर्यावरण की दृष्टि से भी बेहद खास है। पर्यावरण की शुद्धि के लिए वट वृक्ष विशेष महत्व रखता है। यह हानिकारक गैसों को नष्ट कर वातावरण की शुद्धि में भी मददगार है। वट वृक्ष (बड़ वृक्ष) दीर्घकाल तक अक्षय बना रहता है। यह दीर्घायु, अक्षय सौभाग्य के लिए खास है। महिलाएं वट की पूजा, जल अर्पित करने के साथ ही परिक्रमा करेगी। शास्त्रानुसार वटवृक्ष के नीचे सावित्री ने अपने व्रत से मृत पति को पुन: जीवित किया था। तब से यह व्रत वटसावित्री व्रत के नाम से भीजाना जाता है।

24 साल बाद बना संयोग

ज्योतिषाचार्य पं.दामोदर प्रसाद शर्मा के मुताबिक शनि जयंती और बड़ पूजन अमावस्या पर रोहिणी नक्षत्र, धृति योग सहित अन्य योग-संयोग रहेंगे। सूर्य, चंद्र, बुध, गुरु और शुक्र ग्रह वृषभ राशि में रहेंगे। इससे पंचग्रही योग का निर्माण होगा। शर्मा ने बताया कि चंद्रमा अपनी उच्च राशि, शुक्र स्वराशि, बुध मित्र राशि में रहेंगे। ऐसा संयोग 24 साल बाद बनेगा। इससे आगामी दिनों में तापमान के उतार-चढ़ाव का सिलसिला जारी रहेगा। व्यापारिक क्षेत्र में तेजी का दौर देखने को मिलेगा। जरूरतमंद लोगों को अनाज, धन, कपड़े, जूते-चप्पल, छाते का दान करें। किसी प्याऊ में मटके का दान भी कर सकते हैं। काली चीजों और तेल का दान करने के साथ शनिदेव का तेलाभिषेक करना विशेष फलदायी रहेगा।

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