सांगानेर खुली जेल में कैदी महिलाओं के लिए खुशखबरी, अब नहीं होगा ऐसा

सांगानेर खुली जेल में कैदी महिलाओं के लिए खुशखबरी, अब नहीं होगा ऐसा

Deepshikha | Publish: Sep, 11 2018 08:44:52 PM (IST) Jaipur, Rajasthan, India

सांगानेर खुली जेल में कैदी महिलाओं को अपने बच्चों की चिंता सताती रहती है। इनकी इस समस्या को दूर करने का जिम्मा लिया शिल्पायन संस्था ने। संस्था की ओर से जेल में एक क्रेच चलाया जाता है।

दीपशिखा वशिष्ठ/जयपुर। कच्चे-पक्के मकान की बस्ती जहां दिन में सब वीरान लगता है, वहां होते हैं तो बस छोटे-छोटे बच्चे जो दिनभर धूल मिट्टी में खेलते रहते हैं। क्योंकि उनके परिजन दिन में काम पर चले जाते हैं और उनका ख्याल रखने वाला कोई नहीं होता। दरअसल हम बात कर रहे हैं सांगानेर खुली जेल की। जहां कैदी महिलाओं को अपने बच्चों की चिंता सताती रहती है।


इन महिलाओं की इस समस्या को दूर करने का जिम्मा लिया परिवार परामर्श और खुली जेल के कैदियों के लिए काम करने वाली संस्था शिल्पायन ने। महिलाएं चिंतामुक्त होकर काम कर सकें और उनके बच्चों की सही से कोई देखभाल भी कर सके। इसके लिए शिल्पायन संस्था की ओर से जेल में एक क्रेच चलाया जाता है, जहां बच्चों की देखभाल की जाती है। लक्ष्मी अशोक ने बताया कि कैदियों की कमाई ज्यादा नहीं होती इसलिए के्रच में आने वाले बच्चों से कोई शुल्क नहीं लिया जाता।


ऐसे हुई शुरुआत
संस्था की संस्थापक लक्ष्मी अशोक ने बताया कि शुरू में उनकी संस्था ने यहां के कैदियों के लिए कांउसलिंग का कार्य किया, तब उन्होंने देखा की कैदी महिलाएं अपने छोट-छोटे बच्चों घर पर ही छोड़ जाती, जिनकी देखभाल करने वाला कोई नहीं होता था। बच्चे धूल-मिट्टी में खेलते और भूख लगने पर रो-रोकर अपने आप चुप हो जाते। क्योंकि उनको चुप कराने वाला कोई नहीं होता था। यह स्थिती देखकर शुरू में तो संस्था खुद के खर्चे पर ही क्रेच चलाने लगी। बाद में संस्था के प्रयास वर्ष 2006 में राजीव गांधी शिशुपालना गृह योजना के तहत जेल परिसर में क्रेच खोला गया। बच्चों को संभालने के लिए दो आया काम करती हैं।


ऐसे संभालते हैं बच्चों को
जब मां-बाप काम पर निकलते हैं, तो जाने से पहले अपने बच्चों को क्रेच में छोड़कर जाते हैं। यहां आया इन्हें भूख लगने पर खान खिलाती है, पढऩा सिखाती है। जब इन्हें अपनी मम्मी की याद आती है तो मां बनकर खेल खिलाकर इनका मन बहलाती है। साथ ही बच्चों को पढ़ाया जाता है उनके लिए चित्रकला प्रतियोगिता और विभिन्न खेल प्रतियोगिताएं करवाई जाती है। ताकि बच्चों का मानसिक और शारिरिक विकास हो सके।

 

इन समस्याओं का हल
1 जेल में क्रेच चलाने के लिए अधिक जगह मिले तो क्रेच अच्छे से चलाया जा सकता है।
2सरकार से मिलने वाला फंड जरूरत के मुताबिक कम है। राशी में बढ़ोतरी की जाए तो इन बच्चों को अधिक सुविधाएं मिल सकेंगी।

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