एसएचओ ने 10 बसों को दे दी अनुमति, कलक्टर ने निरस्त करवाई

निजी बसों को बाहरी राज्यों में भेजने की अनुमति में ऐसी गफलत

By: Vijay Sharma

Published: 16 May 2020, 04:59 PM IST

दूसरे मामले में ब्लैक लिस्ट बस को जारी किया आॅलाइन पास

जयपुर। बाहरी राज्यों में श्रमिकों को लेकर जा रही निजी बसों को अनुमति देने में गफलत सामने आ रही है। हाल ही दो ऐसे मामले सामने आए हैं। शास्त्रीनगर थाना एसएचओ ने 10 निजी बसों को बंगाल जाने की अनुमति दे दी। थाना स्तर से अनुमति लेकर बसों ने मजदूरों को ले जाने की प्रक्रिया तक शुरू कर दी। इसकी सूचना जैसे ही जिला कलक्टर को लगी तो अनुमति निरस्त करने के आदेश दिए गए। बाद में एसएचओ को बस संचालकों को फोन कर बस नहीं ले जाने की हिदायत देनी पड़ी। लेकिन तब तक कई बसें निकल चुकी थी। इस मामले में एसएचओ सज्जन सिंह का कहना है कि पुलिस के आला अधिकारियों के निर्देश पर ही अनुमति दी गई थी। बाद में बसों को जाने के लिए मना कर दिया है।

इसीलिए रुकवाई बसें
बाहरी राज्यों में जाने वाली बसों को मजदूरों की सूची के साथ जिला कलक्ट्रेट में आवेदन करना होता है। कलक्टर की ओर से संबंधित राज्य की एनओसी ली जाती है। मजदूरों की मेडिकल जांच करानी होती है। इसके बाद आरटीओ टीपी जारी करता है।

इधर, बस ब्लैक लिस्ट और फोर व्हीलर दिखा कर लिया फर्जी ई—पास
दूसरे मामले में बस को फर्जी ई—पास देने का मामला सामने आया है। परिवहन विभाग की ओर से जिस बस को ब्लैक लिस्ट कर दिया। राजकोप सिटीजन एप पर उसी बस को बंगाल की पास जारी कर दिया। आवेदन के समय बस को फोर व्हीलर बताया गया। बस नंबर आजे 09 पीबी 2777 नंबर की बस शनिवार को शास्त्रीनगर से बंगाल के लिए रवाना हो गई। इस मामले में आरटीओ राजेन्द्र वर्मा का कहना है कि बस को टीपी नहीं दी गई है। बस पर कार्रवाई की जाएगी।

बस आॅपरेटर्स ने कलक्ट्रेट पहुंच जताया विरोध
इधर, बस आॅपरेटर्स ने कलक्ट्रेट पहुंचकर बसों के अनुमति मामले में सख्ती पर विरोध जताया है। आॅल राजस्थान बस आॅपरेटर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष राजेन्द्र शर्मा, महासचिव प्रवीण अग्रवाल, मनीष दाधीच सहित कई आॅपरेटर्स कलक्ट्रेट पहुंचे। उन्होंने जिला कलक्टर से मिलकर बस अनुमति देने की मांग की। आॅपरेटर्स का कहना है कि अन्य जिलों में आसानी से जिला प्रशासन अनुमति दे रहा है, वहीं जयपुर में अनुमति नहीं दी जा रही है। इसके कारण बस संचालन फर्जी अनुमति लेकर बस ले जा रहे हैं। उन्होंने बताया कि मजदूरों की स्क्रनिंग भी प्रशासन के स्तर पर करवाई जाए। ताकि आॅपरेटर्स को परेशान नही होना पड़े।

Vijay Sharma Reporting
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