चार सौ करोड़ के व्यापार को झटका

-श्रमिकों के पलायन व मांग के अभाव में बनी निराशाजनक स्थिति

चंद्रशेखर व्यास

जैसलमेर. पर्यटन के अलावा जैसलमेर जिले का एकमात्र पत्थर उद्योग कोरोना संक्रमण के चलते लागू किए गए लॉकडाउन में जड़ हो गया है। इस उद्योग से सीधे तौर पर जुड़े करीब 10 हजार लोगों के सामने रोजी-रोटी का संकट खड़ा हो चुका है, वहीं विदेशों तक चमक बिखेर चुके व 400 करोड़ रुपए सालाना कारोबार वाले इस उद्योग को फिर से पटरी पर लाने के लिए सरकारी स्तर पर ठोस प्रयास किए जाने की

By: Sudhir Bile Bhatnagar

Published: 16 May 2020, 05:05 PM IST

वर्तमान में एक महीने से ज्यादा समय तक बंद रहने के बाद पत्थर कटिंग और उससे जुड़े अन्य कारखानों को शुरू करवाने के सरकारी फैसले के बावजूद मुश्किल से 15 फीसदी इकाइयां ही शुरू हो पाई हैं और उनमें भी कुल उत्पादन का 5 से 10 फीसदी माल ही तैयार हो पा रहा है। इतना होने के बाद नहीं के बराबर मांग तथा वर्षों से काम करने वाले कुशल श्रमिकों के पलायन से स्थितियां उद्योगपतियों के एकदम विपरीत हैं। उन्हें सूझ नहीं रहा कि आने वाले कितने समय में उनका कामकाज पहले वाले स्तर पर लौट सकेगा।

छुट्टी जा चुके श्रमिक, काम भी बंद
जानकारी के अनुसार जैसलमेर मुख्यालय पर रीको औद्योगिक क्षेत्र के साथ शिल्पग्राम व किशनघाट क्षेत्रों में विभिन्न साइज के जैसलमेरी पत्थर की कटिंग, पॉलिशिंग, कार्विंग आदि कार्य से जुड़ी लगभग 450 इकाइयां हैं। जिनमें कटर व गैंगसा तथा हाथ से काम करने वाले कारीगरों की आखलियां शामिल हैं। यहां काम करने वाले एक हजार से ज्यादा बाहरी जिलों व राज्यों के कुशल श्रमिक लॉकडाउन के चलते बीते अर्से लौट चुके हैं। लॉकडाउन के दूसरे व तीसरे चरण में उद्योगों को शुरू करने के संबंध में सरकार से छूट मिलने के बाद स्थानीय पत्थर कारोबारियों ने अपनी बंद फैक्ट्रियों को शुरू करने की दिशा में कदम बढ़ाए, लेकिन उनकी राह में कई व्यावहारिक अड़चनें आ गई हैं।
ये भी हो रहे प्रभावित
लॉकडाउन में पत्थर इकाइयों के ठप होने से गत डेढ़ माह से जिले के पत्थर खदानों पर भी काम बंद हो गया। इससे खदान मालिकों व श्रमिकों के साथ खदानों से शहर के औद्योगिक क्षेत्रों में स्थित इकाइयों तक पत्थर के ब्लॉक्स लाने वाले ट्रकों तथा फैक्ट्रियों से शहर व आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों में माल पहुंचाने वाले लोडिंग वाहनों के पहिये भी थम गए हैं। इन कार्यों में संलग्न कामगारों व वाहन मालिकों के सामने आर्थिक संकट खड़ा हो चुका है। पत्थर इकाइयों के संचालकों को उद्योगबंदी के बीच बैंक या अन्य वित्तीय संस्था की किश्त का चुकारा, श्रमिकों व अन्य कर्मचारियों के वेतन, बिजली के बिल, जिनके पास अपने भूखंड नहीं है उन्हें किराया और अन्य खर्चों की चिंता ने झकझोर रखा है।
&पत्थर उद्योग से जुड़े सभी लोगों के सामने स्थितियां बहुत विपरीत हैं, कोरोना संक्रमण से उत्पन्न हालात ने पत्थर उद्योग पर एक तरह से बड़ा प्रश्नचिन्ह लगा दिया है। इस उद्योग को फिर से पुराने रंग में लौटने में लम्बा समय लगेगा, सरकार को राहत पैकेज की घोषणा करनी चाहिए।
गिरीश व्यास, सचिव, रीको इंडस्ट्रीज एसोसिएशन, जैसलमेर

Sudhir Bile Bhatnagar
और पढ़े

राजस्थान पत्रिका लाइव टीवी

हमारी वेबसाइट पर कंटेंट का प्रयोग जारी रखकर आप हमारी गोपनीयता नीति और कूकीज नीति से सहमत होते हैं।
OK
Ad Block is Banned