कीटनाशक लाइसेंस के लिए बीएससी कृषि स्नातक की अनिवार्यता से विक्रेता खफा 

कीटनाशक लाइसेंस के लिए बीएससी कृषि स्नातक की अनिवार्यता से विक्रेता खफा 

Abhishek Sharma | Publish: Feb, 09 2016 11:43:00 PM (IST) Jaipur, Rajasthan, India

केन्द्र सरकार की ओर से कृषि रसायन व खाद का व्यवसाय करने के लिए शैक्षणिक योग्यता निर्धारित करने व स्टॉक रजिस्टर की अनिवार्यता लागू करने के विरोध में कस्बे में खाद-बीज विक्रेताओं ने मंगलवार को अपने प्रतिष्ठान बंद रखे और उपखंड कार्यालय जाकर कृषि मंत्री के नाम ज्ञापन सौंपा।

केन्द्र सरकार की ओर से कृषि रसायन व खाद का व्यवसाय करने के लिए शैक्षणिक योग्यता निर्धारित करने व स्टॉक रजिस्टर की अनिवार्यता लागू करने के विरोध में कस्बे में खाद-बीज विक्रेताओं ने मंगलवार को अपने प्रतिष्ठान बंद रखे और उपखंड कार्यालय जाकर कृषि मंत्री के नाम ज्ञापन सौंपा।
ज्ञापन में दुकानदारों ने बताया कि खाद-बीज के व्यवसाय में अनुज्ञा पत्र प्राप्त करने के लिए शैक्षणिक योग्यता लागू करना गलत है। इस पेशे से कई कृषक परिवार जुड़े हैं जो अपनी आजीविका चला रहे हैं। कृषि रसायन व खाद परोक्ष रूप से जीवन रक्षक दवाओं की श्रेणी में नहीं आती। इस नियम से भ्रष्टाचार बढ़ेगा, जिससे दुकानदारों को परेशानी होगी।
ज्ञापन में स्टॉक रजिस्टर की अनिवार्यता का भी विरोध किया गया है। ज्ञापन देने वालों में हुकमीचन्द शर्मा, दुर्गाशंकर सैनी, कृष्णकान्त, नेमीचन्द अग्रवाल, पदमचन्द जैन समेत कई खाद-बीज विक्रेता शामिल थे।
भानपुर कलां . कस्बे सहित क्षेत्र के खाद-बीज व कीटनाशक दवा विक्रेताओं ने खाद-बीज व कीटनाशक दवाओं की दुकान के लाइसेंस के लिए बीएससी कृ षि स्नातक की अनिवार्यता करने के नियम को लागू करने के विरोध में मंगलवार को दुकानें बंद रखकर केन्द्र सरकार के समक्ष विरोध जताया। क्षेत्र के विक्रेताओं ने सरकार से मांग की है कि पुराने विक्रेताओं पर यह नियम लागू नहीं किया जाए, नए विक्रेताओं पर यह नियम लागू किया जा सकता है। खाद-बीज सप्लायर्स गुनावता के चंद्रप्रकाश गुप्ता ने बताया कि सरकार खाद-बीज विक्रेताओं का रोजगार छीनना चाहती है।
हम 50 साल से इस क्षेत्र में कार्य कर रहे हैं, अब अचानक सरकार द्वारा बीएससी कृ षि स्नातक डिग्री अनिवार्य करने का नियम थोपना समझ से बाहर है। सांकेतिक हड़ताल के चलते क्षेत्र के किसानों को खाद-बीज व कीटनाशक दवाइयों के लिए इधर-उधर भटकने को मजबूर होना पड़ा।

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