श्राद्ध पक्ष शुरू, 16 अक्टूबर तक सभी शुभ कामों पर रोक

आश्विन कृष्ण प्रतिपदा पर बुधवार से श्राद्ध पक्ष (Shraddha Paksha) शुरू हुआ। इसके साथ ही सभी तरह के मांगलिक और शुभ कार्यों (Auspicious work) पर विराम लग गया है। अब करीब डेढ़ माह तक सभी तरह के शुभ कार्यों पर विराम लग गया है। श्राद्ध पक्ष 17 सितंबर तक रहेगा। इसके बाद 18 सितंबर से 16 अक्टूबर तक आश्विन अधिकमास रहेगा। श्राद्ध पक्ष और अधिकमास में सभी तरह के मांगलिक और शुभ कार्य वर्जित बताए गए है।

By: Girraj Sharma

Published: 02 Sep 2020, 05:31 PM IST

श्राद्ध पक्ष शुरू, 16 अक्टूबर तक सभी शुभ कामों पर रोक
— श्राद्ध पक्ष के बाद आश्विन अधिकमास
— 17 सितंबर तक रहेगा श्राद्ध पक्ष
— 18 सितंबर से आश्विन अधिकमास, 16 अक्टूबर तक रहेगा अधिकमास
— 17 अक्टूबर से आश्विन नवरात्र शुरू, होंगे शुभ कार्य शुरू

जयपुर। आश्विन कृष्ण प्रतिपदा पर बुधवार से श्राद्ध पक्ष (Shraddha Paksha) शुरू हुआ। इसके साथ ही सभी तरह के मांगलिक और शुभ कार्यों (Auspicious work) पर विराम लग गया है। अब करीब डेढ़ माह तक सभी तरह के शुभ कार्यों पर विराम लग गया है। श्राद्ध पक्ष 17 सितंबर तक रहेगा। इसके बाद 18 सितंबर से 16 अक्टूबर तक आश्विन अधिकमास रहेगा। शास्त्रों के अनुसार श्राद्ध पक्ष और अधिकमास में सभी तरह के मांगलिक और शुभ कार्य वर्जित बताए गए है। अब 17 अक्टूबर को शारदीय नवरात्र (Sharadiya Navratri) के साथ ही शुभ कार्य शुरू हो पाएंगे।

ज्योतिषियों की मानें तो श्राद्ध पक्ष में खरीददारी हो सकती है। वहीं अधिकमास में भागवत कथा और दान—पुण्य किए जा सकते है, लेकिन इस बार अधिकमास पर कोविड 19 का साया रहेगा। तीर्थ स्नान पर भी संशय रहेगा। हालांकि लोग दान—पुण्य कर सकेंगे और घर पर कथा श्रवण करेंगेे। अधिकमास में आने वाली दोनों एकादशी कमला एकादशी होती है।

ज्योतिषाचार्य पं. दामोदर प्रसाद शर्मा ने बताया कि शास्त्रों में श्राद्ध पक्ष, जिसे पितृ पक्ष भी कहा जाता है, इसमें मुंडन, कुआं पूजन, नवीन कार्यारंभ, गृह प्रवेश, गृह आरंभ सहित सभी तरह के शुभ कार्य वर्जित बताए गए है। श्राद्ध पक्ष में सिर्फ खरीददारी कर सकते है। उन्होंने बताया कि अधिकमास में भी सभी तरह के शुभ कार्य वर्जित बताए गए है। अधिकमास में भागवत कथा और दान—पुण्य किए जा सकते है। ज्योतिषाचार्य नरोत्तम पुजारी ने बताया कि पूर्णिका के बाद अमावस्या तक 15 दिन पितरों को कहे जाते हैं। इन 15 दिनों में पितरों को याद किया जाता है और उनका तर्पण किया जाता है। श्राद्ध को पितृपक्ष और महालय के नाम से भी जाना जाता है। श्राद्ध पक्ष में सभी तरह के शुभ कार्यों पर रोक रहेगी।

श्राद्ध पक्ष और नवरात्र में एक माह का अंतर
ज्योतिषाचार्य डॉ. रवि शर्मा ने बताया कि करीब 19 साल बाद श्राद्ध पक्ष और नवरात्र में एक माह का अंतर रहेगा। इससे पहले साल 2001 में (18 सितबर 2001 से 16 अक्टूबर 2001 तक) आश्विन अधिकमास आया था। अब 2020 में आश्विन अधिकमास रहेगा। इसके बाद फिर 19 साल बाद वर्ष 2039 में आश्विन अधिकमास आएगा। ऐसे में इस साल श्राद्ध समाप्ति के अगले दिन नवरात्रि का पावन पर्व शुरू नहीं होगा, बल्कि एक महीने बाद शुरू होगा।

शारदीय नवरात्र 17 अक्टूबर से
शारदीय नवरात्र आश्विन शुक्ल प्रतिपदा पर 17 अक्टूबर से शुरू होंगे। 9 दिन देवी की आराधना की जाएगी। इस बार पूरे नौ दिन के नवरात्र रहेंगे।

Girraj Sharma Desk
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