Janmashtami 2018: बाल गोपाल के जन्मदिन के जश्न में डूबी छोटी काशी, गोविंददेवजी मंदिर में सजे दरबार

Janmashtami 2018:  बाल गोपाल के जन्मदिन के जश्न में डूबी छोटी काशी, गोविंददेवजी मंदिर में सजे दरबार

kamlesh sharma | Publish: Sep, 02 2018 07:35:43 PM (IST) | Updated: Sep, 02 2018 07:40:56 PM (IST) Jaipur, Rajasthan, India

जयपुर। श्रीकृष्ण जन्माष्टमी को लेकर पूरे देश में धूम मची है। बाल गोपाल के जन्मदिन का जश्न जोर-शोर से मनाया जा रहा है। छोटी काशी में भी जन्माष्टमी पर्व को लेकर कुछ अलग नजारा देखने को मिल रहा है। यहां गोविंददेवजी मंदिर परिसर में गोविंद के भव्य स्वागत के लिए विशेष तैयारियां की गई है। इस बार दो व तीन सितंबर को जन्माष्टमी पर्व मनाया जा रहा है।

 


आधी रात को ऐसे करें पूजा अर्चना

जन्माष्टमी के दिन लोग व्रत रखकर अपने आराध्य की पूजा करते हैं। घर की सुख शांति और समृद्धि के लिए व्रत का खासा महत्व है। जन्माष्टमी पर्व को मध्य रात्री १२ बजे बाल गोपाल का जन्म होगा। जन्म के बाद पंचामृत से श्रीकृष्ण को स्नान कराएं और गंगाजल से अभिषेक करें। इसके बाद भगवान श्रीकृष्ण सुंदर वस्त्र धारण करेंगे और पालने में विराजमान होकर झूला झुलेंगे।

 


देवकी की आठवीं संतान बनी कंस की मौत

पुराणों के अनुसार, मथुरा का राजा कंस जो उग्रसेन का पुत्र था। अपने पिता को अपदस्थ कर कंस शीघ्र खुद राजगद्दी पर बैठ गया। कंस के अत्याचारों और जुल्मों से जनता परेशान हो उठी। दरअसल, वसुदेव का विवाह कंस की बहन देवकी से हुआ था। उग्रसेन का पुत्र कंस चचेरी बहन देवकी की शादी के दौरान जब विदाई कर रहा था। उस वक्त अचानक कंस को आकाशवाणी सुनाई पड़ी। हे, कंस देवकी का आठवां पुत्र तेरी मौत का कारण बनेगा। ये सुनकर बहन को मारने के लिए कंस ने तलवार खींच ली। इस दौरान वसुदेव ने कंस के सामने प्रण लिया कि वह अपनी प्रत्येक संतान को मारने के लिए उसे सौंप देगा।

 

कंस के कैद में आधी रात को बाल गोपाल का जन्म

निरकुंश राजा कंस ने बहन-बहनोई को कैद में डाल दिया। कंस देवकी की संतानों को एक के बाद एक खत्म करता गया। इसके बाद विष्णु भगवान ने देवकी की कोख आठवें पुत्र के रुप में कंस की जेल में जन्म लिया। इधर, योगमाया ने यशोदा के गर्भ से जन्म लिया। आठवीं संतान को बचाने के लिए वसुदेव बरसती बारिश, कड़कती बिजली और उफनती नदी के बीच से नंद के घर पहुंच गए। इस बीच कैद के सारे दरवाजे एक-एक खुलते चले गए। नन्द ने नवजात बाल गोपाल को अपनी कन्या से बदल लिया। इसके बाद कंस ने उसे भी मारने का प्रयास किया।

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