अस्पतालों की इमरजेंसी के हालात, जूनियर डॉक्टर और नर्सिंग कर्मियों के भरोसे मरीज

अस्पतालों की इमरजेंसी के हालात, जूनियर डॉक्टर और नर्सिंग कर्मियों के भरोसे मरीज

neha soni | Publish: Jul, 20 2019 03:09:40 PM (IST) Jaipur, Jaipur, Rajasthan, India

अस्पतालों की इमरजेंसी के हालात, जूनियर डॉक्टर और नर्सिंग कर्मियों के भरोसे मरीज

साक्षी की मौत : खड़े कर गई कई सवाल

अस्पतालों की इमरजेंसी के हालात

ओपीडी में भी अक्सर सुबह का मुख्य समय रेजिडेंट्स के ही रहता है भरोसे

 

जयपुर।
तीन दिन पहले एसएमएस मेडिकल कॉलेज से संबद्ध सांगानेरी गेट स्थित महिला चिकित्सालय में पीजी प्रथम वर्ष की रेजिडेंट साक्षी गुप्ता की आत्महत्या के मामले ने मेडिकल कॉलेज अस्पतालों में आने वाले गंभीर मरीजों के उपचार के समय सीनियर डॉक्टरों की अनुपलब्धता को भी सवालों के दायरे में ला दिया है। प्रदेश के सबसे बड़े सवाई मानसिंह अस्पताल की मेडिकल कार्डियो-न्यूरो इकाइ सहित ट्रोमा इमरजेंसी में भी सीनियर फेकल्टी उपलब्ध नहीं होती।

 

प्रशासन का तर्क है कि जिस यूनिट का भर्ती का दिन होता है, वह पूरी यूनिट उस दिन ऑन कॉल रहती है। यानी मरीज की स्थिति देखकर उन्हें बुलाया जाता है। लेकिन विशेषज्ञ डॉक्टरों के अनुसार तब तक कई बार देर भी हो सकती है। जबकि इस सबसे बड़े अस्पताल की इन दोनों इमरजेंसी में सबसे गंभीर मरीज ही पहुंचते हैं। मरीज या घायल के गोल्डन ऑवर्स के समय इन्हें संभालने का मुख्य काम रेजिडेंट डॉक्टरों और चिकित्सा अधिकारियों के भरोसे ही रहता है। जबकि ऐसे समय इनकी स्थिति स्थिर करने का मुख्य समय आपातकालीन इकाइ में ही गुजरता है। गोल्डन ऑवर किसी भी मरीज या घायल के लिए सबसे महत्त्वपूर्ण होते हैं। बीमार या घायल होने से एक से डेढ़ घंटे की अवधि में समुचित उपचार शुरू होने पर जान बचाने की संभावना कई गुना बढ़ जाती है।

 

 

situation of Govt hospitals Emergency ward

जूनियर डॉक्टर और नर्सिंग कर्मियों के भरोसे नजर आए मरीज


करीब चार साल पहले तत्कालीन चिकित्सा मंत्री ने एसएमएस अस्पताल की इमरजेंसी को विभाग बनाने के निर्देश दिए थे। इसके तहत सीनियर फेकल्टी की ड्यूटी भी लगाई जानी थी लेकिन आज भी स्थिति जस की तस है। राजस्थान पत्रिका ने शुक्रवार को इमरजेंसी का जायजा लिया तो सीनियर डॉक्टर कोई भी मौजूद नहीं था। मरीजों और घायलों की संख्या उस समय दोनों जगह करीब 5-6 से अधिक थी। लेकिन उन्हें संभालने के लिए कुछ नर्सिंग कर्मी और एक दो जूनियर डॉक्टर ही वहां मौजूद थे।

situation of Govt hospitals Emergency ward

यह रहती है स्थिति
एसएमएस की इमरजेंसी में मेडिसिन, न्यूरोलोजी और कार्डियोलोजी के आपात स्थिति वाले मरीजों को लाया जाता है। लेकिन यहां इन सभी में कमोबेश जूनियर रेजिडेंट ही मौजूद रहते हैं। इनमें से भी बीच-बीच में उन्हें ओपीडी में बुला लिया जाता है। इसी तरह ट्रोमा इमरजेंसी में जूनियर रेजिडेंट, सीनियर रेजिडेंट और चिकित्सा अधिकारी मौजूद रहते हैं। दोनों ही जगह सीनियर फेकल्टी मौजूद नहीं रहती। महिला और जनाना अस्पतालों की इमरजेंसी में भी कई जटिल केस पहुंचते हैं लेकिन हर समय वहां सीनियर्स की मौजूदगी नहीं होती।

 

झगड़े होने की सर्वाधिक आशंका भी यहीं
इमरजेंसी में ही सबसे गंभीर मरीज पहुंचते हैं। यहां मरीजों के साथ आए परिजनों की भावनाएं भी जुड़ी होती हैं, वे अपने मरीज या घायल का तत्काल और बेहतर उपचार चाहते हैं। ऐसे में कई बार साथ आए लोगों से जूनियर डॉक्टरों की झड़प जैसी स्थिति भी हो जाती है। जबकि आमतौर पर सीनियर डॉक्टरों की मौजूदगी में इस तरह की घटनाएं नहीं होतीं।

situation of Govt hospitals Emergency ward

वार्डन पर कार्यवाही, बाकी से पूछताछ तक नहीं
साक्षी की मौत के मामले में महिला अस्पताल के वार्डन को हटा दिया गया है। जबकि आरोपी पांच डॉक्टरों से पूछताछ भी नहीं की गई है। आरोप है कि मामला शांत करने के लिए लीपापोती की गई, वार्डन को हटाकर इतिश्री कर ली गई है।

 

इमरजेंसी में सीनियर रेजिडेंट और लेक्चरर की ड्यूटी रहती है। इनके अलावा जिस यूनिट का भर्ती दिन होता है, वह पूरी यूनिट ऑन कॉल रहती है। इमरजेंसी ओटी वह पूरी यूनिट ही संचालित करती है। यह यूनिट हर गंभीर मरीज का उपचार करती है।
- डॉ. डीएस मीणा, अधीक्षक, सवाई मानसिंह अस्पताल

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