रोहिणी नक्षत्र में सूर्यग्रहण व शनि जन्मोत्सव

ज्येष्ठ कृष्ण अमावस्या पर गुरुवार को नवसंवत्सर का पहला सूर्यग्रहण (Solar Eclipse) होगा। हालांकि यह भारत के लद्दाख व पूर्वोत्तर राज्य अरुणाचल प्रदेश में अल्पग्रास दृश्य होगा, बाकि भारत में कहीं भी यह दिखाई नहीं देगा। ऐसे में लद्दाख और अरुणाचल प्रदेश को छोड़कर कहीं भी सूतक आदि मान्य नहीं होगा। इस दिन रोहिणी नक्षत्र (Rohini Nakshatra) और धृति योग में शनि महाराज का जन्मोत्सव (Shani Jayanti) भी मनाया जाएगा।

By: Girraj Sharma

Published: 09 Jun 2021, 10:18 PM IST

रोहिणी नक्षत्र में सूर्यग्रहण व शनि जन्मोत्सव

— सूर्यग्रहण व शनि जयंती एक साथ
— सूर्यग्रहण लद्दाख व अरुणाचल प्रदेश में अल्पग्रास दृश्य


जयपुर। ज्येष्ठ कृष्ण अमावस्या पर गुरुवार को नवसंवत्सर का पहला सूर्यग्रहण (Solar Eclipse) होगा। हालांकि यह भारत के लद्दाख व पूर्वोत्तर राज्य अरुणाचल प्रदेश में अल्पग्रास दृश्य होगा, बाकि भारत में कहीं भी यह दिखाई नहीं देगा। ऐसे में लद्दाख और अरुणाचल प्रदेश को छोड़कर कहीं भी सूतक आदि मान्य नहीं होगा। इस दिन रोहिणी नक्षत्र (Rohini Nakshatra) और धृति योग में शनि महाराज का जन्मोत्सव (Shani Jayanti) भी मनाया जाएगा। इस दिन वट सावित्री व्रत भी है।

ज्योतिषाचार्य डॉ. रवि शर्मा ने बताया कि सूर्यग्रहण भारत के लद्दाख में करीब 18 से 35 मिनट तक दिखेगा, वहीं पूर्वोत्तर राज्य अरुणाचल प्रदेश में 11 से 13 मिनट के लिए दिखेगा। बाकि भारत में कहीं भी यह दिखाई नहीं देगा। इस सूर्यग्रहण का ग्रासमान एक अंगुल से भी कम रहेगा। इसकारण यह सूर्य सूर्यग्रहण देख पाना कठिन होगा। राजस्थान सहित भारत के अन्य प्रदेशों में इसका प्रभाव नहीं पड़ेगा। ऐसे में इसका सूतक आदि भी मान्य नहीं होगा।

अन्य देशों में यहां रहेगा सूर्य ग्रहण
सूर्यग्रहण उत्तरी अमेरिका का उत्तर-पूर्वी भाग, उत्तरी कनाड़ा, ग्रीनलैण्ड़, यूरोप व एशिया महाद्वीप के उत्तरी भाग में स्थित देश रुस, मंगोलिया, कजाकिस्तान तथा चीन (पूर्वी हिस्से के कुछ भाग को छोड़कर) में यह सूर्यग्रहण कंकण व खण्डग्रास रुप में दोपहर 1.42 बजे से शाम 6.41 बजे के मध्य अलग-अलग समय पर दिखाई देगा।


बनेगा चतुग्रही योग
ज्येष्ठ अमावस्या पर वृषभ राशि में चतुग्रही योग भी बनेगा। वृषभ राशि में सूर्य, चंद्र, राहु, बुध ग्रह गोचर करेंगे। चन्द्रमा अपनी उच्च वृष राशि में रहेंगे। मंगल नीच राशि कर्क में, केतु वृश्चिक राशि में, शनि अपनी स्वराशि मकर में विराजमान रहेंगे। देवगुरु कुंभ राशि में विराजमान रहेंगे।

शनि जयंती रहेगी लाभकारी
ज्येष्ठ अमावस्या पर रोहिणी नक्षत्र और धृति योग के साथ चतुग्रही योग के बीच शनि महाराज का जन्मोत्सव भी मनाया जाएगा। ज्योतिषाचार्य नरोत्तम पुजारी ने बताया कि अमावस्या तिथि को रोहिणी नक्षत्र धृति योग और नाग करण रहेगा। इस बार शनि जयंती जातकों के लिए लाभकारी होगी। शनिदेव को प्रसन्न करने के लिए तिल, तेल व काले कपड़ों का दान, पशु—पक्षियों को दाना—पानी करने के साथ हनुमानजी महाराज की आराधना करना श्रेष्ठ रहेगा। इससे शनि की दशा, महादशा, अंतर्दशा और साढ़े साती, ढैया में लाभ होगा।

Girraj Sharma Desk
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