भोलेनाथ के इस व्रत को करने से चंद्रमा होता है मजबूत

Savita Vyas

Updated: 07 Dec 2019, 02:45:10 PM (IST)

jaipur

जयपुर। som pradosh: सावन में तो भगवान शिव की आराधना का महत्व है ही। साथ ही सोमवार और प्रदोष के दिन भी भगवान शिव की पूजा का विधान है। वैसे तो भगवान शिव की आराधना सालभर ही की जा सकती है, लेकिन खास दिनों पर भगवान शिव की पूजा—अर्चना करने से विशेष फल की प्राप्ति होती है। इस महीने मार्गशीर्ष मास के शुक्ल पक्ष की त्रयोदशी तिथि को सोम प्रदोष व्रत है, जो 09 दिसंबर दिन सोमवार को पड़ रहा है।
ज्योतिषियों के अनुसार सोमवार को त्रयोदशी तिथि आने पर इसे सोम प्रदोष कहते हैं। यह व्रत रखने से इच्छा अनुसार फल प्राप्ति होती है। जिसका चंद्र खराब असर दे रहा है उनको तो यह प्रदोष व्रत जरूर नियम ‍पूर्वक रखना चाहिए।
प्रदोष व्रत रखने से आपका चंद्र ठीक होता है। अर्थात शरीर में चंद्र तत्व में सुधार होता है। माना जाता है कि चंद्र के सुधार होने से शुक्र भी सुधरता है और शुक्र से सुधरने से बुध भी सुधर जाता है। मानसिक बैचेनी खत्म होती है। अक्सर लोग संतान प्राप्ति के लिए यह व्रत रखते हैं।

ज्योतिषाचार्य नरेश शर्मा ने बताया कि हर मास में दो प्रदोष व्रत आते हैं। प्रदोष व्रत हर मास के त्रयोदशी तिथि को पड़ता है। इस बार सोमवार के दिन पड़ने के कारण इसे सोम प्रदोष कहा गया है। किसी भी प्रदोष व्रत में भगवान शिव की पूजा शाम के समय सूर्यास्त से 45 मिनट पूर्व और सूर्यास्त के 45 मिनट बाद तक की जाती है। इस दिन शाम के समय विधि विधान से भगवान शिव की आराधना करने से भक्तों को आरोग्य का आशीर्वाद प्राप्त होता है।

सोम प्रदोष व्रत का मुहूर्त

मार्गशीर्ष मास के शुक्ल पक्ष की त्रयोदशी तिथि 9 दिसंबर को सुबह 09 बजकर 54 मिनट से प्रारंभ हो रही है, जो 10 दिसंबर को सुबह 10 बजकर 44 मिनट तक है। इस दिन पूजा का मुहूर्त शाम को 05 बजकर 25 मिनट से रात को 08 बजकर 08 मिनट तक है। इस मुहूर्त में भगवान शिव की पूजा—अर्चना विशेष फलदायी होगी।

यह है पूजा विधि

त्रयोदशी के दिन सुबह में स्नानादि से निवृत होने के बाद सोम प्रदोष व्रत और पूजा का संकल्प लें। स्नान के बाद भगवान शिव की पूजा—अर्चना करें। फिर दिनभर व्रत के नियमों का पालन करते हुए शाम को पूजा करें। खास बात यह है कि पूजा मुहूर्त में भगवान शिव की विधिपूर्वक पूजा करें।

शाम को स्नान के बाद पूजा स्थान पर उत्तर या पूर्व की दिशा में बैठें। इस दौरान साफ-सुथरे कपड़े पहनकर ही भगवान शिव परिवार की पूजा करें। फिर भगवान शिव की मूर्ति, तस्वीर या शिवलिंग की स्थापना करें। अब भगवान शंकर को गंगा जल, अक्षत्, पुष्प, धतूरा, धूप, फल, चंदन, गाय का दूध, भांग आदि अर्पित करें। फिर ऊं नम: शिवाय: मंत्र का जाप करें और शिव चालीसा का पाठ करें। इसके पश्चात घी या कपूर के दीपक से भगवान शिव की आरती करें। पूजा के बाद प्रसाद को परिजनों में बांट दें। इस दिन तामसिक भोजन जैसे प्याज, लहसुन का प्रयोग नहीं करना चाहिए।

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